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Budaun News: अनदेखी के कारण बारिश के बावजूद सूखी पड़ी हैं जिले की नदियां

Fri, 18 Jul 2025 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jul 2025 12:48 AM IST
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Due to negligence, the rivers of the district are dry despite the rain
दबतोरी क्षेत्र में अरिल नदी के नीचे उगी घास।संवाद
बदायूंं। अनदेखी के कारण जिले की महावा, सोत, अरिल, भैंसोर आदि नदियां जहां अपना अस्तित्व खो रहीं हैं, वहीं असवार नदी का नाम तक लोग भूल गए हैं। इस पर बना पुल ही इसकी पहचान बनकर रह गया हैं। कई जगह तो नदियां मैदान के रूप में दिखाई देती हैं। करीब तीन दशक पहले तक यह नदियां जिले को हरा-भरा बनाए हुईं थीं। हजारों एकड़ में सिंचाई इनके ही पानी से होती थी। इनकी दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं है। हालात यह है कि बारिश के दिनों में भी नदियां सूखी हैं।
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सहसवान। यहां पौराणिक महावा नदी सूख चुकी हैं। कई वर्षों से बरसात में भी महावा अपने पहले वाले रूप में दिखाई नहीं देती। जब गंगा नदी में बाढ़ आती है तो कुछ पानी जरूर इस नदी में आ जाता है। इस बार तो ऐसा भी नहीं हुआ है। नदी सूख जाने के कारण हजारों एकड़ जमीन पर लोगों ने कब्जा कर खेती कर ली है।
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दबतोरी। संभल से निकलकर दातागंज के नवादा मधुकर तक अविरल बहने वाली अरिल नदी में भी पानी नहीं है। घास-फूंस उग आई है। नदी पूरी तरह उपेक्षित है।

दातागंज। अरिल और रामगंगा का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर है। दोनों नदियों के किनारों पर अतिक्रमण कर खेती हो रही है। चौड़ाई काफी कम हो गई है। अरिल नदी क्षेत्र में लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय करते हए रमपुरा गांव के पास रामगंगा नदी में मिल जाती है। इसी तरह रामगंगा नदी क्षेत्र के गांव रुकुमपुर से शुरू होकर लगभग 70 किलोमीटर की दूरी तय करती हुई तहसील क्षेत्र के आखिरी गांव भाऊ नगला तक बहती है। बाढ़ के हालात बनने पर दोनों नदियां मिलकर विकराल स्वरूप धारण कर लेती हैं। फिलहाल बारिश के बावजूद यहां जलस्तर काफी कम है।
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बिल्सी। नगर के समीप से बहने वाली असवार नदी का तो लोग नाम तक भूल गए हैं। केवल मुजरिया रोड पर पुल आभास करा देता है कि यहां कभी नदी थी। इसी तरह भैंसोर नदी का भी बुरा हाल है। काफी हिस्से में मकान और व्यावसायिक केंद्र का निर्माण हो चुका है।
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सन 2010 में हुई बारिश में उफनाईं थीं नदियां
करीब 15 साल पहले जिले की नदियों में खासा पानी बहता था। धीरे-धीरे इन नदियों का पानी कम होने लगा और आज नदियां सूख चुकी हैं। मौसम विभाग के रिकाॅर्ड के अनुसार सन 2010 में ही इतनी बारिश हुई थी कि नदियां उफना गईं थी। बाद में फिर इनका बुरा हाल हो गया।

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ग्लोबल वार्मिंग के कारण विपरीत प्रभाव पड़ा हैं। पहले कई-कई दिन लगातार बारिश होती थी। अब ऐसा कम होता है। कम बारिश होना भी नदियों के सूखने का बड़ा कारण है।
-उमेश चंद्रा, एक्सईएन, बाढ़ खंड, बदायूं

दबतोरी क्षेत्र में अरिल नदी के नीचे उगी घास।संवाद

दबतोरी क्षेत्र में अरिल नदी के नीचे उगी घास।संवाद

दबतोरी क्षेत्र में अरिल नदी के नीचे उगी घास।संवाद

दबतोरी क्षेत्र में अरिल नदी के नीचे उगी घास।संवाद

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