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Budaun News: 11 बजे तक अस्पतालों में नहीं पहुंचे डॉक्टर, मरीजों ने किया इंतजार
Mon, 15 Jul 2024 05:39 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 15 Jul 2024 05:39 AM IST
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नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल में लगा ताला। संवाद
बदायूं। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले मरीजों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। रविवार को 11 बजे तक पांच अस्पतालों में डॉक्टर नहीं पहुंचे। इस वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रत्येक रविवार को जिले के 43 नवीन स्वास्थ्य केंद्रों पर आरोग्य मेले का आयोजन होता है। मेला सुबह 10 से शाम 4 बजे तक लगाया जाना है। लेकिन, तय समय में कई स्थानों पर डाॅक्टरों के न पहुंचने से मरीजों को दिक्कत हो रही है। नवीन स्वास्थ्य केंद्र भदरौल के परिसर में गंदगी के अंबार हैं।
भूड़ा भदरौल में 11 बजे तक नहीं पहुंचे डॉक्टर
कादरचौक। समय 11.30 बजे भूड़ा भदरौल अस्पताल परिसर में पहुंचकर देखा तो ताले लगे थे। कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बंद अस्पताल का फोटो किया तो एक व्यक्ति दौड़ता आया और उसने ताला खोला। पूछने पर उसने अपना नाम जुगेंद्र बताया, कहा कि वार्डबॉय हूं। डॉक्टर की डयूटी है, लेकिन वह नहीं आईं हैं। फार्मासिस्ट संजीव पचौरी भी नहीं हैं। जब कोई नहीं आया तो ताला नहीं खोला। मैं तो दस बजे से ही आकर उन लोगों का इंतजार कर रहा हूं। यहां कभी-कभी ही डॉक्टर और फार्मासिस्ट आते हैं।
अस्पताल परिसर में तालाब से संक्रमण का डर
-नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल परिसर में तालाब है, जिसमें पानी से भरा हुआ है। पिछले साल गांव में डेंगू फैला तो कई लोगों की जान पर बन आई। जहां लोग इलाज कराने की उम्मीद रखते हैं वही अस्पताल बीमार है। ग्रामीणों ने बताया कि संक्रमण का डर सता रहा है। डॉक्टर कभी आते नहीं हैं। उझानी या फिर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
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कीचड़ भरे रास्ते से अस्पताल तक का सफर
- जब कभी डॉक्टर अस्पताल में आ जाएं तब भूड़ा भदरौल में बीमार व्यक्ति को लाना पड़े तो कीचड़ भरे रास्ते को पार करना पड़ता है। तीन दिन पहले बारिश का पानी कमर-कमर तक भर गया था। इस पानी में तीन साल की छवि डूबने लगी। जैसे-तैसे गांव के लोगों ने उसको बचाया। पूरे परिसर में गंदगी फैली मिली।
10 बजे तक डॉक्टर नहीं, बच्चे को दवा दिलाने को बैठा तीमारदार
उसहैत। समय 10.00 बजे पड़ताल की गई तो अस्पताल खुला मिला लेकिन डॉक्टर और कर्मचारी मौके पर नहीं थे। एक तीमारदार अपने बच्चे को दवा दिलाने के लिए डॉक्टर कक्ष में बैठा इंतजार कर रहा था। डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी थी। दवा वितरण कक्ष में ताला लटका मिला।
11.30 बजे तक डॉक्टर नहीं, चक्कर आया तो गेट पर ही बैठ गया मरीज
उघैती। समय 11.30 बजे पड़ताल में पाया कि अस्पताल गेट बंद है। साइकिल से एक मरीज दवा लेने आया। काफी समय तक डॉक्टर का इंतजार करता रहा। अचानक उसे चक्कर आया तो गेट पर ही बैठ गया। यहां डॉक्टर नियमित तौर पर अस्पताल नहीं आते हैं। रंगाई-पुताई भी नहीं कराई गई है।
नाधा और रसूलपुर पर डॉक्टर और कर्मचारी मिले नदारद
जरीफनगर। पड़ताल के समय 11 बजे कोई डॉक्टर और कर्मचारी नहीं थे। गेट खुले थे। सफाई कर्मचारी ने सफाई की। अस्पताल अंधेरे में पाए गए। बिजली व्यवस्था नहीं है। पीने का पानी नहीं है। आरोग्य मेला में एक भी मरीज नहीं पहुंचा।
आरोग्य मेले में अगर कोई डॉक्टर या कर्मचारी समय से नहीं पहुंचा या अस्पताल बंद रहा है तो बहुत ही कष्ट का विषय का है। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी। जांच कराता हूं कि कौन ड्यूटी से नदारद रहे हैं, कहां अस्पताल नहीं खुला है। सवाल रंगाई-पुताई का है तो एमओआईसी की जिम्मेदारी है कि वह नवीन स्वास्थ्य केंद्रों पर हर साल कराएं। अगर कहीं नहीं कराई है तो जांच कराएंगे। - डॉ. अब्दुल सलाम, प्रभारी सीएमओ
