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साहब..यहां तो स्कूलों में चहारदीवारी तक नहीं
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बदायूं। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बेसिक स्कूलों की दशा और दिशा को बदलने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। चाहे बात फर्नीचर की हो या फिर भोजन, यूनिफार्म, पुस्तकों, स्वेटर आदि की, लेकिन इसके बाद भी कई स्कूलों की दशा नहीं बदल पा रही है। जिले में आज भी कई परिषदीय स्कूल ऐसे हैं जहां पर चहारदीवारी तक नहीं है। ऐसे में उन स्कूलों में एक ओर जहां लावारिस मवेशी घुस आते हैं वहीं ग्रामीण खेतीबाड़ी का सामान भी यहां डाल देते हैं। इस स्थिति के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, लेकिन जिम्मेदार हैं जो सुधार के लिए किसी तरह के प्रयास नहीं कर रहे।
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर स्कूल में चहारदीवारी जरूर होनी चाहिए। इसके लिए विकास विभाग को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में चहारदीवारी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से सभी ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वह अपने क्षेत्र में आने वाली सभी सरकारी विद्यालयों की चहारदीवारी बनाएं। निर्देश मिलने के बाद में बेसिक स्कूलों की स्थिति में सुधार तो हुआ, लेकिन सिर्फ कागजों में। आज भी जिले में कई विद्यालय ऐसे हैं, जिनकी चहारदीवारी नहीं है। इसके कारण ग्रामीण अपने मवेशियाें को स्कूल की जमीन पर बांध देते हैं, साथ ही अन्य सामान भी फैला देते हैं। वहीं बच्चे भी असुरक्षित रहते हैं। वजह है कि लावारिस मवेशी भी हर वक्त यहां घूमते रहते हैं जो बच्चों पर हमला भी कर देते हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं जहां तालाब नजदीक हैं। ऐसे में बरसात के दिनों में तालाब का पानी स्कूल परिसर में भर आता है। अक्सर जहरीले कीड़े भी निकल आते हैं, जिसके चलते बच्चे नियमित स्कूल जाने से भी बचते हैं। इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को भी कई दिक्कत उठानी पड़ती हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं जो मुख्य सड़क से लगे हैं, लेकिन उनकी भी चहारदीवारी नहीं है। लिहाजा, उन स्कूल के बच्चों की देखभाल के लिए हर वक्त एक शिक्षक लगा रहता है। कई बार सड़क पर बच्चों के आने से दुर्घटना भी हो चुकी हैं।
ब्लॉक के किसी भी विद्यालय में नहीं चहारदीवारी
कादरचौक। ब्लॉक क्षेत्र में उच्च प्राथमिक विद्यालय रेवा, कादरबाड़ी, रमजानपुर, भदसिया, तातरपुर, प्राथमिक विद्यालय कटिन्ना, जलालपुर, भदरौलिया, देवी नगला, खितौलिया समेत 40 विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में सैकड़ों छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते है, लेकिन इनमें चहारदीवारी नहीं होने की वजह से पढ़ाई में उनको परेशानी आती है। जब मर्जी मवेशी विद्यालय परिसर में घुस आते हैं।
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इन विद्यालयों की भी यही दशा
कुवरगांव क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय फकीराबाद, प्राथमिक विद्यालय कुवंरगांव, दबतोरी क्षेत्र के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय ललुआ नगला, प्राथमिक विद्यालय मुसिया नगला, बिल्सी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पिंडौल में भी यही स्थिति है।
पास में तालाब, हर वक्त खतरा
ब्लॉक अंबियापुर के गांव सिरासौल सीताराम में प्राथमिक विद्यालय बना हुआ है, जो सड़क किनारे हैं, इस लिहाज से विभाग की ओर से शुरुआत में मुख्य गेट बनवाते हुए सड़क साइड (एक साइड) की बाउंड्री कर दी, जबकि तीन तरफ से इस विद्यालय में बाउंड्री नहीं हैं। खास बात ये है कि यह विद्यालय तालाब के बिल्कुल पास में बना है। तालाब साइड में कोई बाउंड्री नहीं है। ऐसे में वहां पर अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। बच्चों पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है।
