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कर्ज लेकर सूखे से बचाई फसल... अब लागत निकालना भी मुश्किल

Fri, 14 Oct 2022 12:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 12:43 AM IST
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Crop saved from drought by taking loan, now it is difficult to recover the cost
जोगराज। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। जिले के किसानों ने पहले सूखे की मार झेली और अब बारिश ने उनकी बर्बादी की कहानी लिख दी है। सूखे के दौरान फसलों को बचाए रखने के लिए किसानों को कर्ज लेकर खाद-पानी का इंतजाम किया। जैसे-तैसे थोड़ी-बहुत फसल बची तो उस पर बारिश ने पानी फेर दिया। जिन किसानों ने कर्ज लेकर फसल की थी, उन पर दोहरी मार पड़ी है। एक तो उन्हें लागत निकालना मुश्किल हो गया है ऊपर से बहन-बेटियों के हाथ पीले करने की चिंता सजाए जा रही है।
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फसलों को जब बारिश की जरूरत थी, तो सूखा पड़ा। तब किसान रोजाना आसमान में टकटकी लगाकर देखते थे, लेकिन बारिश नहीं हुई। जैसे-तैसे कर्ज लेकर फसलों को खाद-पानी से सींचा तो अक्तूबर में हुई बारिश ने उन्हें फिर से तबाह कर दिया। बारिश से फसल गिरकर चौपट हो गई और खेतों में भर गया। पानी की निकासी न होने पर रही सही कसर भी पूरी हो गई। तमाम किसानों को अब यही फिक्र है कि कर्ज कैसे उतारेंगे।
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बेटी की शादी के लिए एक बीघा खेत रखेंगे गिरवी
कादरचौक। कुढा शाहपुर के सूरजपाल के पास एक बीघा ही खेत है। बटाई पर खेत लेकर उन्होंने सात बीघा धान और बाजरा की फसल लगाई। सूखा की वजह से उन्होंने पानी और खाद लगाने के लिए एक साहूकार से 13 हजार रुपये कर्ज भी लिया, जो फसल बेचकर देने की बात तय हुई थी। उनकी बेटी की शादी के लिए रिश्ता तय हो चुका है। दो माह बाद उनकी बेटी की शादी है, लेकिन मौसम ने फसल पूरी से बर्बाद कर दी है। कहते हैं कि बेटी की शादी के लिए अब वह अपना एक बीघा खेत गिरवी रखेंगे। संवाद
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बारिश ने तबाह की धान की फसल
कुंवरगांव। हरनाथपुर निवासी रिंकू के पास तीन बीघा जमीन है। रिंकू घर में सबसे बड़े हैं। उन्होंने बहन की शादी तय की है, जो सर्दियों में होगी। हालांकि अभी तारीख तय नहीं हुई है। शादी के लिए जो धनराशि जोड़ी थी, वह सूखा पड़ने पर धान की बोआई के बाद खाद-पानी में लगा दी। उम्मीद थी शादी से संबंधित खर्चे धान बेचकर मिलने वाली धनराशि से निपटा देंगे, लेकिन अब बारिश कहर बनकर टूटी है। वह बताते हैं कि पूरी फसल बर्बाद हो गई है। अब खेत को गिरवी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। संवाद
बैंक से लिया था 45 हजार का कर्ज, कहां से चुकाएं
बिनावर। गांव बरखेड़ा की गोटिया निवासी वीरपाल के पास पांच बीघा जमीन है। इसमें धान और मिर्च की फसल की है। बारिश की वजह से फसल पूरी बर्बाद हो चुकी है। वीरपाल के अनुसार, उन्होंने किसान ग्रामीण बैंक से 45 हजार रुपये जमीन पर कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि फसल को बेचकर आसानी से कर्ज उतार देंगे, लेकिन अब फसल तबाह हो चुकी है। वीरपाल का कहना है कि उनके छह बच्चे हैं। एक बेटी शादी लायक है। उसकी शादी के लिए सोच रहे थे, लेकिन अब समझ नहीं आ रहा क्या करें। बैंक वाले पैसे जमा करने की बात कह रहे हैं। संवाद
फसल काटने का आया नंबर, तो हो गए बर्बाद
बिनावर। गांव मुड़िया निवासी जोगराज के पास चार बीघा जमीन है। जोगराज ने इसमें शरबती धान लगाया था। पहले सूखे ने मारा, तो उसमें पानी लगाकर फसल ठीक की। जब फसल कटने का नंबर आया, तो बारिश ने सब कुछ नष्ट कर दिया। जोगराज ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक से 70 हजार रुपये केसीसी से निकाले हैं। केसीसी जमा करने का वक्त आ रहा है। अब वह कैसे जमा कर पाएंगे। उन्होंने पड़ोस के गांव मलिकपुर में एक व्यक्ति की आठ बीघा जमीन बटाई पर ली थी। वहां पर लाहटा बो दिया था, वह भी खराब हो गया है। संवाद

33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर ही मिलेगा मुआवजा
मौसम साफ होने पर जिला प्रशासन की ओर से अब फसलों में नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। लेकिन नुकसान का मुआवजा पाना इतना आसान नहीं है। यदि किसी किसान की फसल में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान है, तब ही वह मुआवजे का हकदार होगा। एसडीएम सदर एसपी वर्मा ने बताया कि जिन किसानों की फसल 33 प्रतिशत से अधिक खराब हुई है, उनको मुआवजा देने का प्रावधान है। अगर फसल 33 प्रतिशत से कम खराब हुई तो संबंधित किसान मुआवजे की श्रेणी में शामिल नहीं हो सकेगा। इस बारे में अधीनस्थों से जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा है। संवाद

वीरपाल। संवाद

वीरपाल। संवाद- फोटो : BADAUN

रिंकू। संवाद

रिंकू। संवाद- फोटो : BADAUN

सूरजपाल। संवाद

सूरजपाल। संवाद- फोटो : BADAUN

उझानी में बारिश के बाद चौपट हुई फसल। संवाद

उझानी में बारिश के बाद चौपट हुई फसल। संवाद- फोटो : BADAUN

बिनावर क्षेत्र में गिरी पड़ी धान की फसल। संवाद

बिनावर क्षेत्र में गिरी पड़ी धान की फसल। संवाद- फोटो : BADAUN

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