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रोगों की रोकथाम को नहीं किया खर्चा, सीएमओ को नोटिस

Thu, 03 Nov 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो/बदायूं
ब्यूरो/बदायूं Updated Thu, 03 Nov 2016 11:05 PM IST
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did not spent money, cmo noticed
एचएएस अधिकारियों को तीसरी बार नोटिस जरी किए गए हैं।
संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार से मिले धन का सदुपयोग न कर पाने के मामले में वर्ष 2014 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल फंस सकते हैं। जांच में धन का उचित उपयोग न किए जाने की बात सामने आई है। इसके लिए राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के नियम तीन के उल्लंघन का आरोपी मानते हुए शासन ने डॉ अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। डॉ. अग्रवाल इन दिनों मुरादाबाद में संयुक्त निदेशक चिकित्सा के पद पर तैनात हैं।
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केंद्र सरकार ने बदायूं को वर्ष 2014 में 5,45,962 रुपये की धनराशि पानी की वजह से फैलने वाले संक्रामक रोगों के रोकथाम के लिए दी थी। लेकिन कुल धनराशि में से सिर्फ 1,48,283 रुपये खर्च किए गए। जो केवल 27.16 प्रतिशत होता है। शेष 72.84 प्रतिशत यानि 3,97,679 रुपये कहां खर्च हुए? इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। पानी की वजह से फैलने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम पर केंद्र से मिली पूरी धनराशि को खर्च नहीं किया गया। इसका खामियाजा बदायूं को भुगतना पड़ा। वर्ष 2015 में जिले में संक्रामक रोगों ने करीब 180 लोगों की जान गई। सबसे ज्यादा स्थिति खराब जगत ब्लाक के गांव उपरैला में हुई थी। यहां 100 से ज्यादा लोगों की संक्रामक रोगों से मौत हुई थी।
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जिले में संक्रामक रोगों से मौत पर शासन तक हिल गया था। शासन की पांच सदस्यों की टीम ने उपरैला समेत गई गांवों का दौरा किया था। चालू साल में भी जिले में संक्रामक रोगों ने कहर बरपाया। अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई हैं। जगत और कादरचौक ब्लाक में सबसे ज्यादा मौत हुई हैं। शासन ने माना है कि अगर केंद्र सरकार से मिली धनराशि का सही उपयोग हुआ होता, तो बदायूं में संक्रामक रोगों से इतने लोगों की जान नहीं जाती। चिकित्सा अनुभाग-दो के सचिव आलोक कुमार ने डॉ. एसपी अग्रवाल को राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के नियम तीन के उल्लंघन का आरोपी मानते हुए नोटिस जारी किया है। उनको सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम 10 (2) के तहत 15 दिन में जवाब देने का आदेश दिया गया है।
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बदायूं में विवादों से घिरे रहे थे डॉ. अग्रवाल
बदायूं। तत्कालीन सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल बदायूं में तैनाती के दौरान विवादों से घिरे रहे थे। बदायूं में जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी के रूप में करीब 10 साल सेवाएं देने के बाद वह बदायूं में ही सीएमओ की कुर्सी पर काबिज होने में कामयाब हो गए थे। उनकी तैनाती के दौरान स्वास्थ्य विभाग में कई घोटाले सामने आए थे। इसके बाद शासन ने उनको यहां से हटा दिया था। डॉ. अग्रवाल के बतौर सीएमओ कार्यकाल में हुईं अनियमितताएं अब तक उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद शासन ने कराई जांच
बदायूं। सूबे में संक्रामक बीमारियों से हो रहीं मौत को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। प्रदेश सरकार से इन मौत की वजह पर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने सूबे के संक्रामक रोगों से ग्रस्त जिलों में पड़ताल कराई। इस दौरान पता लगा कि बदायूं उन जिलों में शामिल है, जहां संक्रामक रोगों से निपटने के लिए दी गई रकम का सदुपयोग ही नहीं किया गया। इस संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा भी दिया गया है।


शासन ने तत्कालीन सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल को दायित्वों और कर्तव्यों के उल्लंघन का आरोपी माना है। उनकी तैनाती के दौरान बजट खर्च करने में अनियमितता सामने आई है। डॉ. अग्रवाल को नोटिस जारी किया गया है। यह बात मेरी जानकारी में है।
-डॉ. सुबोध शर्मा, एडी हेल्थ
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