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धर्मशाला के बाहर की जमीन बेचकर मंदिर का रास्ता किया बंद, अब होगी कार्रवाई
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बदायूं। शहर के मोहल्ला लोचीनगला स्थित रायसाहब की धर्मशाला को अंदर ही अंदर बेचे जाने का मामला अब खुलकर सामने आने लगा है। यहां एक व्यक्ति ने धर्मशाला को खुद की बताते हुए उसकी जमीन को बेच डाला, जिससे बाद पुरानी चुंगी से लेकर शहवाजपुर तक सड़क किनारे लोगों ने जमीन खरीदकर दुकानें और ऊंची बिल्डिंग आदि बना लीं। पालिका और प्रशासन की नजरें पड़ने पर अब न केवल इन लोगों ने बैनामे मांगे गए हैं बल्कि सभी के नाम पते भी नोट करते हुए उन्हें शुक्रवार को नोटिस रिसीव कराए जाएगें। इनके बैनामों की भी चेकिंग की जाएगी, ताकि पता चल सके कि इन्हें यह जमीन बेचने वाला कौन है।
शहर के लोचीनगला मोहल्ले में राय साहब की धर्मशाला स्थित है। यह कितनी पुरानी है, इसका आसपास के लोगों को भी नहीं पता। कुछ लोग इसे अंग्रेजों के जमाने की बताते हैं। धर्मशाला पर लगे शिलालेख भी उर्दू भाषा में हैं। कुछ समय पहले इस धर्मशाला को अपनी बताते हुए टिकटगंज निवासी एक व्यक्ति ने लोगों को बेचना शुरू कर दिया था। कागजों में हेरफेर करते हुए पुरानी चुंगी से शहवाजपुर तक की बेशकीमती जमीन बेच दी गई, जिस पर लोगों ने दुकानें और बहुमंजिला भवन तक बना लिए। बताते हैं कि बैनामे करने वाले व्यक्ति की मौत होने के बाद उसकी संतानों ने शेष बची जमीन के बैनामे कर दिए। इसी धर्मशाला के अंदर एक मंदिर भी था, जिसकी चहारदीवारी बनाते हुए इसका रास्ता भी बंद कर दिया गया। पिछले दिनों नगर पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल और सिटी मजिस्ट्रेट ने इसका मुआयना किया तो उनके सामने भी फर्जी तरीके से बैनामा किए जाने की बात सामने आई, जिस पर उन्होंने तीन दिन के अंदर सभी से उनके बैनामे प्रस्तुत करने को कहा था। अब पालिका ने सबके नाम पते भी नोट कर लिए हैं, जिन्हें नोटिस भेजे जाने की तैयारी है। इधर पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल ने बताया कि वर्ष 2000 में तत्काली एडीएम ने इस जमीन के बैनामों को निरस्त कर दिया था। अब इन लोगों के पास कौन से बैनामे हैं, इसे दिखवाया जा रहा है।
बदायूं। धर्मशाला में स्थित मंदिर वर्षों पुराना है। कुछ लोग तो इसे धर्मशाला के समय का ही मानते हैं। कई बुजुर्ग भी इस मंदिर को अपने सामने होने का कहते हैं। इस मंदिर पर लोग पूजा करने जाते थे साथ ही एकादशी को मंदिर की भव्य सजावट की जाती थी, लेकिन अब इसके रास्ते चारों तरफ से बंद कर दिए गए हैं। सड़क पर एक गेट भी लगा दिया गया है, जिससे लोगों में आक्रोश है।
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नोटिस के माध्यम से कब्जाधारकों से कहा गया है कि जिनसे उन्होंने जमीन खरीदी है, उसके यदि उन पर वैध कागज हैं तो वे हमारे यहां उपस्थित होकर उसे प्रस्तुत करें। धर्मशाला के बारे में पता चला है कि उसका मालिक अब नहीं है। ऐसे में जिस संपत्ति का मालिक नहीं रहता तो वह राज्य सरकार में निहित हो जाती है। फाइल मैंने निकाल ली है, जिसमें पता चला है कि उसके मालिक अब नहीं हैं। धर्मशाला सार्वजनिक है, उसे किसी को इसी तरह यूज नहीं किया जाना चाहिए था। नोटिस शुक्रवार को इन लोगों को रिसीव हो जाएंगे।
अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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शहर के लोचीनगला मोहल्ले में राय साहब की धर्मशाला स्थित है। यह कितनी पुरानी है, इसका आसपास के लोगों को भी नहीं पता। कुछ लोग इसे अंग्रेजों के जमाने की बताते हैं। धर्मशाला पर लगे शिलालेख भी उर्दू भाषा में हैं। कुछ समय पहले इस धर्मशाला को अपनी बताते हुए टिकटगंज निवासी एक व्यक्ति ने लोगों को बेचना शुरू कर दिया था। कागजों में हेरफेर करते हुए पुरानी चुंगी से शहवाजपुर तक की बेशकीमती जमीन बेच दी गई, जिस पर लोगों ने दुकानें और बहुमंजिला भवन तक बना लिए। बताते हैं कि बैनामे करने वाले व्यक्ति की मौत होने के बाद उसकी संतानों ने शेष बची जमीन के बैनामे कर दिए। इसी धर्मशाला के अंदर एक मंदिर भी था, जिसकी चहारदीवारी बनाते हुए इसका रास्ता भी बंद कर दिया गया। पिछले दिनों नगर पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल और सिटी मजिस्ट्रेट ने इसका मुआयना किया तो उनके सामने भी फर्जी तरीके से बैनामा किए जाने की बात सामने आई, जिस पर उन्होंने तीन दिन के अंदर सभी से उनके बैनामे प्रस्तुत करने को कहा था। अब पालिका ने सबके नाम पते भी नोट कर लिए हैं, जिन्हें नोटिस भेजे जाने की तैयारी है। इधर पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल ने बताया कि वर्ष 2000 में तत्काली एडीएम ने इस जमीन के बैनामों को निरस्त कर दिया था। अब इन लोगों के पास कौन से बैनामे हैं, इसे दिखवाया जा रहा है।
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बदायूं। धर्मशाला में स्थित मंदिर वर्षों पुराना है। कुछ लोग तो इसे धर्मशाला के समय का ही मानते हैं। कई बुजुर्ग भी इस मंदिर को अपने सामने होने का कहते हैं। इस मंदिर पर लोग पूजा करने जाते थे साथ ही एकादशी को मंदिर की भव्य सजावट की जाती थी, लेकिन अब इसके रास्ते चारों तरफ से बंद कर दिए गए हैं। सड़क पर एक गेट भी लगा दिया गया है, जिससे लोगों में आक्रोश है।
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नोटिस के माध्यम से कब्जाधारकों से कहा गया है कि जिनसे उन्होंने जमीन खरीदी है, उसके यदि उन पर वैध कागज हैं तो वे हमारे यहां उपस्थित होकर उसे प्रस्तुत करें। धर्मशाला के बारे में पता चला है कि उसका मालिक अब नहीं है। ऐसे में जिस संपत्ति का मालिक नहीं रहता तो वह राज्य सरकार में निहित हो जाती है। फाइल मैंने निकाल ली है, जिसमें पता चला है कि उसके मालिक अब नहीं हैं। धर्मशाला सार्वजनिक है, उसे किसी को इसी तरह यूज नहीं किया जाना चाहिए था। नोटिस शुक्रवार को इन लोगों को रिसीव हो जाएंगे।
अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट