सेहत से खिलवाड़: केमिकल और रंगों से बनाया जा रहा था टोमेटो सॉस, एफडीए की टीम ने फैक्टरी में मारा छापा
खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने मंगलवार दोपहर उझानी के बहादुरगंज मोहल्ले में चल रही सॉस फैक्ट्री में छापा मारा। फैक्टरी में केमिकल से टोमेटो और चिली सॉस बनाया जा रहा था। टीम ने सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं।
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बदायूं के उझानी में मक्का के आटा में केमिकल्स मिलाकर नकली सॉस बनाया जा रहा था। खाद्य एवं औषधि विभाग (एफडीए) की टीम ने मंगलवार का छापा मारकर नकली सॉस बनाने वाली फैक्टरी का भंडाफोड़ किया। सहायक आयुक्त सीएल यादव के नेतृत्व में कार्रवाई शुरू होने से पहले ही फैक्टरी मालिक खिसक गया। कारीगर से जानकारी करने के बाद टीम ने चिली और टोमैटो सॉस के चार नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। टीम को मौके पर भगौनों में करीब पांच सौ लीटर सॉस समेत केमिकल भी मिला।
खाद्य एवं औषधि विभाग के सहायक आयुक्त सीएल यादव के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने चिली और टोमेटो सॉस की बहादुरगंज मोहल्ला स्थित फैक्टरी में मंगलवार दोपहर करीब दो बजे छापा मारा। गायत्री फूड्स के नाम से पिछले साल पंजीकृत फैक्टरी के बारे में सहायक आयुक्त यादव ने बताया कि चिली और टोमेटो सॉस बनाने के लिए टमाटर समेत जिन सब्जियों को इस्तेमाल होता है, उनमें से कुछ भी मौके पर नहीं मिला।
मौके पर मिला ये सामान
फैक्टरी के अंदर तीन भगौनों में करीब चार सौ लीटर टोमेटो और एक भगौना में चिली सॉस मिला। इसके विपरीत चिली और टोमेटो सॉस बनाने में मक्का का आटा, अरारोट, सोडियम, हरा और लाल रंग के अलावा सैक्रीन और एक प्रकार के लिसलिसे गोंद जैसे पदार्थ का इस्तेमाल किया जा रहा था। दोनों सॉस के चार नमूने लेकर जांच को भेजे गए हैं।
टीम ने कारीगर सहसवान निवासी जीवालाल से भी जानकारी की। कारीगर ने भी टीम के सामने दोनों तरह की सॉस में केमिकल मिलाए जाने की बात कही है। बताते हैं कि कार्रवाई शुरू होने से पहले फैक्टरी मालिक मौके पर से खिसक गया। उसके छोटे भाई ने अफसरों को पंजीकरण लेटर भी दिखाया, लेकिन वह 22 नवंबर तक वैध था।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धनंजय और खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवकांत समेत शहाबुद्दीन ने भगौनों में भरा मिला दोनों तरह के सॉस को जंगल में लेकर नष्ट कर दिया। नमूने भरे जाने के दौरान अभिलेखीय कार्रवाई भी मौके पर ही पूरी की गई। कार्रवाई को लेकर मोहल्ले में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। फैक्टरी मालिक कार्रवाई पूरी होने तक नहीं आया।