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इनसे सीखिए, खामोशी से भर रहीं गरीब छात्राओं की फीस
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पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं को सेनेटरी पैड मशीन देतीं संस्था की पदाधिकारी। फाइल फ?
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। शहर के संभ्रांत परिवारों की महिलाओं की संस्था ‘पंख’ खामोशी से समाजसेवा व बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। फिलहाल प्रदेश में आठवीं तक बालिका शिक्षा मुफ्त है। ऐसे में ये महिलाएं पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज की कक्षा नवीं से 12वीं तक की करीब 20 छात्राओं की फीस अपने पास से जमा करती हैं।
संस्था की संस्थापक सोनरूपा विशाल चर्चित कवयित्री हैं जो राष्ट्रीय गीतकार रहे स्व. उर्मिलेश शंखधार की बेटी हैं। उनकी संस्था से शहर, उझानी समेत कई नगरों की करीब तीस महिलाएं जुड़ी हैं। संभ्रांत व समृद्ध परिवारों की इन महिलाओं में कुछ नौकरी व व्यवसाय भी करती हैं। यूं तो संस्था काफी पुरानी है और अलग-अलग तरह के सामाजिक कार्य करती रहती है। करीब सात साल पहले इन महिलाओं ने शहर के आर्य समाज चौक स्थित पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया।
शासन से सहायता प्राप्त इस विद्यालय में मुख्य तौर पर शहर के निम्न व मध्यमवर्गीय परिवारों की बेटियां पढ़ती हैं। शासन ने कक्षा आठ तक लड़कियों की पढ़ाई मुफ्त कर रखी है। इसके अलावा नवीं से कक्षा बारह तक की लड़कियों को निर्धारित फीस जमा करनी पड़ती है। यहां कई ऐसे परिवारों की बेटियां हैं जो इस फीस को जमा करने में असमर्थ हैं। संस्था ने स्कूल से ऐसी लड़कियों का ब्योरा लिया जिनकी फीस नियमित जमा नहीं हो रही थी या फिर नाम कटने की नौबत थी। उसके बाद परिवारों से मिलकर सही स्थिति पता की और फिर वास्तविक पात्र लड़कियां चुन लीं जो पढ़ना चाहती थीं पर फीस जमा करना मुश्किल हो रहा था। संस्था तभी से ऐसी बेटियों की फीस जमा करती आ रही है। फिलहाल करीब बीस लड़कियों की फीस जमा की जा रही है। कोरोना काल में इसकी छूट मिल गई थी।
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बेटियों को सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन भी दी
हम पहले अलग-अलग विद्यालयों व क्षेत्रों में इस तरह के काम करते थे। संस्था सदस्यों से बातचीत के बाद एक ही विद्यालय को गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया। हम लोग अपनी बचत व परिवार की आय के कुछ धन को बालिका शिक्षा के लिए खर्च करते हैं। ये विद्यालय प्रबंधन के बताए मुताबिक छमाही या मासिक तौर पर दे दिया जाता है। इसके अलावा विद्यालय की बेटियों को संस्था ने सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन भी निशुल्क प्रदान की है। कई अन्य तरह की जरूरतें भी पूरी करने में मदद करते हैं।
- सोनरूपा विशाल, संस्थापक पंख
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सरकार को करनी चाहिए इंटर तक फीस माफ
लगभग सभी सरकारें बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने की बात तो करती हैं पर इसके लिए सार्थक पहल नहीं करतीं। यदि कोई लड़की इंटर तक शिक्षा ग्रहण कर ले तो इच्छा होने पर आगे की शिक्षा वह ट्यूशन पढ़ाकर भी पूरी कर सकती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि बेटियों की मुफ्त शिक्षा का दायरा बढ़ाया जाए। उन्हें अभी जो आठवीं तक पढ़ाई मुफ्त कराई जा रही है इसे इंटर तक कराया जाए। हम सभी सदस्य बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में लगे हैं पर सीमित तौर पर ही मदद कर सकते हैं।
- पूजा शलभ गुप्ता, कोषाध्यक्ष
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सहयोग से बेहतर हो रहा माहौल
सरकार की ओर से दी गई सहूलियतों से बेटियों को बेहतर शिक्षा देने का काम कर रहे हैं पर पंख संस्था कई साल से हमारे विद्यालय को सौगात दे रही है जो अनूठा प्रयास है। गरीब बेटियों की फीस का मामला हो या सेनेटरी पैड जैसी सहूलियत, यह मदद किसी मायने में कम नहीं है। समाज के सक्षम लोगों के इस तरह के प्रयास दूसरों के लिए भी प्रेरक हो सकते हैं। मैं उम्मीद करती हूं कि पढ़ी लिखी बेटियां भी इसी तरह की सकारात्मक सोच लेकर राष्ट्र निर्माण में सहयोग देंगी।
