{"_id":"624deaf67eece423125189fc","slug":"education-health-badaun-news-bly4806055179","type":"story","status":"publish","title_hn":"आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाएं मिलीं, समाज कल्याण अधिकारी घिरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाएं मिलीं, समाज कल्याण अधिकारी घिरे
विज्ञापन
छात्राओं से बात करते एससी-एसटी आयोग उपाध्यक्ष मिथलेश कुमार। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दातागंज (बदायूं)। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग (एससी एसटी आयोग) के उपाध्यक्ष मिथलेश कुमार बुधवार को समरेर स्थित राजकीय आश्रम पद्धति आवासीय बालिका विद्यालय पहुंचे। उन्होंने यहां छात्राओं और विद्यालय स्टाफ से बात की। इस दौरान अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। इस दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी रामजनम सवालों में घिरे रहे।
आश्रम पद्धति आवासीय विद्यालय का संचालन समाज कल्याण विभाग करता है। विद्यालय में शनिवार को विषाक्त भोजन खाने के बाद 30 छात्राओं की हालत बिगड़ गई थी। जिनमें 28 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। एक छात्रा को मेडिकल कॉलेज भी रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान छात्राओं ने विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं की कलई खोली थी।
यहां बता दें कि विद्यालय का पर्यवेक्षण समाज कल्याण अधिकारी रामजनम बतौर प्रभारी प्रधानाचार्य देखते हैं। उस समय कार्रवाई के नाम पर लीपापोती करते हुए वार्डन संध्या कश्यप को निलंबित करने के साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजपाल की सेवा समाप्त कर दी गई थी। इसी क्रम में बुधवार को यहां उपाध्यक्ष पहुंचे और विद्यालय का निरीक्षण किया। ऐसे में कई मामलों में समाज कल्याण अधिकारी जवाब नहीं दे सके। यही नहीं एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष कार्रवाई से भी संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने स्वीकारा कि छात्राओं के नवरात्र व्रत न होते तो बड़ी घटना हो सकती थी।
विज्ञापन
उन्होंने यहां निलंबित वार्डन संध्या कश्यप, बर्खास्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजपाल और छात्राओं से भी जानकारी ली। बताया गया कि शनिवार को वार्डन अवकाश पर थीं, इसके बाद भी उन्हें निलंबित कर दिया गया। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। राजपाल ने बताया कि छात्राओं को भोजन देने से पहले उसने भोजन चखा था। एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष ने मामले में जांच एसडीएम दातागंज रामशिरोमणि को सौंप दी है। इस दौरान सीडीओ ऋषिराज, एसएसपी डॉ. ओपी सिंह, एसडीएम दातागंज रामशिरोमणि, सीओ प्रेम कुमार थापा, ब्लॉक प्रमुख के पति धीरज सक्सेना भी मौजूद रहे।
-
वार्डन अवकाश पर थीं तो किस पर था चार्ज, नहीं बता सके अधिकारी
एससी-एसटी आयोग उपाध्यक्ष ने निलंबित वार्डन संध्या कश्यप से भी बात की। संध्या कश्यप ने बताया कि हादसे में बेटे के घायल होने के कारण शनिवार को वह अवकाश पर थीं। विद्यालय में छात्राओं के बीमार होने के बारे में मालूम चला तो वह विद्यालय पहुंचीं। इसके बाद भी उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। छात्राओं की संख्या पूछने पर समाज कल्याण अधिकारी ने 370 और वार्डन ने 270 बताई। इस पर भी मिथलेश कुमार ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों पर कार्रवाई के लिए वह आयोग में रिपोर्ट देंगे।
-
अभिभावकों को न बुलाने पर नाराजगी, छात्राएं बोलीं-कड़वा था भोजन
मिथलेश कुमार ने छात्राओं से भी बात की, उन्होंने बताया कि खाना कड़वा था। छात्राएं जब विद्यालय प्रशासन की पोल खोल रहीं थीं तो स्टाफ के कुछ लोग उनको रोकते और टोकते नजर आए। उपाध्यक्ष ने पूछा कि अभिभावक विद्यालय क्यों नहीं पहुंचे, क्या उनको उनके आने की पहले से जानकारी नहीं दी गई। इसके विपरीत कई शिक्षिकाओं ने समाज कल्याण अधिकारी का बचाव भी किया। उनका कहना था कि कुछ लोग उन्हें हटाना चाहते हैं।
