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Independence Day 2022: गरम दल के क्रांतिकारी चौधरी बदन सिंह ने खूब छकाया था अंग्रेजों को, आठ बार गए थे जेल
Thu, 11 Aug 2022 01:12 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 01:12 AM IST
सार
पांच फरवरी 1893 को चौधरी बदन सिंह का जन्म सहसवान क्षेत्र के जरीफनगर दुर्गपुर के किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही स्वतंत्रता संग्राम के बारे में सुना। युवा अवस्था में आते-आते वह जिले के अग्रणी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में शामिल हो गए। वर्ष 1925 में अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा का उन्हें अध्यक्ष चुना गया। नौजवानों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने की मुहिम के दौरान ही वह अंग्रेजी हुकूमत की आंखों की किरकिरी बनने लगे।
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चौधरी बदनसिंह
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
गरम दल से ताल्लुक रखने वाले चौधरी बदन सिंह ने बदायूं में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को खूब छकाया था। बाद-बार उन्होंने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी। स्वतंत्रता आंदोलन चरम पर था तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी बदन सिंह ने साथियों के साथ मिलकर कछला और उझानी के बीच स्थित बितरोई रेलवे स्टेशन को आग लगा दी थी। स्वतंत्रता आंदोलन के बाद उनको आठ बार जेल भेजा गया, लेकिन वह विचलित नहीं हुए। स्वतंत्रता के बाद वह जिले के सांसद भी चुने गए।
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पांच फरवरी 1893 को चौधरी बदन सिंह का जन्म सहसवान क्षेत्र के जरीफनगर दुर्गपुर के किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही स्वतंत्रता संग्राम के बारे में सुना। युवा अवस्था में आते-आते वह जिले के अग्रणी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में शामिल हो गए। वर्ष 1925 में अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा का उन्हें अध्यक्ष चुना गया। नौजवानों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने की मुहिम के दौरान ही वह अंग्रेजी हुकूमत की आंखों की किरकिरी बनने लगे। स्वतंत्रता आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की वजह से अंग्रेजी हुकूमत ने उनको आठ बार जेल भेजा। जेल में उनको यातनाएं दी गईं, लेकिन वह न हिम्मत हारे और न ही अंग्रेजी हुकूमत के जुल्म से विचलित हुए। हर बार उनकी हिम्मत और स्वतंत्रता प्राप्ति की ललक बढ़ती रही। साल 1941 में चौधरी बदन सिंह की अगुवाई में क्रांतिकारियों ने बितरोई रेलवे स्टेशन में आग लगाकर अंग्रेजों की नींद उड़ा दी।
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रुहेलखंड के वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर गिरिराज नंदन की लिखी पुस्तकों ‘बदायूं दर्शन’ और ‘रुहेलखंड संस्कृति एवं इतिहास’, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू रघुवीर सहाय की पुस्तक ‘बदायूं जिले के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास’ में भी इन घटनाओं का जिक्र किया गया है।
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स्वतंत्रता के बाद फांसी की सजा उम्रकैद में बदली गई
स्वतंत्रता आंदोलनों में लगातार सक्रिय भूमिका निभाकर अंग्रेजी हुकूमत के सामने चुनौती पेश करने वाले चौधरी बदन सिंह को 1942 में फिर गिरफ्तार कर लिया गया। घबराई अंग्रेजी हुकूमत ने उस पर मुकदमा चलाया और फांसी की सजा सुनाई। स्वतंत्रता के बाद उनकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला गया। गुलामी के दिनों में उनको जेल में यातनाएं दी गई। भारत स्वतंत्र हुआ तो वह सजा काटने के बाद जेल से बाहर आए। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए। वह दो बार यानि 1962 तक सांसद रहे। बाद में उनकी बेटी शांति देवी यादव विधान परिषद सदस्य, दो बार सहसवान से विधायक और फिर संभल लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहीं।
जरीफनगर में इनके नाम से बना है पार्क
वर्ष 2015 में तत्कालीन सांसद व सहसवान क्षेत्र के विधायक ओमकार सिंह ने जरीफनगर थाने के सामने चौधरी बदन सिंह की याद में एक पार्क का निर्माण कराया था। यहां उनकी प्रतिमा भी लगवाई गई और काफी धन इसमें खर्च किया गया, लेकिन देखरेेख के अभाव में धीरे-धीरे यह पार्क भी बदहाल स्थिति में पहुंच गया।