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‘संतदर्शन और सत्संग श्रवण से मानव जीवन बनता है सौभाग्यशाली’
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बदायूं। बदायूं क्लब में आयोजित सात दिवसीय शिवकथा ज्ञानयज्ञ का देव और व्यास पूजन के साथ प्रारंभ हुआ। महंत राधेश्याम व्यास के उत्तराधिकारी आचार्य शशिकांत वशिष्ठ ने कहा कि मानव जीवन मात्र संत दर्शन और सत्संग श्रवण करने पर ही सौभाग्यशाली बनता है। बोले-मानव जीवन को आयु, विद्या, धन, बल, यश और परिवार, कारोबार, रिश्तेदार, संस्कार केवल कर्मानुसार ही प्राप्त होते हैं, जबकि संतदर्शन और सत्संग श्रवण का अवसर ही मात्र ईश्वर की कृपा से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों को प्राप्त करने वाला मानव ही सौभाग्यशाली बनता है।
आचार्य शशिकांत ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि रावण जाति में उच्चकुल वंश ब्राह्मण, आयु में सबसे बड़ा, विद्धता में परम विद्वान, धनवान, ज्ञानवान, बलवान था परंतु संतदर्शन व सत्संग के अभाव में वह दुर्भाग्यशाली बना। इसलिए हर वर्ष रावण का पुतला फूंका जाता है और रावण नाम ही कलंकित बन गया। आचार्य ने शिवपुराण कथा का भी पूर्ण परिचय दिया। इस मौके पर मुख्य यजमान नरेश शंखधार, सुरेंद्र कुमार दीक्षित, अरुण गुप्ता, संत कुमार गुप्ता, महीपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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आचार्य शशिकांत ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि रावण जाति में उच्चकुल वंश ब्राह्मण, आयु में सबसे बड़ा, विद्धता में परम विद्वान, धनवान, ज्ञानवान, बलवान था परंतु संतदर्शन व सत्संग के अभाव में वह दुर्भाग्यशाली बना। इसलिए हर वर्ष रावण का पुतला फूंका जाता है और रावण नाम ही कलंकित बन गया। आचार्य ने शिवपुराण कथा का भी पूर्ण परिचय दिया। इस मौके पर मुख्य यजमान नरेश शंखधार, सुरेंद्र कुमार दीक्षित, अरुण गुप्ता, संत कुमार गुप्ता, महीपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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