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सालारपुर का मुड़िया, समरेर का कौर गांव फैल्सीपेरम की चपेट में
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सालारपुर के गांव में रोगियों की जांच करता स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिले में मलेरिया का प्रकोप बढ़ने लगा है। सालारपुर ब्लॉक के मुड़िया और समरेर के गौर गांव को भी मलेरिया ने चपेट में ले लिया है। इन दोनों गांवों में जानलेवा फैल्सीपेरम मलेरिया के सात रोगी मिले हैं। शुक्रवार को जिले में 19 स्थानों पर कैंप लगाकर 1693 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। कुल 27 लोगों को मलेरिया की पुष्टि हुई। इसमें फैल्सीपेरम मलेरिया के नौ रोगी निकले।
शुक्रवार को समरेर, सालारपुर, जगत, वजीरगंज, जगत, उझानी, म्याऊ और कादरचौक के 24 स्थानों पर हेल्थ कैंप लगाए गए। सालारपुर के मुड़िया में तीन और समरेर के कौर में फैल्सीपेरम मलेरिया के चार रोगी मिले। इसके अलावा मूसाझाग में एक और शहर के मोहल्ला शहवाजपुर में भी एक रोगी को फैल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई है। सालारपुर ब्लॉक इस बार भी मलेरिया के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है। यहां अब तक मलेरिया और फैल्सीपेरम के सबसे ज्यादा रोगी मिले हैं। सितंबर के पहले सप्ताह में ही सालारपुर के गांव शेरगंज में फैल्सीपेरम मलेरिया के 24 से ज्यादा रोगी मिले थे। इसके बाद से स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग का ज्यादा फोकस समरेर ब्लॉक के गांवों पर है।
मलेरिया के छिटपुट मामले सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले मलेरिया नियंत्रण में है। अब तक डेंगू का कोई रोगी नहीं मिला है। जिले में बुखार से कोई मौत भी नहीं हुई है। मलेरिया की रोकथाम के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
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- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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शुक्रवार को समरेर, सालारपुर, जगत, वजीरगंज, जगत, उझानी, म्याऊ और कादरचौक के 24 स्थानों पर हेल्थ कैंप लगाए गए। सालारपुर के मुड़िया में तीन और समरेर के कौर में फैल्सीपेरम मलेरिया के चार रोगी मिले। इसके अलावा मूसाझाग में एक और शहर के मोहल्ला शहवाजपुर में भी एक रोगी को फैल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई है। सालारपुर ब्लॉक इस बार भी मलेरिया के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील बना हुआ है। यहां अब तक मलेरिया और फैल्सीपेरम के सबसे ज्यादा रोगी मिले हैं। सितंबर के पहले सप्ताह में ही सालारपुर के गांव शेरगंज में फैल्सीपेरम मलेरिया के 24 से ज्यादा रोगी मिले थे। इसके बाद से स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग का ज्यादा फोकस समरेर ब्लॉक के गांवों पर है।
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मलेरिया के छिटपुट मामले सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले मलेरिया नियंत्रण में है। अब तक डेंगू का कोई रोगी नहीं मिला है। जिले में बुखार से कोई मौत भी नहीं हुई है। मलेरिया की रोकथाम के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
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