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दिन भर नहीं दिखते किसान, अगले दिन हो जाती खरीद
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2016 12:21 AM IST
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किसानों का सरकारी क्रय केंद्रों से मोहभंग
गेहूं खरीद अनोखे अंदाज में हो रही है। किसान खरीद केंद्रों पर पहुंच नहीं रहे हैं। बावजूद इसके खरीद हो रही है। कागजों का पेट भरा जा रहा है। दलालों की चांदी कट रही है। जिलेभर के सभी 115 खरीद केंद्रों पर सन्नाटे पसर रहे हैं, लेकिन अगले दिन खरीद कागजों में हो जाती है।
जिले में समर्थन मूल्य के करीब आढ़तों पर गेहूं के रेट पहुंच जाने से किसानों का सरकारी क्रय केंद्रों से मोहभंग हो गया है। किसान नकद बिक्री के कारण 10-20 रुपये भाव घाटे को नहीं देख रहा है और न सरकारी खरीद के पचड़े में पड़ रहा है। यही वजह है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। खरीद का लक्ष्य बड़ा है और खरीद एजेंसियों को गेहूं खरीद दिखानी है। इसलिए क्रय एजेंसियों की निगरानी में ढिलाई हो गई है। अधिकतर केंद्रों पर दलालों का बोलवाला है। दिन में भले ही सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता हो, लेकिन अगले दिन खरीद की अच्छी रिपोर्ट आती है।
किसान बही भी मिल जाती हैं। किसानों के खाते भी मिल जाते हैं और खरीद भी हो जाती है। इसमें खेल क्या हो रहा है? इसे कोई पकड़ नहीं पा रहा। खरीद की हकीकत आसपास के सभी लोग जान रहे हैं। मगर, उच्चाधिकारियों को केंद्र प्रभारी अपने हिसाब से आइना दिखाने में सफल हो रहे हैं। सरकार ने भले ही खरीद का समय 15 दिन बढ़ा दिया है, इधर, 15 दिन बाद खरीद शुरू कर क्रय एजेंसियों ने हिसाब बराबर कर दिया है। हालत यह है कि क्रय केंद्रों पर किसानों की संख्या कम पहुंचने पर भी खरीद हो रही है। पूरा जिला ऐसे ही आंकड़ों पर चल रहा है। मध्यस्थता करने वालों की चांदी कट रही है। किसानों से अधिक केंद्रों पर दलालों की उपस्थित रहती है। यह केंद्र के अंदर होते हैं या केंद्रों के बाहर मंडराते रहते हैं।
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किसानों को नहीं मिल रहीं मूल सुविधाएं
बदायूं। क्रय केंद्रों पर किसानों को कोई सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। किसानों को बैठने के लिए तख्त, पीने के पानी की समुचित व्यवस्था, लोटा, बाल्टी, गिलास आदि की उपलब्धता नहीं हैं। किसानों के जानवरों को पानी के टब और छाया के लिए शामियाना भी नहीं हैं। कहीं-कहीं नाममात्र को कपड़े लटका दिए गए हैं।
एक महीना में खरीद हुई 22,137 एमटी
बदायूं। गेहूं खरीद को लगभग एक महीना होने जा रहा है विपणन शाखा ने अपने 14 केंद्रों पर 10380.4 एमटी, पीसीएफ ने अपने 47 केंद्रों पर 5709 एमटी, यूपीएसएस ने 35 केंद्रों पर 2434 एमटी, एसएफसी ने अपने 05 केंद्रों पर 83.2 एमटी, कर्मचारी कल्याण निगम ने अपने 04 केंद्रों पर 450.8 एमटी, यूपी एग्रो ने अपने 06 केंद्रों पर 2083 एमटी, भारतीय खाद्य निगम ने अपने 04 सेंटरों पर 1000 एमटी गेहूं खरीद गया है। जिले को मिले 1.33 लाख एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 115 क्रय केंद्रों पर 22137.4 एमटी गेहूं खरीदा गया है।
