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मकर संक्रांति पर आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालु करेंगे दान-पुण्य

Thu, 13 Jan 2022 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jan 2022 01:21 AM IST
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Devotees will do charity by taking a dip of faith on Makar Sankranti
कछला गंगाघाट (फाइल फोटो) - फोटो : BADAUN
उझानी/कछला/बदायूं। मकर संक्रांति पर कछला गंगाघाट दान-पुण्य का साक्षी बनेगा। आस्था की डुबकी लगाकर संत और पुरोहितों को दक्षिणा देना और खिचड़ी भोजन कराना खास अहमियत रखता है। अगर आस्था की डुबकी लगाकर दान दिया जाए तो पुण्य भी कई गुना अधिक अर्जित होता है। कोरोना काल में हालांकि बंदिशें भी सामने आ सकती हैं लेकिन गंगा स्नान के मद्दनेजर घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने को लेकर नगर पंचायत प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है।
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मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। अभी शुक्ल पक्ष है और एक दिन पहले एकादशी है। संक्रांति 14 जनवरी शुक्रवार दोपहर दो बजकर 28 मिनट पर लगेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार- मकर संक्रांति पर घरों और मंदिरों के अलावा गंगाघाट पर दान-पुण्य किया जाता रहा है। गंगाघाट पर शुक्रवार को श्रद्धालुओं की खासी भीड़ जुटने की संभावना के तहत नगर पंचायत प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं की गई हैं। गंगा में जलस्तर कम जरूर है लेकिन श्रद्धालुओं को गहराई वाले स्थानों पर पहुंचने से रोकने के लिए प्राइवेट गोताखोर निजी नावों पर मुस्तैद रहेंगे।
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पुरोहितों और संतों ने भी पूजन कराने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसा भी कहा जा रहा है कि अगले दिन शनिवार 15 जनवरी को भी ब्रह्म मुहूर्त में मकर संक्रांति का पूजन कर संतों और पुरोहितों समेत ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा भेंट की जा सकती है।
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पंडित जी कहिन...कल ही करें स्नान और दान पुण्य, मिलेगा विशेष फल
मकर संक्रांति पंद्रह जनवरी को होने की भी चर्चा है पर बदायूं निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित रविकांत उपाध्याय का कहना है कि एकादशी के कारण नौ घंटे पहले ही मकर संक्रांति प्रभावी हो जाएगी। इसलिए मकर संक्रांति पर्व शुक्रवार सुबह से ही मनाना सही रहेगा। उपाध्याय कहते हैं कि सनातन मान्यताओं के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, उनके घर में सूर्य के प्रवेश मात्र से शनि का प्रभाव क्षीण हो जाता है। सूर्य के प्रकाश के सामने कोई नकारात्मकता नहीं टिक सकती है। मकर संक्रांति पर सूर्य की साधना और इनसे संबंधित दान करने से शनि जनित सभी दोष दूर हो जाते हैं। पद्म पुराण के मुताबिक सूर्य के उत्तरायण होने के दिन यानी मकर संक्रांति के दिन दान पुण्य का बहुत महत्व होता है।
मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से दस हजार गो दान का फल प्राप्त होता है। ऊनी कपड़े, कंबल, तिल और गुड़ से बने व्यंजन व खिचड़ी दान करने से भगवान सूर्य एवं शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। वैसे तो सूर्य के उत्तरायण होने वाले माह में किसी भी तीर्थ, नदी एवं समुद्र में स्नान कर दान पुण्य करके कष्टों से मुक्ति पाई जा सकती है। प्रयागराज संगम में स्नान का फल मोक्ष देने वाला होता है।
यह बोले पुरोहित, संत और दुकानदार
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करने के बाद दान करने का पुण्य बहुत ही फलदायक होता है। गंगा स्नान के बाद पहले सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाए फिर उनकी स्तुति करते हुए पूजन करें। दक्षिणा भेंट करने का नंबर बाद में आता है।
- बाबा जगदीश
शुक्रवार को मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं के अनुरूप विशेष इंतजाम किए गए है। आश्रमों में कोई भी श्रद्धालु यज्ञ आदि कराके पुण्य अर्जित कर सकता है। इसके लिए उसे पहले गंगा में आस्था की डुबकी लगानी होगी। पूजन एकाग्रता से किया जाए।
- रघुवर दास
कछला घाट पर विशेष स्नान पर्व और त्योहारों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुरोहितों के जरिये विधि-विधान से पूजन कराया जाता है। पुरोहित किसी से भी कोई उम्मीद नहीं करते। मकर संक्रांति का दिन ही पुण्य अर्जित करने को है।

- सीताराम, पुरोहित
मकर संक्रांति का हिंदू समाज में विशेष महत्व है। गंगाघाट पर इस दिन आस्था की डुबकी लगाने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को बचाव रखते हुए घाट पर पूजन करना चाहिए।
- राजपाल सिंह, समाजसेवी
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