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Budaun News: डीएपी की किल्लत से डरे किसानों का यूरिया का स्टॉक करने पर जोर

Fri, 06 Dec 2024 12:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2024 12:54 AM IST
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Fearing the shortage of DAP, farmers insist on stocking urea
उझानी में सहकारी समिति से यूरिया लेकर जाते किसान। संवाद
उझानी। जिले में डीएपी की किल्लत के बीच गेहूं और आलू उत्पादक डरे हुए हैं। इसका नजारा बृहस्पतिवार को यहां देखने को मिला। गेहूं में भले ही अगले सप्ताह यूरिया की जरूरत पड़े, लेकिन किसान कोई जोखिम उठाना नहीं चाहते। समितियों पर दूसरे दिन भी उन्हें प्रति 10 बीघा रकबा के हिसाब से यूरिया के दो बोरों के साथ एक बोतल नैनो दी गई।
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सहकारी समितियों पर यूरिया का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया जा रहा है। पंखा रोड स्थित बी-पैक्स के सचिव रवेंद्र शर्मा के मुताबिक- इफ्को की यूरिया के छह सौ बोरे पिछले दिनों मिले थे, जिनका बृहस्पतिवार को भी वितरण किया गया। दो दिन से भीड़ बढ़ती जा रही है। इसकी असल वजह वह किसानों की जरूरत बता रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है।
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किसान चंद्रपाल ने बताया कि डीएपी की किल्लत से अफसर भी वाकिफ हैं। गेहूं और आलू की बोआई के समय किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। समितियों से जब रकबा के हिसाब से डीएपी नहीं मिली तो अब यूरिया की किल्लत नहीं होगी, इसकी गारंटी कौन देगा।
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बताते हैं कि जिन किसानों को फसल में यूरिया लगाने की जरूरत अगले सप्ताह या फिर कुछ और दिन बाद पड़ेगी, वह भी समितियों पर भीड़ का हिस्सा बन गए हैं। बी- पैक्स पर बृहस्पतिवार अपराह्न तक करीब तीन सौ बोरे बांटे गए। प्रति 10 बीघा रकबा के लिए दो बोरों के साथ 60 रुपये की एक शीशी नैनो भी दी जा रही है।
इसके अलावा ब्लॉक क्षेत्र में बुटला और कछला में भी यूरिया वितरित की गई। क्रय-विक्रय समिति पर यूरिया नहीं आई है। नैनो को लेकर किसान अभी भी पसोपेश में हैं, लेकिन वह आने वाले दिनों में यूरिया की किल्लत की आशंका के चलते नैनो खरीदने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

गेहूं में बोआई के 25 दिन बाद यूरिया आवश्यक
गेहूं उत्पादक फसल में यूरिया का इस्तेमाल अपनी सहूलियत और खेत में नमी के लिहाज से करते रहे हैं। अधिकतर किसान पहली सिंचाई से दो- तीन पहले यूरिया का छिड़काव कर देते हैं, लेकिन खेती के वैज्ञानिक तरीके पर गौर करें तो गेहूं में 21वें दिन पहली सिंचाई हो जानी चाहिए। इसके चार-पांच दिन बाद यूरिया का इस्तेमाल फायदेमंद रहता है। उस वक्त पौधों में कल्ले फूट रहे होते हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार के मुताबिक- गेहूं ही नहीं, सरसों और आलू में सिचाई के बाद यूरिया ही यूरिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।


धन हस्तांतरण में देरी से प्रभावित हुआ डीएपी का आवंटन
उझानी में कृभको की डीएपी की रैक बुधवार को अनलोड हो गई थी। इसके बाद उसे समितियों में आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई तो कई समितियों की ओर से धन हस्तांतरण की प्रक्रिया बृहस्पतिवार दोपहर बाद तक भी पूरी नहीं की गई। उझानी ब्लॉक क्षेत्र की किसी भी समिति ने अब तक खाते में आरटीजीएस नहीं किया है। इसके चलते दूसरे दिन भी डीएपी आवंटन पर ब्रेक लगा रहा। बताते हैं कि देर शाम तक धन हस्तांतरण हो गया तो ब्लॉक क्षेत्र की समितियों के गोदामों तक डीएपी पहुंच जाएगी। इसके बाद ही वितरण शुरू होगा।
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