{"_id":"61a13ef5ee6f4a17567c485b","slug":"education-amar-ujala-aprajita-badaun-news-bly467416838","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपराजिता: छात्राओं को बताए महिला सुरक्षा के कानून","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपराजिता: छात्राओं को बताए महिला सुरक्षा के कानून
विज्ञापन
अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में विधिक जानकारी देतीं पूर्व डीजीसी प्रेमवती मौर्य। संवाद
- फोटो : BADAUN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम के तहत एनएमएसएन दास पीजी कॉलेज में पूर्व डीजीसी प्रेमवती मौर्य ने छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने महिला सुरक्षा के विभिन्न कानूनों के बारे में बताया। बताया गया कि परेशानी में किस तरह कानूनी की मदद ली जा सकती हैं। स्वाभिमान या सम्मान के लिए महिलाओं को पूरी शक्ति के साथ मुकाबला करना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमवती मौर्य ने बताया कि कोई भी महिला घरेलू हिंसा कानून के तहत उसी घर में रहने का अधिकार पा सकती है, जिसमें वह रह रही है। विवाहित होने की स्थिति में उसे अपने बच्चे के पालन पोषण के लिए मुआवजा मांगने का भी अधिकार है। उन्होंने बताया कि किसी भी विवाहित महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। तलाक के बाद किसी भी महिला को गुजारा भत्ता, स्त्री धन व बच्चों की कस्टडी भी पाने का अधिकार होता है। यहां तक की भारतीय कानून के तहत लिव इन रिलेशन में महिला पार्टनर को वही दर्जा प्राप्त है जो किसी विवाहित महिला को मिलता है। उससे पैदा हुई संतान भी वैध मानी जाएगी। उत्तराधिकार अधिनियम के तहत विवाहित या अविवाहित महिला को अपने पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा पाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते शील, विनम्रता व ममत्व होने की अपेक्षा की जाती है। परिवार में सुख संपन्नता होने के लिए महिलाएं काफी हद तक अपने इन गुणों को सहेजती भी हैं पर इसका मतलब कमजोर होना नहीं है।
महिला आज पुरुष से किसी मायने में कम नहीं हैं तो अपने को कमजोर पता नहीं कैसे समझ लेती हैं। महिलाओं खासकर छात्राओं को इस झिझक से बाहर आने की जरूरत है। - स्वाति
विज्ञापन
अब जमाना बदल गया है। महिलाओं को चाहिए कि वह किसी भी मुसीबत से पहले अपने पर भरोसा करें। यदि बात ज्यादा बढ़ती है तो पुलिस व कोर्ट की शरण लें। - अंशिका, छात्रा
यदि सामने वाला हरकत करता है तो उसे उसी अंदाज में जवाब देना चाहिए। इसके लिए अपने पर भरोसा और आत्मविश्वास भी जरूरी है। - रिचा
क्षमा और सरलता महिलाओं का गुण है। उन्हें इसका ध्यान रखना चाहिए पर गलत नीयत वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत की नारी वक्त आने पर दुर्गा भी बन जाती है। -दीक्षा
विज्ञापन
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमवती मौर्य ने बताया कि कोई भी महिला घरेलू हिंसा कानून के तहत उसी घर में रहने का अधिकार पा सकती है, जिसमें वह रह रही है। विवाहित होने की स्थिति में उसे अपने बच्चे के पालन पोषण के लिए मुआवजा मांगने का भी अधिकार है। उन्होंने बताया कि किसी भी विवाहित महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। तलाक के बाद किसी भी महिला को गुजारा भत्ता, स्त्री धन व बच्चों की कस्टडी भी पाने का अधिकार होता है। यहां तक की भारतीय कानून के तहत लिव इन रिलेशन में महिला पार्टनर को वही दर्जा प्राप्त है जो किसी विवाहित महिला को मिलता है। उससे पैदा हुई संतान भी वैध मानी जाएगी। उत्तराधिकार अधिनियम के तहत विवाहित या अविवाहित महिला को अपने पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा पाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते शील, विनम्रता व ममत्व होने की अपेक्षा की जाती है। परिवार में सुख संपन्नता होने के लिए महिलाएं काफी हद तक अपने इन गुणों को सहेजती भी हैं पर इसका मतलब कमजोर होना नहीं है।
विज्ञापन
महिला आज पुरुष से किसी मायने में कम नहीं हैं तो अपने को कमजोर पता नहीं कैसे समझ लेती हैं। महिलाओं खासकर छात्राओं को इस झिझक से बाहर आने की जरूरत है। - स्वाति
विज्ञापन
अब जमाना बदल गया है। महिलाओं को चाहिए कि वह किसी भी मुसीबत से पहले अपने पर भरोसा करें। यदि बात ज्यादा बढ़ती है तो पुलिस व कोर्ट की शरण लें। - अंशिका, छात्रा
यदि सामने वाला हरकत करता है तो उसे उसी अंदाज में जवाब देना चाहिए। इसके लिए अपने पर भरोसा और आत्मविश्वास भी जरूरी है। - रिचा
क्षमा और सरलता महिलाओं का गुण है। उन्हें इसका ध्यान रखना चाहिए पर गलत नीयत वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत की नारी वक्त आने पर दुर्गा भी बन जाती है। -दीक्षा