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मृतकों के आश्रितों कोसीएम कोष से मदद की संस्तुति
Dataganj
Updated Tue, 07 Apr 2015 07:50 PM IST
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फसल के नुकसान से सदमे में आए युवा किसानों द्वारा आत्महत्या करने पर उनके परिवार वालों को मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने की प्रशासन ने संस्तुति कर दी है। कर्ज में डूबी हुई जमीन भी परिवार वालों को वापस दिलाई जाएगी।
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बता दें कि गढ़ा गांव के सूरजपाल (28) ने एक अप्रैल को गांव के नजदीक बबूल के पेड़ पर अपने ही तहमद का फंदा गले में डालकर फांसी लगा ली थी। इस पर भूमि विकास बैंक का 84,140 रुपये और स्थानीय सूदखोरों का करीब दो लाख रुपये का कर्जा था। सूदखोरों को दस प्रतिशत का ब्याज भी अदा करना पड़ रहा था। मात्र छह बीघा जमीन थी, वो भी साहूकार के पास गिरवीं रखी थी। दूसरा मामला उसहैत क्षेत्र के काकोरी गांव का है। यहां चार अप्रैल को किसान मुनेंद्र गिरि (24) ने पाकड़ के पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस पर स्थानीय सूदखोरों के अलावा एसबीआई का दो लाख 37 हजार रुपये का कर्ज था। आत्महत्या करने वाले दोनों ही काश्तकारों ने गेहूं की फसल उठने पर कर्जा चुकता करने का सूदखोरों से वादा किया था, लेकिन तेज हवा और अतिवृष्टि से फसल बेकार हो गई। इसीलिए दोनों ने आत्मघाती कदम उठाया।
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एसडीएम ओपी तिवारी ने बताया कि दोनों परिवारों की वार्षिक आय 18 हजार रुपये से कम है, इसीलिए मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता लेने के अधिकारी हैं। प्रशासन 5400-5400 रुपये की मदद कर चुका है। दोनों परिवारों की जमीन बंधक है, उसे मुक्त कराकर परिजनों को दी जाएगी।
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...टीम अब किसका करेगी सर्वे
दातागंज। बेमौसम बरसात से किसानों की फसलों की हुई बर्बादी का जायजा लेने को बुद्धवार को टीम क्षेत्र में पहुंचकर सर्वे करेगी। बता दें कि ज्यादातर किसानों ने बची-कुची फसल को काट लिया। सवाल उठ रहा है कि अब टीम किस का सर्वे करेगी? क्षेत्र के अधिकांश किसानों की खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बरसात से पहले ही बर्बाद नष्ट हो गई थी। लगातार मौसम की बेरुखी के चलते किसानों ने हवा और बरसात में नीचे गिरकर नष्ट हुई फसल को काट लिया। अब सवाल उठ रहा है कि बुधवार को सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता की अगुवाई में आ रही टीम यहां क्या करेगी, जब खेतों में कुछ नहीं मिलेगा।
खतौनी में नहीं है नाम...कैसे मिलेगा लाभ
दातागंज। तहसील क्षेत्र के गांव रुदेली भुड़ेली निवासी किसान राजेंद्रपाल, नन्हेंलाल, अंबासहाय, लटूरी, छोटे, रामस्वरूप, बेचे लाल, हरीराम और सेवाराम जमीन इंतखाम में दर्ज है किंतु खतौनी में इनका नाम नहीं है। इन किसानों का आरोप है कि राजस्व कर्मी की लापरवाही के कारण उनका नाम खतौनी में दर्ज नहीं है। उन्होंने इस बारे में एसडीएम से शिकायत की है। कहा कि खतौनी में नाम नहीं होने के कारण बरसात से हुई फसल नष्ट होने का मुआवजा उन्हें नहीं मिलेगा। एसडीएम ने जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।