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बुखार से पांच लोगों की मौत, सैकड़ों लोग बीमार
सार
बुखार, मलेरिया और डेंगू अब जानलेवा होता जा रहा है।वजीरगंज ब्लॉक के गांव उरैना निवासी यूनुस की 26 वर्षीय पत्नी हाजरा बेगम को दो दिन पहले बुखार आया था।
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वजीरगंज ब्लॉक के गांव उरैना में जलभराव, अब मच्छर पनपेंगे तो बुखार तो फैलेगा ही। संवाद
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
बदायूं / सैदपुर। बुखार, मलेरिया और डेंगू अब जानलेवा होता जा रहा है। वजीरगंज ब्लॉक के गांव उरैना में बुखार ने तीन और सैदपुर में दो लोगों की जान ले ली। चार दिन के भीतर इन लोगों की मौत हुई है। तीन लोगों ने बरेली के निजी अस्पताल में और दो लोगों ने घर पर ही दम तोड़ दिया जबकि सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित हैं।
वजीरगंज ब्लॉक के गांव उरैना निवासी यूनुस की 26 वर्षीय पत्नी हाजरा बेगम को दो दिन पहले बुखार आया था। स्थानीय स्तर पर इलाज कराया तो हालत और बिगड़ गई। कोई डॉक्टर बुखार तो कोई डेंगू बता रहा था। इस पर यूनुस ने हाजरा को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उनकी मौत हो गई। इसी गांव के पुत्तन खान की 50 वर्षीय पत्नी मुन्नी बेगम और नासिर की 20 वर्षीय बेटी अंजुम को भी बुखार आ रहा था। हालत बिगड़ने पर इनको भी बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इलाज के दौरान दोनों की वहां मौत हो गई।
गांव में बड़ी संख्या में लोग बुखार की गिरफ्त में हैं। अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां न तो हेल्थ कैंप लगाया गया है और न ही मलेरिया की जांच कराई गई है। इधर, सैदपुर में भी बुखार के साथ डेंगू की दस्तक है। यहां दो दिन पहले ही डेंगू का एक रोगी मिला था। शनिवार को सैदपुर के 85 वर्षीय अमानउल्ला और 80 वर्षीय शाहजहां बेगम ने भी दम तोड़ दिया। इन दोनों लोगों को भी बुखार आ रहा था। सैदपुर कस्बे में भी बड़ी संख्या में लोग बुखार से पीड़ित हैं। पिछले दिनों जगत के गांव रायपुर में महिला, सालारपुर के गांव उझौली और भितारा में भी तीन लोगों की बुखार से जान जा चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग बुखार, संक्रामक या मच्छरजनित बीमारियों से मौतों की बात मानने को तैयार ही नहीं है।
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गांवों में जलभराव और गंदगी बन रही बीमारियों का कारण
संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण के लिए शासन स्तर से पंचायती राज विभाग की भूमिका भी तय की गई है। पर, विभाग अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा रहा। गांवों में गंदगी और जलभराव होने के कारण हालात खराब हो रहे हैं। उरैना में तीन लोगों की बुखार से जान गई है। गांव में जलभराव और गंदगी के कारण बुरा हाल है, लेकिन इस पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर नहीं जाती। रविवार को जिले में स्वास्थ्य मेलों का आयोजन किया गया तो यहां भी बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित मिले हैं।
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बुखार, संक्रामक या मच्छरजनित बीमारी से जिले में कोई मौत नहीं हुई है। उरैना और सैदपुर की मौतों की मामला संज्ञान में नहीं है। बरेली के किस अस्पताल में मौत हुई है वहां क्या जांच हुईं और मौत का क्या कारण रहा यह जानना जरूरी है। टीमों को भेजकर इसकी पड़ताल कराई जाएगी। जिले में पिछले वर्षों के मुकाबले हालात सामान्य हैं।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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वजीरगंज ब्लॉक के गांव उरैना निवासी यूनुस की 26 वर्षीय पत्नी हाजरा बेगम को दो दिन पहले बुखार आया था। स्थानीय स्तर पर इलाज कराया तो हालत और बिगड़ गई। कोई डॉक्टर बुखार तो कोई डेंगू बता रहा था। इस पर यूनुस ने हाजरा को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उनकी मौत हो गई। इसी गांव के पुत्तन खान की 50 वर्षीय पत्नी मुन्नी बेगम और नासिर की 20 वर्षीय बेटी अंजुम को भी बुखार आ रहा था। हालत बिगड़ने पर इनको भी बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इलाज के दौरान दोनों की वहां मौत हो गई।
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गांव में बड़ी संख्या में लोग बुखार की गिरफ्त में हैं। अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां न तो हेल्थ कैंप लगाया गया है और न ही मलेरिया की जांच कराई गई है। इधर, सैदपुर में भी बुखार के साथ डेंगू की दस्तक है। यहां दो दिन पहले ही डेंगू का एक रोगी मिला था। शनिवार को सैदपुर के 85 वर्षीय अमानउल्ला और 80 वर्षीय शाहजहां बेगम ने भी दम तोड़ दिया। इन दोनों लोगों को भी बुखार आ रहा था। सैदपुर कस्बे में भी बड़ी संख्या में लोग बुखार से पीड़ित हैं। पिछले दिनों जगत के गांव रायपुर में महिला, सालारपुर के गांव उझौली और भितारा में भी तीन लोगों की बुखार से जान जा चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग बुखार, संक्रामक या मच्छरजनित बीमारियों से मौतों की बात मानने को तैयार ही नहीं है।
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गांवों में जलभराव और गंदगी बन रही बीमारियों का कारण
संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण के लिए शासन स्तर से पंचायती राज विभाग की भूमिका भी तय की गई है। पर, विभाग अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा रहा। गांवों में गंदगी और जलभराव होने के कारण हालात खराब हो रहे हैं। उरैना में तीन लोगों की बुखार से जान गई है। गांव में जलभराव और गंदगी के कारण बुरा हाल है, लेकिन इस पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर नहीं जाती। रविवार को जिले में स्वास्थ्य मेलों का आयोजन किया गया तो यहां भी बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित मिले हैं।
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बुखार, संक्रामक या मच्छरजनित बीमारी से जिले में कोई मौत नहीं हुई है। उरैना और सैदपुर की मौतों की मामला संज्ञान में नहीं है। बरेली के किस अस्पताल में मौत हुई है वहां क्या जांच हुईं और मौत का क्या कारण रहा यह जानना जरूरी है। टीमों को भेजकर इसकी पड़ताल कराई जाएगी। जिले में पिछले वर्षों के मुकाबले हालात सामान्य हैं।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