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Budaun News: आस्था का स्नान.. श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड में डुबकी लगाकर घाट पर की पूजा
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कछला घाट पर गंगा स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : BADAUN
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उझानी/कछला (बदायूं)। पौष पूर्णिमा पर कछला गंगाघाट आस्था से सराबोर रहा। कड़ाके की ठंड में हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर घाट पर पूजा-अर्चना की। आश्रमों और घाट के पास मंदिरों में भजन-कीर्तन की गूंज रही।
गंगाघाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुक्रवार तड़के से शुरू हो गया। निजी वाहनों के अलावा ट्रेन और रोडवेज बसों से घाट पर पहुंचे बदायूं, कासगंज और हाथरस आदि जिले के श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद सबसे पहले सूर्य को अर्घ्य दिया। घाट पर पूजा-अर्चना के दौरान मंत्रोच्चार किया गया। श्रद्धालुओं ने अपने ईष्टदेव समेत देवी-देवताओं की स्तुति करते हुए पूजन किया। आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गंगाघाट किनारे के आश्रमों में अनुष्ठान कराए। भजन-कीर्तन भी किया गया।
कुष्ठ आश्रमों में लोगों को भोजन कराया गया। स्नान के दौरान पूर्वाह्न तक आसमान में सूर्यदेव भी नजर नहीं आए। फिर भी आस्था के आगे कड़ाके की ठंड श्रद्धालुओं को प्रभावित नहीं कर पाई। घाट पर लगे मेला में महिलाओं ने घरेलू सामान की खरीदारी की। बच्चों ने मनोरंजन के संसाधनों का लुत्फ उठाया।
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पुरोहितों समेत प्रसाद विक्रेताओं ने अलाव जलवाए
ठंड से श्रद्धालुओें को निजात दिलाने के लिए गंगा किनारे के चारों घाटों पर प्रसाद विक्रेताओं समेत पुरोहितों ने अलाव जलवाने की व्यवस्था भी की। महिलाओं के अस्थायी चेंजरूम के पास भी अलाव लगे। कुछ दुकानदारों ने श्रद्धालुओं को सर्द हवाओं की चपेट आने से बचाने के लिए भी इंतजाम कर रखे थे। इसकी वजह से श्रद्धालुओं को कोई खास दिक्कत भी नहीं हुई।
कासगंज जिले के छोर पर रही सर्वाधिक भीड़
माघ शुरू होने से एक दिन पहले पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान का खास महत्व है। पूर्णिमा के बाद ही दान-पुण्य से सराबोर माघ का आगाज हो जाता है। कासगंज समेत उसके पड़ोसी जिलों में पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी लगाने को ज्यादा महत्व दिया जाता है। ऐसा ही कासगंज जिले के छोर वाले घाट पर नजर आया। माघ महीना में प्रत्येक दिन गंगा स्नान करने के लिए भी कछला घाट पर श्रद्धालु आते हैं। खासकर रविवार के दिन स्नान करने वालों की संख्या में इजाफा हो जाता है।
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गंगाघाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुक्रवार तड़के से शुरू हो गया। निजी वाहनों के अलावा ट्रेन और रोडवेज बसों से घाट पर पहुंचे बदायूं, कासगंज और हाथरस आदि जिले के श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद सबसे पहले सूर्य को अर्घ्य दिया। घाट पर पूजा-अर्चना के दौरान मंत्रोच्चार किया गया। श्रद्धालुओं ने अपने ईष्टदेव समेत देवी-देवताओं की स्तुति करते हुए पूजन किया। आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गंगाघाट किनारे के आश्रमों में अनुष्ठान कराए। भजन-कीर्तन भी किया गया।
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कुष्ठ आश्रमों में लोगों को भोजन कराया गया। स्नान के दौरान पूर्वाह्न तक आसमान में सूर्यदेव भी नजर नहीं आए। फिर भी आस्था के आगे कड़ाके की ठंड श्रद्धालुओं को प्रभावित नहीं कर पाई। घाट पर लगे मेला में महिलाओं ने घरेलू सामान की खरीदारी की। बच्चों ने मनोरंजन के संसाधनों का लुत्फ उठाया।
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पुरोहितों समेत प्रसाद विक्रेताओं ने अलाव जलवाए
ठंड से श्रद्धालुओें को निजात दिलाने के लिए गंगा किनारे के चारों घाटों पर प्रसाद विक्रेताओं समेत पुरोहितों ने अलाव जलवाने की व्यवस्था भी की। महिलाओं के अस्थायी चेंजरूम के पास भी अलाव लगे। कुछ दुकानदारों ने श्रद्धालुओं को सर्द हवाओं की चपेट आने से बचाने के लिए भी इंतजाम कर रखे थे। इसकी वजह से श्रद्धालुओं को कोई खास दिक्कत भी नहीं हुई।
कासगंज जिले के छोर पर रही सर्वाधिक भीड़
माघ शुरू होने से एक दिन पहले पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान का खास महत्व है। पूर्णिमा के बाद ही दान-पुण्य से सराबोर माघ का आगाज हो जाता है। कासगंज समेत उसके पड़ोसी जिलों में पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी लगाने को ज्यादा महत्व दिया जाता है। ऐसा ही कासगंज जिले के छोर वाले घाट पर नजर आया। माघ महीना में प्रत्येक दिन गंगा स्नान करने के लिए भी कछला घाट पर श्रद्धालु आते हैं। खासकर रविवार के दिन स्नान करने वालों की संख्या में इजाफा हो जाता है।