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ड्राइवर साहब, जरा धीरे चलो.. हाईवे छोड़िए, यहां तो पुलियों के पास भी गड्ढों की भरमार
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उझानी (बदायूं)। बरेली-मथुरा हाईवे पर फिलहाल सुहाने सफर के दिन नजर नहीं आते। हाईवे पर बरेली या फिर कासगंज की तरफ से कछला के आसपास पहुंचो तो सड़क को छोड़िए, पुलियों के पास भी गड्ढों की भरमार बनी हुई है। ऐसे में अगर तेज रफ्तार वाहन बिना ब्रेक लगाए गड्ढों से दौड़ाया तो हादसे के दौरान गहरी खंदियों में पलट जाने का डर बना रहता है। हिचकोले लगने से परेशान सवारियां भी यही कहने को मजबूर हो जाती हैं कि ड्राइवर साहब, जरा धीरे ही चलिए।
मथुरा से बरेली तक हाईवे को फोरलेन किए जाने का कार्य काफी हद तक पुरा हो चुका है। बदायूं से बरेली तक फोरलेन कई साल पहले ही अस्तित्व में आ गया था। कासगंज जिले में सोरों के आसपास भी सड़क अच्छी नजर आती है लेकिन कछला और उझानी के बीच के हालात गड्ढामुक्त हाईवे के विपरीत हैं। हाईवे पर वितरोई मोड़ पुलिया को ही देख लीजिए। पुलिया के दोनों ओर सड़क उखड़ के साथ गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बीच-बीच में दिक्कतें और भी हैं, फिर सबसे अहम करूआ पुल के दोनों छोर के गड्ढों पर अफसरों की नजर भी पड़ती। बताते हैं कि पास में निर्माणाधीन दूसरे पुल की वजह से सफर में ड्राइवर भी चकरा जाते हैं। पुराने पुल की ओर से सफर को कोई संकेत भी नहीं है। हाईवे से होकर मथुरा, आगरा, कासगंज, अलीगढ़, राजस्थान तो दूसरी तरफ बरेली, पीलीभीत और नैनीताल आने-जाने को रोजाना ही हजारों की संख्या में छोटे और भारी वाहनों की आवाजाही भी रहती है। ऐसा भी नहीं कि हाईवे पर हादसे कम हुए हों। पिछले साल निर्माणाधीन करूआ पुल के पास कार सवार तीन लोगों को जान से हाथ धोना पड़ गया था। पुलियों के पास पैबंद नहीं लगे तो आने वाले दिनों में गड्ढे किसी बड़े हादसे की वजह भी बन सकते हैं।
रफ्तार नहीं पकड़ पाया करूआ पुल का निर्माण का काम
उझानी। बरेली-मथुरा हाईवे पर अंग्रेजों के जमाने में बने करूआ पुल के बराबर नया पुल करीब आठ साल पहले अस्तित्व में आ गया था। पुराने पुल के स्थान पर योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल में काम शुरू हो गया। उस वक्त दूसरा पुल बना देने के पीछे पीडब्ल्यूडी की मंशा हाईवे को फोरलेन से जुड़ने की रही थी। करीब पांच साल से चल रहे निर्माण कार्य के बाद भी दूसरा पुल बनकर तैयार नहीं हो पाया है। पुल के ढांचे पर पहले सड़क फिर उसकी एप्रोच रोड भी अभी बननी बाकी है। इलाके के लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में शिथिलता विभागीय अफसरों समेत ठेकेदार की भूमिका पर सवाल खड़े कर रही है।
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-पुलियों या सड़क पर जहां पर भी गड्ढे हैं, उनको चिह्नित करके गड्ढा मुक्त किया जाएगा ताकि लोगों को आने जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
-अमर सिंह, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग
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मथुरा से बरेली तक हाईवे को फोरलेन किए जाने का कार्य काफी हद तक पुरा हो चुका है। बदायूं से बरेली तक फोरलेन कई साल पहले ही अस्तित्व में आ गया था। कासगंज जिले में सोरों के आसपास भी सड़क अच्छी नजर आती है लेकिन कछला और उझानी के बीच के हालात गड्ढामुक्त हाईवे के विपरीत हैं। हाईवे पर वितरोई मोड़ पुलिया को ही देख लीजिए। पुलिया के दोनों ओर सड़क उखड़ के साथ गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बीच-बीच में दिक्कतें और भी हैं, फिर सबसे अहम करूआ पुल के दोनों छोर के गड्ढों पर अफसरों की नजर भी पड़ती। बताते हैं कि पास में निर्माणाधीन दूसरे पुल की वजह से सफर में ड्राइवर भी चकरा जाते हैं। पुराने पुल की ओर से सफर को कोई संकेत भी नहीं है। हाईवे से होकर मथुरा, आगरा, कासगंज, अलीगढ़, राजस्थान तो दूसरी तरफ बरेली, पीलीभीत और नैनीताल आने-जाने को रोजाना ही हजारों की संख्या में छोटे और भारी वाहनों की आवाजाही भी रहती है। ऐसा भी नहीं कि हाईवे पर हादसे कम हुए हों। पिछले साल निर्माणाधीन करूआ पुल के पास कार सवार तीन लोगों को जान से हाथ धोना पड़ गया था। पुलियों के पास पैबंद नहीं लगे तो आने वाले दिनों में गड्ढे किसी बड़े हादसे की वजह भी बन सकते हैं।
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रफ्तार नहीं पकड़ पाया करूआ पुल का निर्माण का काम
उझानी। बरेली-मथुरा हाईवे पर अंग्रेजों के जमाने में बने करूआ पुल के बराबर नया पुल करीब आठ साल पहले अस्तित्व में आ गया था। पुराने पुल के स्थान पर योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल में काम शुरू हो गया। उस वक्त दूसरा पुल बना देने के पीछे पीडब्ल्यूडी की मंशा हाईवे को फोरलेन से जुड़ने की रही थी। करीब पांच साल से चल रहे निर्माण कार्य के बाद भी दूसरा पुल बनकर तैयार नहीं हो पाया है। पुल के ढांचे पर पहले सड़क फिर उसकी एप्रोच रोड भी अभी बननी बाकी है। इलाके के लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में शिथिलता विभागीय अफसरों समेत ठेकेदार की भूमिका पर सवाल खड़े कर रही है।
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-पुलियों या सड़क पर जहां पर भी गड्ढे हैं, उनको चिह्नित करके गड्ढा मुक्त किया जाएगा ताकि लोगों को आने जाने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
-अमर सिंह, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग