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Budaun News: काम नहीं आ रहे डीपीएमसी, दुग्ध उत्पादकों को नहीं मिल रहा लाभ

Mon, 26 Jun 2023 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jun 2023 12:48 AM IST
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DPMC is not working, milk producers are not getting benefits
एक साल में भी शुरू नहीं हो पाया ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम, किसानों को दिक्कत
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। पराग ने गांवों में सोसायटी खोलीं। गांवों का डाटा ऑनलाइन रहे, इसके लिए डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन (डीपीएमसी) स्थापित किए गए, बावजूद इसके काम अब भी ऑफलाइन हो रहा है। ऐसे में तुरंत खाते में भुगतान नहीं आ पाने के कारण किसानों को दिक्कत हो रही है।
जिले में पराग का अवशीतन केंद्र ब्लॉक सालारपुर में स्थित है। सन 2015 में इस चिलिंग प्लांट को बंद कर दिया गया, जिसके बाद पशुपालकों से गांव में दूध लिया जाने लगा और उसकी सप्लाई बरेली की जाने लगी। जब दुग्ध वाहन आता था, तभी उसकी जांच हो पाती थी। इससे पशुपालकों को काफी इंतजार करना पड़ता था। ऐसे में पशुपालकों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए गांवों में डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन (डीपीएमसी) स्थापित किया गया।
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उम्मीद थी कि इससे पशुपालकों को काफी राहत मिल जाएगी, क्योंकि मौके पर पशुपालकों के दूध की जांच हो जाएगी और पेमेंट कुछ ही देर में डीबीटी के माध्यम से पशुपालकों के खातों में हो जाता। डीपीएमसी को आए हुए करीब एक साल से ज्यादा हो गया, लेकिन अब तक ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम लागू नहीं हुआ है। इससे पशुपालकों को कोई खास राहत नहीं मिली।
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डीपीएमसी में यह होते हैं उपकरण
डेटा प्रोसेसिंग मिल्क कलेक्शन करीब 1.30 लाख में लगाया जाता है। इसके एक यूनिट में एक कंप्यूटर, एक प्रिंटर, फैट मशीन, कांटा, जीपीएस और अन्य उपकरण शामिल होते हैं। इसको सोलर पैनल से जोड़ा जाता है, ताकि बिजली न होने की दशा में भी यह लगातार काम करता रहे।
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डीपीएमसी का यह है फायदा
- डीपीएमसी के माध्यम से दुग्ध उत्पादन समिति को जोड़ा गया है। इसके माध्यम से पशुपालकों को तुंरत ही दूध में फैट आदि के बारे में जानकारी मिल जाती है। इसके आधार पर उनके दूध के रेट तय होते हैं। इसकी पशुपालकों को तुरंत पर्ची दी जाती है। दूध देने के लिए कुछ ही देर में पशुपालकों के खातों में धनराशि भी डीबीटी के माध्यम से स्थानांतरित की जाती है।

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जिले में धीमर, हरनाथपुर, सहवरखेड़ा, रिहालिया समेत 87 गांवों में डीपीएमसी को लगाया गया है। इसके माध्यम से गांव में पशुपालकों से दूध लिया जा रहा है। उनको तुरंत ही दूध में फैट के बारे में जानकारी दी जाती है, हालांकि शासन स्तर से अभी डीबीटी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। उम्मीद है जल्द ही वह भी शुरू हो जाएगी। इसके बाद में दूूध की खरीदारी के कुछ देर बाद ही धनराशि खाते में पहुंच जाया करेगी।
-डीपी सिंह, जिला प्रभारी, प्रादेशिक कॉरपोरेट डेयरी फाउंडेशन
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