{"_id":"61a52a535a056c763005c6f5","slug":"education-badaun-news-bly467718043","type":"story","status":"publish","title_hn":"मास्टर माइंड सत्यपाल ने सहसवान के एक स्कूल में शुरू की थी शिक्षक की नौकरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मास्टर माइंड सत्यपाल ने सहसवान के एक स्कूल में शुरू की थी शिक्षक की नौकरी
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सहसवान (बदायूं)। टीईटी पेपर लीक करने वाले मास्टरमाइंड सत्यप्रकाश पटेल नौकरी के शुरुआती दिनों में आदर्श शिक्षक था। बदायूं के सहसवान इलाके के एक स्कूल में वह चार साल तैनात रहा था। वहां के ग्रामीण सत्यप्रकाश को अब तक का सबसे अच्छा शिक्षक बताते हैं। तबादला होने पर विदाई के वक्त गले लिपटकर रोने वाले ग्रामीण सत्यप्रकाश के पेपर लीक करने की कहानी सुनकर हैरान हैं।
प्रयागराज में तैनात सहायक अध्यापक सत्यप्रकाश पटेल पेपर लीक कांड में मुख्य सरगना के तौर पर गिरफ्तार हुआ है। विशिष्ट बीटीसी में चयनित होकर वर्ष 2009 में वह पहली नौकरी करने बदायूं आया था। वह सहसवान ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय महमूदा टप्पा रियोनाई में वर्ष 2009 से 2013 तक सहायक अध्यापक पद पर तैनात रहा था। सोमवार को अखबारों में सत्यप्रकाश की कहानी पढ़कर हैरानी जताई।
स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाई, पौधे लगाकर वाटिका बनाई
महमूदा टप्पा रियोनाई निवासी मुकेश ने बताया कि उनके गांव में जब सत्यप्रकाश की तैनाती हुई तो मुश्किल से 40 बच्चे थे। उनके कई बच्चे स्कूल ही नहीं जाते थे। सहसवान में रहने के बावजूद सत्यप्रकाश समय से स्कूल आते थे। उन्होंने घर से बच्चों को बुलाकर लाने की परंपरा शुरू की। वहां के प्रसादी लाल शाक्य का कहना था कि सत्यप्रकाश ने स्कूल में पौधे लगाए और खुद उनकी देखभाल करके वाटिका बनाई। रामरतन का कहना है कि सत्यपाल से गांव वालों को इतना लगाव हो गया था कि ट्रांसफर का पता लगने पर कई लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। कुछ ने तो तत्कालीन बीएसए तक नेताओं से सिफारिशें कराकर ट्रांसफर रोकने की मांग की थी। फिर ये सोचकर मन को समझाया कि शायद मास्टर साहब कभी फिर तबादला कराकर आएंगे। तबादला होने के कुछ साल बाद सत्यप्रकाश यहां के लोगों से मोबाइल के जरिए जुड़े रहे। हालांकि बाद में बातचीत का सिलसिला खत्म हो गया।
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प्रयागराज में तैनात सहायक अध्यापक सत्यप्रकाश पटेल पेपर लीक कांड में मुख्य सरगना के तौर पर गिरफ्तार हुआ है। विशिष्ट बीटीसी में चयनित होकर वर्ष 2009 में वह पहली नौकरी करने बदायूं आया था। वह सहसवान ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय महमूदा टप्पा रियोनाई में वर्ष 2009 से 2013 तक सहायक अध्यापक पद पर तैनात रहा था। सोमवार को अखबारों में सत्यप्रकाश की कहानी पढ़कर हैरानी जताई।
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स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाई, पौधे लगाकर वाटिका बनाई
महमूदा टप्पा रियोनाई निवासी मुकेश ने बताया कि उनके गांव में जब सत्यप्रकाश की तैनाती हुई तो मुश्किल से 40 बच्चे थे। उनके कई बच्चे स्कूल ही नहीं जाते थे। सहसवान में रहने के बावजूद सत्यप्रकाश समय से स्कूल आते थे। उन्होंने घर से बच्चों को बुलाकर लाने की परंपरा शुरू की। वहां के प्रसादी लाल शाक्य का कहना था कि सत्यप्रकाश ने स्कूल में पौधे लगाए और खुद उनकी देखभाल करके वाटिका बनाई। रामरतन का कहना है कि सत्यपाल से गांव वालों को इतना लगाव हो गया था कि ट्रांसफर का पता लगने पर कई लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। कुछ ने तो तत्कालीन बीएसए तक नेताओं से सिफारिशें कराकर ट्रांसफर रोकने की मांग की थी। फिर ये सोचकर मन को समझाया कि शायद मास्टर साहब कभी फिर तबादला कराकर आएंगे। तबादला होने के कुछ साल बाद सत्यप्रकाश यहां के लोगों से मोबाइल के जरिए जुड़े रहे। हालांकि बाद में बातचीत का सिलसिला खत्म हो गया।
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