ग्राम निधि की धनराशि के तहत विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण कराना है, लेकिन कुछ जगहों पर कई तकनीकी समस्याएं आ रही है। इस वजह से कुछ विद्यालयों में चहारदीवारी बनवाने में परेशानी है। समस्या का समाधान होते ही सभी विद्यालयों में चहारदीवारी बनवा दी जाएगी।
- चंद्रशेखर, डीडीओ
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शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर स्कूल में चहारदीवारी जरूर होनी चाहिए। इसके लिए विकास विभाग को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में चहारदीवारी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से सभी ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वह अपने क्षेत्र में आने वाली सभी सरकारी विद्यालयों की चहारदीवारी बनाएं। निर्देश मिलने के बाद में बेसिक स्कूलों की स्थिति में सुधार तो हुआ, लेकिन सिर्फ कागजों में। आज भी जिले में कई विद्यालय ऐसे हैं, जिनकी चहारदीवारी नहीं है। इसके कारण ग्रामीण अपने मवेशियाें को स्कूल की जमीन पर बांध देते हैं, साथ ही अन्य सामान भी फैला देते हैं। वहीं बच्चे भी असुरक्षित रहते हैं। वजह है कि लावारिस मवेशी भी हर वक्त यहां घूमते रहते हैं जो बच्चों पर हमला भी कर देते हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं जहां तालाब नजदीक हैं। ऐसे में बरसात के दिनों में तालाब का पानी स्कूल परिसर में भर आता है। अक्सर जहरीले कीड़े भी निकल आते हैं, जिसके चलते बच्चे नियमित स्कूल जाने से भी बचते हैं। इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को भी कई दिक्कत उठानी पड़ती हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं जो मुख्य सड़क से लगे हैं, लेकिन उनकी भी चहारदीवारी नहीं है। लिहाजा, उन स्कूल के बच्चों की देखभाल के लिए हर वक्त एक शिक्षक लगा रहता है। कई बार सड़क पर बच्चों के आने से दुर्घटना भी हो चुकी हैं।
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ब्लॉक के किसी भी विद्यालय में नहीं चहारदीवारी
कादरचौक। ब्लॉक क्षेत्र में उच्च प्राथमिक विद्यालय रेवा, कादरबाड़ी, रमजानपुर, भदसिया, तातरपुर, प्राथमिक विद्यालय कटिन्ना, जलालपुर, भदरौलिया, देवी नगला, खितौलिया समेत 40 विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में सैकड़ों छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते है, लेकिन इनमें चहारदीवारी नहीं होने की वजह से पढ़ाई में उनको परेशानी आती है। जब मर्जी मवेशी विद्यालय परिसर में घुस आते हैं।
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इन विद्यालयों की भी यही दशा
कुवरगांव क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय फकीराबाद, प्राथमिक विद्यालय कुवंरगांव, दबतोरी क्षेत्र के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय ललुआ नगला, प्राथमिक विद्यालय मुसिया नगला, बिल्सी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पिंडौल में भी यही स्थिति है।
पास में तालाब, हर वक्त खतरा
ब्लॉक अंबियापुर के गांव सिरासौल सीताराम में प्राथमिक विद्यालय बना हुआ है, जो सड़क किनारे हैं, इस लिहाज से विभाग की ओर से शुरुआत में मुख्य गेट बनवाते हुए सड़क साइड (एक साइड) की बाउंड्री कर दी, जबकि तीन तरफ से इस विद्यालय में बाउंड्री नहीं हैं। खास बात ये है कि यह विद्यालय तालाब के बिल्कुल पास में बना है। तालाब साइड में कोई बाउंड्री नहीं है। ऐसे में वहां पर अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। बच्चों पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है।
ग्राम निधि की धनराशि के तहत विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण कराना है, लेकिन कुछ जगहों पर कई तकनीकी समस्याएं आ रही है। इस वजह से कुछ विद्यालयों में चहारदीवारी बनवाने में परेशानी है। समस्या का समाधान होते ही सभी विद्यालयों में चहारदीवारी बनवा दी जाएगी।
- चंद्रशेखर, डीडीओ