-
बीमार होने वालों में केवल तीन छात्राएं थीं स्कूल में
एससी एसटी आयोग के उपाध्यक्ष के सामने स्कूल प्रशासन ने बीमार छात्राओं में से किसी के अभिभावक को नहीं बुलाया तो बीमार होकर अस्पताल जाने वाली 28 छात्राओं में से केवल तीन ही स्कूल में थीं। बाकी के बारे में बताया गया कि वह अपने घर जा चुकी हैं।
विज्ञापन
आश्रम पद्धति आवासीय विद्यालय का संचालन समाज कल्याण विभाग करता है। विद्यालय में शनिवार को विषाक्त भोजन खाने के बाद 30 छात्राओं की हालत बिगड़ गई थी। जिनमें 28 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। एक छात्रा को मेडिकल कॉलेज भी रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान छात्राओं ने विद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं की कलई खोली थी।
विज्ञापन
यहां बता दें कि विद्यालय का पर्यवेक्षण समाज कल्याण अधिकारी रामजनम बतौर प्रभारी प्रधानाचार्य देखते हैं। उस समय कार्रवाई के नाम पर लीपापोती करते हुए वार्डन संध्या कश्यप को निलंबित करने के साथ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजपाल की सेवा समाप्त कर दी गई थी। इसी क्रम में बुधवार को यहां उपाध्यक्ष पहुंचे और विद्यालय का निरीक्षण किया। ऐसे में कई मामलों में समाज कल्याण अधिकारी जवाब नहीं दे सके। यही नहीं एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष कार्रवाई से भी संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने स्वीकारा कि छात्राओं के नवरात्र व्रत न होते तो बड़ी घटना हो सकती थी।
विज्ञापन
उन्होंने यहां निलंबित वार्डन संध्या कश्यप, बर्खास्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजपाल और छात्राओं से भी जानकारी ली। बताया गया कि शनिवार को वार्डन अवकाश पर थीं, इसके बाद भी उन्हें निलंबित कर दिया गया। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। राजपाल ने बताया कि छात्राओं को भोजन देने से पहले उसने भोजन चखा था। एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष ने मामले में जांच एसडीएम दातागंज रामशिरोमणि को सौंप दी है। इस दौरान सीडीओ ऋषिराज, एसएसपी डॉ. ओपी सिंह, एसडीएम दातागंज रामशिरोमणि, सीओ प्रेम कुमार थापा, ब्लॉक प्रमुख के पति धीरज सक्सेना भी मौजूद रहे।
-
वार्डन अवकाश पर थीं तो किस पर था चार्ज, नहीं बता सके अधिकारी
एससी-एसटी आयोग उपाध्यक्ष ने निलंबित वार्डन संध्या कश्यप से भी बात की। संध्या कश्यप ने बताया कि हादसे में बेटे के घायल होने के कारण शनिवार को वह अवकाश पर थीं। विद्यालय में छात्राओं के बीमार होने के बारे में मालूम चला तो वह विद्यालय पहुंचीं। इसके बाद भी उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। छात्राओं की संख्या पूछने पर समाज कल्याण अधिकारी ने 370 और वार्डन ने 270 बताई। इस पर भी मिथलेश कुमार ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों पर कार्रवाई के लिए वह आयोग में रिपोर्ट देंगे।
-
अभिभावकों को न बुलाने पर नाराजगी, छात्राएं बोलीं-कड़वा था भोजन
मिथलेश कुमार ने छात्राओं से भी बात की, उन्होंने बताया कि खाना कड़वा था। छात्राएं जब विद्यालय प्रशासन की पोल खोल रहीं थीं तो स्टाफ के कुछ लोग उनको रोकते और टोकते नजर आए। उपाध्यक्ष ने पूछा कि अभिभावक विद्यालय क्यों नहीं पहुंचे, क्या उनको उनके आने की पहले से जानकारी नहीं दी गई। इसके विपरीत कई शिक्षिकाओं ने समाज कल्याण अधिकारी का बचाव भी किया। उनका कहना था कि कुछ लोग उन्हें हटाना चाहते हैं।
-
बीमार होने वालों में केवल तीन छात्राएं थीं स्कूल में
एससी एसटी आयोग के उपाध्यक्ष के सामने स्कूल प्रशासन ने बीमार छात्राओं में से किसी के अभिभावक को नहीं बुलाया तो बीमार होकर अस्पताल जाने वाली 28 छात्राओं में से केवल तीन ही स्कूल में थीं। बाकी के बारे में बताया गया कि वह अपने घर जा चुकी हैं।