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महिलाओं ने बताई नवरात्र की महिमा, किया डांडिया
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शहर के एक लॉन में आयोजित नवरात्र स्पेशल कार्यक्रम में शामिल महिलाएं। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। शहर में नवरात्र पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में महिलाओं ने एक लॉन में कार्यक्रम आयोजित कर डांडिया नृत्य किया। उन्होंने नवरात्र की महिमा बताई तो दीपोत्सव व करवाचौथ कार्यक्रमों की तैयारियों का भी चर्चा की।
नवरात्र उल्लास का प्रतीक है। ऐसे में भक्तिमय माहौल में सकारात्मक ऊर्जा बहुत बढ़ जाती है। इसी के चलते डॉ. दीप्ति जोशी गुप्ता एवं शिल्पी बंसल ने शहर के एक लॉन में डांडिया स्पेशल नवरात्र किटी का आयोजन किया। यहां विभिन्न खेल हुए तो नवरात्र स्पेशल तंबोला भी हुआ। बाद में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में डांडिया नृत्य किया। इनमें सोनरूपा विशाल, पूजा गुप्ता, गुंजन गुप्ता, सोनल रस्तोगी, टिम्सी गुप्ता, कोपल रायजादा, राधा वैश्य, श्वेता वैश्य, सलोनी वैश्य, पारुल गुप्ता, चारु शंखधार, तुषारिका रस्तोगी की विशेष रूप से सहभागिता रही।
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क्या बोलीं महिलाएं
नवरात्र में हम नव दुर्गा की उपासना करते हैं। नवरात्र यूं तो पवित्र रात्रि का प्रतीक है, ऐसी रात्रि जो पाप रूपी अंधेरे का नाश करके जीवन में नई रोशनी का संचार करती है। दुर्गा जी शक्ति स्वरूपा हैं।
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- डॉ. दीप्ति जोशी गुप्ता, लेखिका
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नवरात्र मानसिक-शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं। इन सबके मूल में है मनुष्य का प्रकृति से तालमेल, सही मायने में यही जीवन को नई सार्थकता प्रदान करता है। मौजूदा परिवेश में चारों तरफ वैचारिक प्रदूषण है। ऐसी स्थिति में नवरात्र का महत्व और भी बढ़ जाता है। इससे मन की शुद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
- डॉ. सोनरूपा विशाल, कवयित्री
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नवरात्र व्रत का मूल उद्देश्य है इंद्रियों का संयम और आध्यात्मिक शक्ति का संचय। व्रत में हम कई चीजों से परहेज करते हैं और कई वस्तुओं को अपनाते हैं। आयुर्वेद की धारणा है कि पाचन क्रिया की खराबी से ही शारीरिक रोग होते हैं। हमारी संस्कृति में देवी को ऊर्जा का केंद्र माना गया है। अपने भीतर की ऊर्जा जगाना ही देवी उपासना का मुख्य प्रयोजन है।
- शिल्पी बंसल, निदेशक
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नवरात्र मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने और उत्सव मनाने का पर्व है। जैसे कोई शिशु अपनी मां के गर्भ में नौ महीने रहता हे, वैसे ही हम अपने आप में प्रकृति में रहकर मां का ध्यान कर मग्न होते हैं। नौ दिन बाद नई ऊर्जा के साथ बाहर निकलते है तो सृजनात्मकता का पुट स्वत: ही जीवन में आने लगता है।
- डॉ. पारुल गुप्ता, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ
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नवरात्र की नौ रातें मां दुर्गा के नौ स्वरूप को पूजने के लिए जानी जाती हैं। यह नौ दिन तन और मन के शुद्धिकरण के दिन हैं। नौ दिनों का अनुशासन, हल्का सात्विक भोजन, घर से आती हवन की खुशबू शरीर व मन में अलग ही सकारात्मकता लाते हैं।
- श्रुति शंखधार, पूर्व शिक्षिका
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नवरात्र यानि कि मां को समर्पित नौ दिन। सभी को महिलाओं को शक्ति स्वरूपा मानकर सम्मान देना चाहिए। संसार मातृशक्ति से ही संचालित है। नारी शक्ति के सम्मान से ही देश फिर विश्वगुरु बनेगा।
- सलोनी वैश्य, संचालिका, साड़ी प्रतिष्ठान
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महिलाओं ने किया कीर्तन, माता के भजनों की बही बयार
बदायूं। चौधरी सराय मोहल्ले स्थित मंदिर पर नवरात्र में रोजाना ही शाम को भव्य आयोजन हो रहे हैं। दो दिन पहले यहां महिलाओं ने डांडिया नृत्य किया था। बुधवार को यहां कीर्तन मंडली ने माता के भजन गाए।
