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चार जिलों की सीमा पर दबतोरी, पूरी नहीं हुई ब्लॉक और थाने की दरकार
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दबतोरी। बिसौली तहसील का बड़ी आबादी वाला गांव दबतोरी उपेक्षित है। दबतोरी के आसपास करीब 10 गांव बड़ी आबादी के हैं। संग्रामपुर, दबतोरा, लक्ष्मीपुर, ललुआ नगला ऐसे गांव हैं जहां 20 हजार तक की आबादी है। गौर करने वाली बात यह है कि यह गांव चार जिलों की सीमा से लगते हैं। मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और संभल पड़ोस के जिले हैं। लबे समय से यहां ब्लॉक और थाने की मांग हो रही है, लेकिन अब तक यह दरकार पूरी नहीं हो सकी है।
बिसौली तहसील से दबतोरी की दूूरी करीब 14 किलोमीटर है। दबतोरी समेत आस-पास के गांव आसफपुर ब्लॉक के तहत आते हैं। दबतोरी से आसफपुर की दूरी भी करीब 13 किलोमीटर है। बिसौली तहसील के इसी क्षेत्र से उत्तर रेलवे की बरेली-चंदौसी रेल लाइन भी गुजरती है। इस रेल रूट पर करेंगी, दबतोरी, पुरवाखेड़ा, आसफपुर और सिसरका रेलवे स्टेशन भी हैं। इलाके में अरिल नदी की कटरी अपराधों के लिए काफी कुख्यात रही है। लंबे समय से यहां थाने की मांग हो रही थी। साल 2016 में विधानसभा चुनाव से एन पहले सपा सरकार के दौरान दबतोरी को ब्लॉक का दर्जा दिया था। उस समय लोगों की उम्मीदें भी जगीं। दबतोरी में ब्लॉक स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के बाद काम भी चालू हुए, लेकिन 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद ब्लॉक की स्थापना ठंडे बस्ते में चली गई।
दबतोरी समेत आसपास के बड़ी आबादी वाले गांवों के लोगों को छोटे-मोटे कामों के लिए बिसौली और आसफपुर की दौड़ लगानी हो रही है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि थाना और ब्लॉक की मांग अगर पूरी होती है तो यहां भी विकास का पहिया घूमने लगेगा।
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दबतोरी बड़ी आबादी का गांव है। आसपास के गांव भी बड़ी आबादी के हैं। यहां थाना, ब्लॉक और नगर पंचायत के मानक भी पूरे होते हैं, लेकिन क्षेत्र में विकास का पहिया नहीं घूम पा रहा। - इशरत खान, पूर्व प्रधान लक्ष्मीपुर
आसफपुर ब्लॉक से होकर रेल लाइन गुजरती है। यहां पांच रेलवे स्टेशन भी हैं, लेकिन विकास के नाम पर इन बड़ी आबादी के गांवों में कुछ नहीं है। ब्लॉक का दर्जा तो मिला पर ब्लॉक नहीं बना। - नरेंद्र कुमार मिश्रा, दबतोरी
दबतोरी क्षेत्र से चार जिलों की सीमा लगती है। अरिल नदी की कटरी भी है। लंबे समय से यहां थाने की मांग हो रही है, लेकिन आज तक दबतोरी चौकी को रिपोर्टिंग चौकी का दर्जा तक नहीं मिला। - नीरेश सिंह, ललुआ नगला
दबतोरी क्षेत्र समेत आस-पास के गांव विकास के मामले में काफी पिछड़े हुए हैं। दबतोरी को ब्लॉक बनाने के साथ यहां थाना भी बनाया जाना चाहिए। इससे इलाके का विकास तेज होगा। - रेहाना, लक्ष्मीपुर
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बिसौली तहसील से दबतोरी की दूूरी करीब 14 किलोमीटर है। दबतोरी समेत आस-पास के गांव आसफपुर ब्लॉक के तहत आते हैं। दबतोरी से आसफपुर की दूरी भी करीब 13 किलोमीटर है। बिसौली तहसील के इसी क्षेत्र से उत्तर रेलवे की बरेली-चंदौसी रेल लाइन भी गुजरती है। इस रेल रूट पर करेंगी, दबतोरी, पुरवाखेड़ा, आसफपुर और सिसरका रेलवे स्टेशन भी हैं। इलाके में अरिल नदी की कटरी अपराधों के लिए काफी कुख्यात रही है। लंबे समय से यहां थाने की मांग हो रही थी। साल 2016 में विधानसभा चुनाव से एन पहले सपा सरकार के दौरान दबतोरी को ब्लॉक का दर्जा दिया था। उस समय लोगों की उम्मीदें भी जगीं। दबतोरी में ब्लॉक स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के बाद काम भी चालू हुए, लेकिन 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद ब्लॉक की स्थापना ठंडे बस्ते में चली गई।
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दबतोरी समेत आसपास के बड़ी आबादी वाले गांवों के लोगों को छोटे-मोटे कामों के लिए बिसौली और आसफपुर की दौड़ लगानी हो रही है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि थाना और ब्लॉक की मांग अगर पूरी होती है तो यहां भी विकास का पहिया घूमने लगेगा।
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दबतोरी बड़ी आबादी का गांव है। आसपास के गांव भी बड़ी आबादी के हैं। यहां थाना, ब्लॉक और नगर पंचायत के मानक भी पूरे होते हैं, लेकिन क्षेत्र में विकास का पहिया नहीं घूम पा रहा। - इशरत खान, पूर्व प्रधान लक्ष्मीपुर
आसफपुर ब्लॉक से होकर रेल लाइन गुजरती है। यहां पांच रेलवे स्टेशन भी हैं, लेकिन विकास के नाम पर इन बड़ी आबादी के गांवों में कुछ नहीं है। ब्लॉक का दर्जा तो मिला पर ब्लॉक नहीं बना। - नरेंद्र कुमार मिश्रा, दबतोरी
दबतोरी क्षेत्र से चार जिलों की सीमा लगती है। अरिल नदी की कटरी भी है। लंबे समय से यहां थाने की मांग हो रही है, लेकिन आज तक दबतोरी चौकी को रिपोर्टिंग चौकी का दर्जा तक नहीं मिला। - नीरेश सिंह, ललुआ नगला
दबतोरी क्षेत्र समेत आस-पास के गांव विकास के मामले में काफी पिछड़े हुए हैं। दबतोरी को ब्लॉक बनाने के साथ यहां थाना भी बनाया जाना चाहिए। इससे इलाके का विकास तेज होगा। - रेहाना, लक्ष्मीपुर