गेहूं खरीद अनोखे अंदाज में हो रही है। किसान खरीद केंद्रों पर पहुंच नहीं रहे हैं। बावजूद इसके खरीद हो रही है। कागजों का पेट भरा जा रहा है। दलालों की चांदी कट रही है। जिलेभर के सभी 115 खरीद केंद्रों पर सन्नाटे पसर रहे हैं, लेकिन अगले दिन खरीद कागजों में हो जाती है।
जिले में समर्थन मूल्य के करीब आढ़तों पर गेहूं के रेट पहुंच जाने से किसानों का सरकारी क्रय केंद्रों से मोहभंग हो गया है। किसान नकद बिक्री के कारण 10-20 रुपये भाव घाटे को नहीं देख रहा है और न सरकारी खरीद के पचड़े में पड़ रहा है। यही वजह है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। खरीद का लक्ष्य बड़ा है और खरीद एजेंसियों को गेहूं खरीद दिखानी है। इसलिए क्रय एजेंसियों की निगरानी में ढिलाई हो गई है। अधिकतर केंद्रों पर दलालों का बोलवाला है। दिन में भले ही सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता हो, लेकिन अगले दिन खरीद की अच्छी रिपोर्ट आती है।
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किसान बही भी मिल जाती हैं। किसानों के खाते भी मिल जाते हैं और खरीद भी हो जाती है। इसमें खेल क्या हो रहा है? इसे कोई पकड़ नहीं पा रहा। खरीद की हकीकत आसपास के सभी लोग जान रहे हैं। मगर, उच्चाधिकारियों को केंद्र प्रभारी अपने हिसाब से आइना दिखाने में सफल हो रहे हैं। सरकार ने भले ही खरीद का समय 15 दिन बढ़ा दिया है, इधर, 15 दिन बाद खरीद शुरू कर क्रय एजेंसियों ने हिसाब बराबर कर दिया है। हालत यह है कि क्रय केंद्रों पर किसानों की संख्या कम पहुंचने पर भी खरीद हो रही है। पूरा जिला ऐसे ही आंकड़ों पर चल रहा है। मध्यस्थता करने वालों की चांदी कट रही है। किसानों से अधिक केंद्रों पर दलालों की उपस्थित रहती है। यह केंद्र के अंदर होते हैं या केंद्रों के बाहर मंडराते रहते हैं।
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किसानों को नहीं मिल रहीं मूल सुविधाएं
बदायूं। क्रय केंद्रों पर किसानों को कोई सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। किसानों को बैठने के लिए तख्त, पीने के पानी की समुचित व्यवस्था, लोटा, बाल्टी, गिलास आदि की उपलब्धता नहीं हैं। किसानों के जानवरों को पानी के टब और छाया के लिए शामियाना भी नहीं हैं। कहीं-कहीं नाममात्र को कपड़े लटका दिए गए हैं।
एक महीना में खरीद हुई 22,137 एमटी
बदायूं। गेहूं खरीद को लगभग एक महीना होने जा रहा है विपणन शाखा ने अपने 14 केंद्रों पर 10380.4 एमटी, पीसीएफ ने अपने 47 केंद्रों पर 5709 एमटी, यूपीएसएस ने 35 केंद्रों पर 2434 एमटी, एसएफसी ने अपने 05 केंद्रों पर 83.2 एमटी, कर्मचारी कल्याण निगम ने अपने 04 केंद्रों पर 450.8 एमटी, यूपी एग्रो ने अपने 06 केंद्रों पर 2083 एमटी, भारतीय खाद्य निगम ने अपने 04 सेंटरों पर 1000 एमटी गेहूं खरीद गया है। जिले को मिले 1.33 लाख एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 115 क्रय केंद्रों पर 22137.4 एमटी गेहूं खरीदा गया है।