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बीस दिनों से धरने पर बैठे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं

Thu, 08 Jun 2017 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं। Updated Thu, 08 Jun 2017 11:44 PM IST
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Farmers sitting on dharna for 20 days are not ready to retreat
क‌िसान - फोटो : अमर उजाला
किसानों ने कहा, मेडिकल कॉलेज को जमीन देकर हो गए भूमिहीन, मुआवजा मिला, न नौकरी
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट पर मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से धरने और अनशन पर बैठे किसान आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि जब मेडिकल कॉलेज के लिए उनकी जमीनें अधिग्रहीत की गईं थीं तो सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा किसानों को चार किश्तों में दिया जाना था। इसके साथ ही जमीन देने वाले प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को कॉलेज में नौकरी देने का वायदा तत्कालीन अफसरों ने किया था। इसके बाद किसानों ने जमीन का बैनामा कराया लेकिन किसानों का कहना है कि अब तक सिर्फ एक किश्त का ही भुगतान हो पाया है, बाकी तीन किश्तों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसी तरह किसी भी किसान के परिवार के सदस्य को नौकरी भी नहीं मिल सकी है।
धरने पर बैठे चंद्रपाल, धर्मपाल, बेचेंलाल, गंगाराम, राजवीर, कैलाश, अजीत, प्रमोद, नत्थू लाल, बदन सिंह, महेंद्र आदि किसानों का कहना है कि जो जमीन थीं, वह कॉलेज में चली गई हैं, अब बच्चों का पेट पालना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन ने नौकरी की बात कही थी, वह भी नहीं मिली है और मुआवजा अटके होने से और काम भी नहीं कर पा रहे हैं। किसी को बिजनेस करना है तो किसी को बेटी की शादी करनी है, यही सोच कर बहुत सारे काम रुके हुआ हैं कि मुआवजा का पैसा मिलेगा तो जिंदगी को पटरी पर ला सकेंगे लेकिन अब तो जमीन भी नहीं बची, जिस पर खेती कर सकें। कई किसान तो अब भूमिहीन हो गए हैं।
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किसानों की बात
नौशेरा निवासी किसान भिखारी सिंह का कहना है कि हमारे पास डेढ़ बीघा जमीन थी वो इस मेडिकल कॉलेज के लिए बैनामा करा लिया गया। उस समय यह भी आश्वासन दिया गया कि नौकरी दिलाई जाएगी। अब न तो नौकरी मिली है और न ही मुआवजा मिला है।       
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किसान जय पाल सिंह ने बताया कि जब मेडिकल कॉलेज बनाने की बात हुई थी तब डीएम, एडीएम, तहसीलदार और लेखपालों ने मिलकर बैनामा करा लिया था और कुछ नही बताया केवल यह बताया कि यहां मेडिकल कॉलेज बनेगा। इसमें तुम्हारे परिवार के एक लोग नौकरी और जमीन का मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन मुआवजे की भी एक ही किस्त आई है और नौकरी का कुछ अता पता नही है।       
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धरने पर बैठीं नौशेरा निवासी राममूर्ति का कहना है कि उनके पति का पहले ही स्वर्गवास हो गया था अब एक माह पहले उनके इकलौते बेटे का भी निधन हो गया। इस समय उनके घर कमाने वाला कोई नही है। उन्होंने बताया कि वह कैसे जिए सरकार जमीन का पैसा भी नही देती है।       
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नैशेरा की कन्यावती का कहना है कि  उसका पति आठ दस साल से गायब है। उसका एक बेटा लगभग आठ साल का है। उसके पास लगभग एक बिसवा जमीन रोड किनारे थी, जो मेडिकल कॉलेज  प्रशासन ने दबा दी है। उसका कहना है कि वह क्या करें।    

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नौशेरा के रामपाल बाबा ने बताया कि उनके पास केवल ढाई बीघा जमीन थी। इनकी सब जमीन का बैनामा करा लिया गया। इनके दो लड़के हैं। वह मेहनत मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कहीं लड़कों की नौकरी लग जाती तो घर का हाल सुधर जाता।
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