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भूड़ा भदरौल में 11 बजे तक नहीं पहुंचे डॉक्टर
कादरचौक। समय 11.30 बजे भूड़ा भदरौल अस्पताल परिसर में पहुंचकर देखा तो ताले लगे थे। कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बंद अस्पताल का फोटो किया तो एक व्यक्ति दौड़ता आया और उसने ताला खोला। पूछने पर उसने अपना नाम जुगेंद्र बताया, कहा कि वार्डबॉय हूं। डॉक्टर की डयूटी है, लेकिन वह नहीं आईं हैं। फार्मासिस्ट संजीव पचौरी भी नहीं हैं। जब कोई नहीं आया तो ताला नहीं खोला। मैं तो दस बजे से ही आकर उन लोगों का इंतजार कर रहा हूं। यहां कभी-कभी ही डॉक्टर और फार्मासिस्ट आते हैं।
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अस्पताल परिसर में तालाब से संक्रमण का डर
-नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल परिसर में तालाब है, जिसमें पानी से भरा हुआ है। पिछले साल गांव में डेंगू फैला तो कई लोगों की जान पर बन आई। जहां लोग इलाज कराने की उम्मीद रखते हैं वही अस्पताल बीमार है। ग्रामीणों ने बताया कि संक्रमण का डर सता रहा है। डॉक्टर कभी आते नहीं हैं। उझानी या फिर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
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कीचड़ भरे रास्ते से अस्पताल तक का सफर
- जब कभी डॉक्टर अस्पताल में आ जाएं तब भूड़ा भदरौल में बीमार व्यक्ति को लाना पड़े तो कीचड़ भरे रास्ते को पार करना पड़ता है। तीन दिन पहले बारिश का पानी कमर-कमर तक भर गया था। इस पानी में तीन साल की छवि डूबने लगी। जैसे-तैसे गांव के लोगों ने उसको बचाया। पूरे परिसर में गंदगी फैली मिली।
10 बजे तक डॉक्टर नहीं, बच्चे को दवा दिलाने को बैठा तीमारदार
उसहैत। समय 10.00 बजे पड़ताल की गई तो अस्पताल खुला मिला लेकिन डॉक्टर और कर्मचारी मौके पर नहीं थे। एक तीमारदार अपने बच्चे को दवा दिलाने के लिए डॉक्टर कक्ष में बैठा इंतजार कर रहा था। डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी थी। दवा वितरण कक्ष में ताला लटका मिला।
11.30 बजे तक डॉक्टर नहीं, चक्कर आया तो गेट पर ही बैठ गया मरीज
उघैती। समय 11.30 बजे पड़ताल में पाया कि अस्पताल गेट बंद है। साइकिल से एक मरीज दवा लेने आया। काफी समय तक डॉक्टर का इंतजार करता रहा। अचानक उसे चक्कर आया तो गेट पर ही बैठ गया। यहां डॉक्टर नियमित तौर पर अस्पताल नहीं आते हैं। रंगाई-पुताई भी नहीं कराई गई है।
नाधा और रसूलपुर पर डॉक्टर और कर्मचारी मिले नदारद
जरीफनगर। पड़ताल के समय 11 बजे कोई डॉक्टर और कर्मचारी नहीं थे। गेट खुले थे। सफाई कर्मचारी ने सफाई की। अस्पताल अंधेरे में पाए गए। बिजली व्यवस्था नहीं है। पीने का पानी नहीं है। आरोग्य मेला में एक भी मरीज नहीं पहुंचा।
आरोग्य मेले में अगर कोई डॉक्टर या कर्मचारी समय से नहीं पहुंचा या अस्पताल बंद रहा है तो बहुत ही कष्ट का विषय का है। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी। जांच कराता हूं कि कौन ड्यूटी से नदारद रहे हैं, कहां अस्पताल नहीं खुला है। सवाल रंगाई-पुताई का है तो एमओआईसी की जिम्मेदारी है कि वह नवीन स्वास्थ्य केंद्रों पर हर साल कराएं। अगर कहीं नहीं कराई है तो जांच कराएंगे। - डॉ. अब्दुल सलाम, प्रभारी सीएमओ

नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल में लगा ताला। संवाद

नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल में लगा ताला। संवाद

नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल में लगा ताला। संवाद

नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल में लगा ताला। संवाद

नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल में लगा ताला। संवाद

नवीन स्वास्थ्य केंद्र भूड़ा भदरौल में लगा ताला। संवाद