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भाई-भतीजों ने बीच चौराहे पर युवक को मारा डाला
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 18 May 2016 12:06 AM IST
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हत्या
- फोटो : अमर उजाला
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ईंटों के बंटवारे को लेकर कादरचौक के पसेई में वारदात
पुराने मकान की ईंटों को लेकर चल रहा था विवाद
थाना क्षेत्र के गांव पसेई में ईंटों के बंटवारे के विवाद में भाई-भतीजों ने ही साधू सिंह यादव की गोली मारकर हत्या कर दिया। वारदात को अंजाम गांव में बीच चौराहे पर दिनदहाड़े दिया गया। विवाद पुराने घर की ईंटों को इस्तेमाल में लेने को लेकर था।
कादरचौक थाने के गांव पसेई निवासी साधू सिंह यादव (40) पुत्र मनोहर सिंह यादव का गांव में ही पैतृक मकान है। लंबे समय से साधू सिंह पत्नी मायादेवी और बच्चों के साथ बाहर रह कर नौकरी करता था। इस मकान की ईंटों के बंटवारे को लेकर साधू सिंह का अपने भाई राजवीर सिंह से विवाद चल रहा था। मकान की ईंटों का इस्तेमाल राजवीर कर रहा था। हाल ही में बंटवारा करने के लिए साधु सिंह गांव आया था। मंगलवार को दोपहर दो बजे राजवीर ने साधू सिंह को बंटवारा करने के लिए घर बुलाया था। यहां राजवीर और साधू सिंह के बीच विवाद हो गया। मारपीट होने पर साधू सिंह घर से निकल कर बाहर भागा। पीछा करके राजवीर और उसके लड़के नीरज और सरबन ने गांव में चौराहे पर पकड़ा और उसको तमंचे से गोली मार दी। सीने पर गोली लगने से साधू सिंह की मौके पर मौत हो गई।
बीच चौराहे पर हुई वारदात से इलाके में सनसनी फैल गई। खबर मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। इससे पहले राजवीर और नीरज वहां से भाग गए। पत्नी मायादेवी की ओर से राजवीर, नीरज औैर सरबन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। इनको जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामला बंटवारे में रंजिश का है।
-रुकुमपाल सिंह, एसओ कादरचौक
दूसरी बार उजड़ा माया का सिंदूर
कादरचौक। माया की मांग का सिंदूर दूसरी बार उजड़ गया। साधू सिंह तीन भाई थे। अनार सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। माया का ब्याह अनार सिंह से हुआ था। अनार सिंह से माया को तीन संतानें हैं। अनार सिंह की मौत के बाद माया बतौर पत्नी साधू सिंह के साथ रहने लगी थी। साधू सिंह से भी उसकी दो संतानें हैं।
साधू सिंह के दूसरा भाई राजवीर अपनी काफी जमीन बेच चुका है। चूंकि अनार सिंह की जमीन भी साधू सिंह के कब्जे में आ गई थी। इसलिए राजवीर उससे रंजिश मानता था। राजवीर के डर से करीब 14 साल पहले साधू सिंह मायादेवी के साथ गांव छोड़कर चला गया था। वह दूसरे प्रदेश में नौकरी कर रहा था। पैतृक मकान पर राजवीर ने कब्जा कर लिया था। करीब पांच महीने पहले ही साधू सिंह गांव लौटा था, लेकिन वह गांव से काफी दूर मकान बनाकर रह रहा था। माया को नहीं पता था कि बंटवारे की इस रंजिश में उसकी पांच संतानें अनाथ हो जाएंगी। साधू सिंह की हत्या के बाद मायादेवी और उसकी पांच संतानें बदहवास हैं।
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पुराने मकान की ईंटों को लेकर चल रहा था विवाद
थाना क्षेत्र के गांव पसेई में ईंटों के बंटवारे के विवाद में भाई-भतीजों ने ही साधू सिंह यादव की गोली मारकर हत्या कर दिया। वारदात को अंजाम गांव में बीच चौराहे पर दिनदहाड़े दिया गया। विवाद पुराने घर की ईंटों को इस्तेमाल में लेने को लेकर था।
कादरचौक थाने के गांव पसेई निवासी साधू सिंह यादव (40) पुत्र मनोहर सिंह यादव का गांव में ही पैतृक मकान है। लंबे समय से साधू सिंह पत्नी मायादेवी और बच्चों के साथ बाहर रह कर नौकरी करता था। इस मकान की ईंटों के बंटवारे को लेकर साधू सिंह का अपने भाई राजवीर सिंह से विवाद चल रहा था। मकान की ईंटों का इस्तेमाल राजवीर कर रहा था। हाल ही में बंटवारा करने के लिए साधु सिंह गांव आया था। मंगलवार को दोपहर दो बजे राजवीर ने साधू सिंह को बंटवारा करने के लिए घर बुलाया था। यहां राजवीर और साधू सिंह के बीच विवाद हो गया। मारपीट होने पर साधू सिंह घर से निकल कर बाहर भागा। पीछा करके राजवीर और उसके लड़के नीरज और सरबन ने गांव में चौराहे पर पकड़ा और उसको तमंचे से गोली मार दी। सीने पर गोली लगने से साधू सिंह की मौके पर मौत हो गई।
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बीच चौराहे पर हुई वारदात से इलाके में सनसनी फैल गई। खबर मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। इससे पहले राजवीर और नीरज वहां से भाग गए। पत्नी मायादेवी की ओर से राजवीर, नीरज औैर सरबन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। इनको जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामला बंटवारे में रंजिश का है।
-रुकुमपाल सिंह, एसओ कादरचौक
दूसरी बार उजड़ा माया का सिंदूर
कादरचौक। माया की मांग का सिंदूर दूसरी बार उजड़ गया। साधू सिंह तीन भाई थे। अनार सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। माया का ब्याह अनार सिंह से हुआ था। अनार सिंह से माया को तीन संतानें हैं। अनार सिंह की मौत के बाद माया बतौर पत्नी साधू सिंह के साथ रहने लगी थी। साधू सिंह से भी उसकी दो संतानें हैं।
साधू सिंह के दूसरा भाई राजवीर अपनी काफी जमीन बेच चुका है। चूंकि अनार सिंह की जमीन भी साधू सिंह के कब्जे में आ गई थी। इसलिए राजवीर उससे रंजिश मानता था। राजवीर के डर से करीब 14 साल पहले साधू सिंह मायादेवी के साथ गांव छोड़कर चला गया था। वह दूसरे प्रदेश में नौकरी कर रहा था। पैतृक मकान पर राजवीर ने कब्जा कर लिया था। करीब पांच महीने पहले ही साधू सिंह गांव लौटा था, लेकिन वह गांव से काफी दूर मकान बनाकर रह रहा था। माया को नहीं पता था कि बंटवारे की इस रंजिश में उसकी पांच संतानें अनाथ हो जाएंगी। साधू सिंह की हत्या के बाद मायादेवी और उसकी पांच संतानें बदहवास हैं।