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Budaun News: एक हजार गांवों से दमकल दूर... मुख्यालय से दौड़ती हैं गाड़ियां

Thu, 18 Apr 2024 03:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 18 Apr 2024 03:47 AM IST
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Fire brigade is away from a thousand villages... vehicles run from the headquarters
बिल्सी में खड़ी फायर बिग्रेड की गाड़ी। संवाद
बदायूं। अग्निशमन विभाग 14 अप्रैल से अग्निशमन सेवा सप्ताह मना रहा है। जगह-जगह लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन आग बुझाने के संसाधनों में वृद्धि नहीं हुई है। घिसे-पिटे संसाधनों से लगातार आग बुझाने के दावे किए जा रहे हैं। दावा है कि जिले की सभी तहसील क्षेत्रों में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जब तक फायर ब्रिगेड पहुंचती है तब तक सब कुछ जल चुका होता है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनमें आग से बड़ा नुकसान हुआ है।
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जिले की बदायूं, बिसौली, बिल्सी, सहसवान और दातागंज तहसील क्षेत्र में आग बुझाने के इंतजाम हैं, लेकिन जिले के 15 थाना क्षेत्रों के एक हजार गांवों से अग्निशमन सेवा दूर है। इन क्षेत्रों में जब भी अग्निकांड होते हैं तो तहसील मुख्यालय से ही फायर ब्रिगेड पहुंचती है। दूरी अधिक होने से आग से होने वाली क्षति को रोकना मुश्किल हो जाता है।
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जिन तहसीलों में आग बुझाने के इंतजाम हैं, कभी-कभी उसी इलाके में फायर ब्रिगेड आकर फेल हो जाती है। जिले के कादरचौक थाना क्षेत्र में कई बड़े हादसे हुए हैं, जिनमें फायर ब्रिगेड तब पहुंची है, जब वहां सब कुछ जलकर राख हो चुका था। उसके अलावा उसहैत, उसावां, अलापुर, मूसाझाग, बिनावर, कुंवरगांव, वजीरगंज, फैजगंज बेहटा, इस्लामनगर, उघैती, जरीफनगर और मुजरिया थाना क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। यहां आसपास के तहसील क्षेत्रों से ही फायर ब्रिगेड पहुंचती है।
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पानी उपलब्ध कराएंगे तब बुझेगी आग
बिल्सी। कस्बे में स्थायी रूप से कोई फायर स्टेशन नहीं है। कहने मात्र को एक पंप गाड़ी तैनात कर दी गई है, जो एक मार्च से 30 जून तक तैनात रहेगी। इस गाड़ी में पानी स्टोर करने की व्यवस्था नहीं है। सिर्फ एक पंप लगा होता है। जब पानी मिलता है तो उसे खींचकर ही आग बुझाई जा सकती है। इसके लिए तालाब ढूंढ़ना होता है या ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। सहसवान से गाड़ी आने में करीब एक घंटा लग जाता है। संवाद

शेखूपुर फाटक बंद मिल जाए तो कुछ नहीं बचता
कादरचौक। थाना क्षेत्र में एक दशक में गनियाई, जोरीनगला, नब्बीनगला में आग की बड़ी घटनाएं हुईं हैं। गनियाई में दो बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। नब्बी नगला में कई पशु मर गए थे। यहां वर्ष 2018 में फायर स्टेशन खुलवाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन कुछ नहीं हो सका। कादरचौक से अग्निशमन केंद्र करीब 35 किलोमीटर दूर है। अगर शेखूपुर रेलवे फाटक बंद मिल जाए तो फिर कुछ नहीं बचता। संवाद

यहां तो दमकल का इंतजार करना पड़ता है महंगा
उझानी। दमकल पहुंचती तो है, लेकिन बदायूं या फिर से सहसवान से। उसे आने में आधे घंटे से अधिक का समय लग जाता है। आठ अप्रैल को भवानीपुर गांव में जब वीरपाल के घर में आग लगी थी तो लोग फायर ब्रिगेड का इंतजार करने के बजाय खुद ही आग बुझाने में जुट गए। वीरपाल कहते हैं कि अगर दमकल का इंतजार किया जाता तो आग आसपास के घरों को भी अपने आगोश में ले लेती। ग्रामीणों ने पड़ोस का नलकूप चालू कराके आग बुझा ली। संवाद


जिले की पांचों तहसीलों में आग बुझाने के इंतजाम हैं। इसके अलावा अगर कहीं आग लग जाती है तो आसपास की तहसील से गाड़ी भेजकर आग बुझाई जाती है। जो संसाधन हैं, उनका पूरा उपयोग किया जाता है। कम से कम समय में आग बुझाने की कोशिश की जाती है। - रामराजा यादव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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