- मधु शर्मा, प्रधानाचार्य पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज
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संस्था की संस्थापक सोनरूपा विशाल चर्चित कवयित्री हैं जो राष्ट्रीय गीतकार रहे स्व. उर्मिलेश शंखधार की बेटी हैं। उनकी संस्था से शहर, उझानी समेत कई नगरों की करीब तीस महिलाएं जुड़ी हैं। संभ्रांत व समृद्ध परिवारों की इन महिलाओं में कुछ नौकरी व व्यवसाय भी करती हैं। यूं तो संस्था काफी पुरानी है और अलग-अलग तरह के सामाजिक कार्य करती रहती है। करीब सात साल पहले इन महिलाओं ने शहर के आर्य समाज चौक स्थित पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया।
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शासन से सहायता प्राप्त इस विद्यालय में मुख्य तौर पर शहर के निम्न व मध्यमवर्गीय परिवारों की बेटियां पढ़ती हैं। शासन ने कक्षा आठ तक लड़कियों की पढ़ाई मुफ्त कर रखी है। इसके अलावा नवीं से कक्षा बारह तक की लड़कियों को निर्धारित फीस जमा करनी पड़ती है। यहां कई ऐसे परिवारों की बेटियां हैं जो इस फीस को जमा करने में असमर्थ हैं। संस्था ने स्कूल से ऐसी लड़कियों का ब्योरा लिया जिनकी फीस नियमित जमा नहीं हो रही थी या फिर नाम कटने की नौबत थी। उसके बाद परिवारों से मिलकर सही स्थिति पता की और फिर वास्तविक पात्र लड़कियां चुन लीं जो पढ़ना चाहती थीं पर फीस जमा करना मुश्किल हो रहा था। संस्था तभी से ऐसी बेटियों की फीस जमा करती आ रही है। फिलहाल करीब बीस लड़कियों की फीस जमा की जा रही है। कोरोना काल में इसकी छूट मिल गई थी।
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बेटियों को सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन भी दी
हम पहले अलग-अलग विद्यालयों व क्षेत्रों में इस तरह के काम करते थे। संस्था सदस्यों से बातचीत के बाद एक ही विद्यालय को गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया। हम लोग अपनी बचत व परिवार की आय के कुछ धन को बालिका शिक्षा के लिए खर्च करते हैं। ये विद्यालय प्रबंधन के बताए मुताबिक छमाही या मासिक तौर पर दे दिया जाता है। इसके अलावा विद्यालय की बेटियों को संस्था ने सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन भी निशुल्क प्रदान की है। कई अन्य तरह की जरूरतें भी पूरी करने में मदद करते हैं।
- सोनरूपा विशाल, संस्थापक पंख
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सरकार को करनी चाहिए इंटर तक फीस माफ
लगभग सभी सरकारें बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने की बात तो करती हैं पर इसके लिए सार्थक पहल नहीं करतीं। यदि कोई लड़की इंटर तक शिक्षा ग्रहण कर ले तो इच्छा होने पर आगे की शिक्षा वह ट्यूशन पढ़ाकर भी पूरी कर सकती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि बेटियों की मुफ्त शिक्षा का दायरा बढ़ाया जाए। उन्हें अभी जो आठवीं तक पढ़ाई मुफ्त कराई जा रही है इसे इंटर तक कराया जाए। हम सभी सदस्य बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में लगे हैं पर सीमित तौर पर ही मदद कर सकते हैं।
- पूजा शलभ गुप्ता, कोषाध्यक्ष
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सहयोग से बेहतर हो रहा माहौल
सरकार की ओर से दी गई सहूलियतों से बेटियों को बेहतर शिक्षा देने का काम कर रहे हैं पर पंख संस्था कई साल से हमारे विद्यालय को सौगात दे रही है जो अनूठा प्रयास है। गरीब बेटियों की फीस का मामला हो या सेनेटरी पैड जैसी सहूलियत, यह मदद किसी मायने में कम नहीं है। समाज के सक्षम लोगों के इस तरह के प्रयास दूसरों के लिए भी प्रेरक हो सकते हैं। मैं उम्मीद करती हूं कि पढ़ी लिखी बेटियां भी इसी तरह की सकारात्मक सोच लेकर राष्ट्र निर्माण में सहयोग देंगी।
- मधु शर्मा, प्रधानाचार्य पार्वती आर्य कन्या इंटर कॉलेज