श्री दुर्गा पूजा महोत्सव कमेटी की ओर से मंदिर पर माता की प्रतिमा की स्थापना की गई है। इसमें महिला मंडल की सदस्यों ने भजन कीर्तन किया। शाम से देर रात तक भजन और कीर्तन की बयार बही। कार्यक्रम आयोजकों में नरेश मौर्य, विजय साहू, राजेंद्र साहू, नकुल साहू, आशू मौर्य, नन्हे मौर्य व गुरपाल कश्यप आदि का सहयोग रहा। संवाद
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नवरात्र उल्लास का प्रतीक है। ऐसे में भक्तिमय माहौल में सकारात्मक ऊर्जा बहुत बढ़ जाती है। इसी के चलते डॉ. दीप्ति जोशी गुप्ता एवं शिल्पी बंसल ने शहर के एक लॉन में डांडिया स्पेशल नवरात्र किटी का आयोजन किया। यहां विभिन्न खेल हुए तो नवरात्र स्पेशल तंबोला भी हुआ। बाद में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में डांडिया नृत्य किया। इनमें सोनरूपा विशाल, पूजा गुप्ता, गुंजन गुप्ता, सोनल रस्तोगी, टिम्सी गुप्ता, कोपल रायजादा, राधा वैश्य, श्वेता वैश्य, सलोनी वैश्य, पारुल गुप्ता, चारु शंखधार, तुषारिका रस्तोगी की विशेष रूप से सहभागिता रही।
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क्या बोलीं महिलाएं
नवरात्र में हम नव दुर्गा की उपासना करते हैं। नवरात्र यूं तो पवित्र रात्रि का प्रतीक है, ऐसी रात्रि जो पाप रूपी अंधेरे का नाश करके जीवन में नई रोशनी का संचार करती है। दुर्गा जी शक्ति स्वरूपा हैं।
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- डॉ. दीप्ति जोशी गुप्ता, लेखिका
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नवरात्र मानसिक-शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हैं। इन सबके मूल में है मनुष्य का प्रकृति से तालमेल, सही मायने में यही जीवन को नई सार्थकता प्रदान करता है। मौजूदा परिवेश में चारों तरफ वैचारिक प्रदूषण है। ऐसी स्थिति में नवरात्र का महत्व और भी बढ़ जाता है। इससे मन की शुद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
- डॉ. सोनरूपा विशाल, कवयित्री
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नवरात्र व्रत का मूल उद्देश्य है इंद्रियों का संयम और आध्यात्मिक शक्ति का संचय। व्रत में हम कई चीजों से परहेज करते हैं और कई वस्तुओं को अपनाते हैं। आयुर्वेद की धारणा है कि पाचन क्रिया की खराबी से ही शारीरिक रोग होते हैं। हमारी संस्कृति में देवी को ऊर्जा का केंद्र माना गया है। अपने भीतर की ऊर्जा जगाना ही देवी उपासना का मुख्य प्रयोजन है।
- शिल्पी बंसल, निदेशक
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नवरात्र मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने और उत्सव मनाने का पर्व है। जैसे कोई शिशु अपनी मां के गर्भ में नौ महीने रहता हे, वैसे ही हम अपने आप में प्रकृति में रहकर मां का ध्यान कर मग्न होते हैं। नौ दिन बाद नई ऊर्जा के साथ बाहर निकलते है तो सृजनात्मकता का पुट स्वत: ही जीवन में आने लगता है।
- डॉ. पारुल गुप्ता, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ
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नवरात्र की नौ रातें मां दुर्गा के नौ स्वरूप को पूजने के लिए जानी जाती हैं। यह नौ दिन तन और मन के शुद्धिकरण के दिन हैं। नौ दिनों का अनुशासन, हल्का सात्विक भोजन, घर से आती हवन की खुशबू शरीर व मन में अलग ही सकारात्मकता लाते हैं।
- श्रुति शंखधार, पूर्व शिक्षिका
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नवरात्र यानि कि मां को समर्पित नौ दिन। सभी को महिलाओं को शक्ति स्वरूपा मानकर सम्मान देना चाहिए। संसार मातृशक्ति से ही संचालित है। नारी शक्ति के सम्मान से ही देश फिर विश्वगुरु बनेगा।
- सलोनी वैश्य, संचालिका, साड़ी प्रतिष्ठान
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महिलाओं ने किया कीर्तन, माता के भजनों की बही बयार
बदायूं। चौधरी सराय मोहल्ले स्थित मंदिर पर नवरात्र में रोजाना ही शाम को भव्य आयोजन हो रहे हैं। दो दिन पहले यहां महिलाओं ने डांडिया नृत्य किया था। बुधवार को यहां कीर्तन मंडली ने माता के भजन गाए।
श्री दुर्गा पूजा महोत्सव कमेटी की ओर से मंदिर पर माता की प्रतिमा की स्थापना की गई है। इसमें महिला मंडल की सदस्यों ने भजन कीर्तन किया। शाम से देर रात तक भजन और कीर्तन की बयार बही। कार्यक्रम आयोजकों में नरेश मौर्य, विजय साहू, राजेंद्र साहू, नकुल साहू, आशू मौर्य, नन्हे मौर्य व गुरपाल कश्यप आदि का सहयोग रहा। संवाद