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आटो सेल्स मालिक ने की  थी गोली मारकर आत्महत्या

Tue, 29 Nov 2016 11:10 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Tue, 29 Nov 2016 11:10 PM IST
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मृतक के पिता ने दर्ज कराई इत्तेफाकिया घटना
मकान की छत पर मिला तमंचा पुलिस को सौंपा

आटो सेल्स मालिक विजय साहू की संदिग्ध हालात में हुई मौत के मामले में सच्चाई उस वक्त सामने आई, जब मृतक का पिता व्यास बाबू तमंचा लेकर कोतवाली पहुंचा। उसने पुलिस के सामने घटना की हकीकत बयां कर दी। विजय ने मकान की छत पर खुद को गोली मारी थी। उसने यह कदम क्यों उठाया? यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव बसोमा निवासी आटो सेल्स मालिक विजय साहू की सोमवार सुबह में संदिग्ध हालात में गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल के आसपास तहकीकात के दौरान जो सबूत जुटाए, उसी आधार पर पुलिस को मामला आत्महत्या का नजर आने लगा था, लेकिन उस वक्त घरवाले खुलकर कुछ भी कहने का तैयार नहीं थे। वे पहले हत्या की आशंका व्यक्त कर रहे थे। पोस्टमार्टम के बाद शाम को विजय का शव घर पहुंचा, तो पिता ने कोतवाल के सामने हकीकत बयां कर दी। इससे पहले पुलिस की फॉरेंसिक टीम के सदस्य भी हत्या के आरोप को झुठला चुके थे।
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मृतक के पिता ने पुलिस को सोमवार देर रात ही कोतवाली पहुंच कर तहरीर सौंप दी। तहरीर के मुताबिक, विजय घरवालों को अपने मकान की छत पर खून से लथपथ पड़ा मिला था। तख्त पर खून था जो बाद में घरवालों ने साफ भी कर दिया। विजय के पिता ने पुलिस को 315 बोर का वह तमंचा भी सौंप दिया जिससे गोली लगी थी। कोतवाल गोपीचंद्र यादव ने बताया कि घटना इत्तेफाकिया थी। विजय ने आत्महत्या क्यों की, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है, लेकिन घरवाले कोई कार्रवाई नहीं चाहते। वैसे, घटना से पहले विजय ने अपनी पत्नी नीतू से फोन पर बात जरुर की थी। इधर, केस की सच्चाई सामने आ जाने के बाद पुलिस ने भी राहत की सांस ली है।
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आखिर कहां से आ रहे हैं तमंचे
उझानी। आटो सेल्स मालिक विजय साहू और उससे दो दिन पहले किलाखेड़ा मोहल्ले में छात्र ध्रुव सक्सेना की मौत के बाद सवाल यह भी उठने लगा है कि दोनों ही घटनाओं में तमंचों का इस्तेमाल किया गया। दोनों तमंचे 315 बोर के थे। मान लें कि ध्रुव की मौत खेल-खेल में चली गोली लगने से हुई, तो विजय ने आत्महत्या करने का कदम क्यों उठाया। विजय का परिवार तो आर्थिक रूप से संपन्न भी है। तमंचे दोनों के ही घरों में मौजूद थे। तमंचे कहां से लाए गए? यह भी जांच का विषय है। सूत्रों की मानें तो 315 बोर के तमंचे तीन-चार हजार रुपया में उपलब्ध हो जाते हैं। इस गैरकानूनी काम में कई लोग लिप्त हैं।
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