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फांसी पर झूल गया कर्ज में डूबा एक और किसान

Tue, 28 Apr 2015 07:32 PM IST
badaun
badaun Updated Tue, 28 Apr 2015 07:32 PM IST
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Swinging on the gallows debt Shrouded in another farmer

कर्ज में डूबे एक और किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। किसान का शव गांव के बाहर उसके नलकूप के पास पेड़ पर लटकता हुआ मिला। खबर मिलने पर तहसीलदार राजमणि मिश्रा, नायब तहसीलदार विमल शुक्ला, कानूनगो सत्यपाल सिंह और लेखपाल किशनलाल ने गांव पहुंचकर परिवार वालों के बयान लिए।

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कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव हरीनगला निवासी श्रीराम उर्फ नेमसिंह (38) पुत्र अजयपाल के पास तीन बीघा जमीन है। श्रीराम ने कर्ज लेकर अपने खेत में नलकूप लगवाया था। उनको उम्मीद थी कि गेहूं की फसल बेहतर होगी। इससे वह कर्ज निपटा देंगे। पांच बीघा खेत में सिर्फ तीन क्विंटल गेहूं निकले। इससे वह परेशान थे।
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सोमवार रात श्रीराम अपनी पत्नी सुनीता से नलकूप पर जाने की बात कहकर निकले थे। फिर वह वापस नहीं आए। मंगलवार को गांव वालों ने श्रीराम का शव नलकूप के पास नीम के पेड़ पर लटकता हुआ देखा। खबर मिलने पर एसओ कुंवरगांव मेराज अली मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को पेड़ से उतारा। श्रीराम ने बिजली के तार से फांसी का फंदा बनाया था। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। मृतक के 11 माह का पुत्र अमन और तीन साल की पुत्री पिंकी है। घटना के बाद परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल है। परिवार वालों का कहना है कि फसल बर्बाद होने और कर्ज के चलते उन्होंने खुदकुशी की है। तहसीलदार राजमणि मिश्रा ने श्रीराम के परिवार वालों को मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने की बात कही है।
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मंशा नगला में हार्टअटैकसे किसान की मौत
फसल बर्बाद होने के सदमे में एक और किसान की मौत हो गई। खबर मिलने पर लेखपाल ने गांव पहुंच कर परिवार वालों के बयान लिए। शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है। उसावां थाने के गांव मंशा नगला निवासी अनिल पांडेय (53) पुत्र मुरारीलाल पांडेय के पास आठ बीघा जमीन है। इसमें गेहूं की फसल थी। बेमौसम बारिश में फसल बर्बाद हो गई। सोमवार को उन्होंने गेहूं निकालवाए थे। गेहूं काफी कम निकलने से वह सदमे में थे। मंगलवार तड़के पांच बजे घर पर ही उनके सीने में दर्द उठा। कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। उनके दो बेटे और एक दस साल की बेटी है।


30 दिन में आठ किसानों ने मौत को गले लगाया
बेमौसम बारिश फसलों की बर्बादी होने के बाद शुरू हुआ किसानों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 30 दिन में जिले में आठ किसान फांसी लगाकर और जहर खाकर मौत को गले लगा चुके हैं। 50 किसानों की मौत हार्टअटैक से हो चुकी है। जिले में 22 मार्च से किसानों के हार्टअटैक से मौत का सिलसिला शुरू हुआ था। 27 मार्च से बदहाल किसान की खुदकुशी का पहला मामला सामने आया। तब से अब तक किसानों की सिलसिलेवार मौत हो रही है। तमाम गांवों में अब तक बर्बाद फसलों का सर्वे भी नहीं हुआ है। कर्ज में डूबे किसान खुदकुशी कर रहे हैं या फिर उनकी हार्टअटैक से आकस्मिक मौत हो रही है।

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इन किसानों ने मौत को गले लगाया
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27 मार्च- बिसौली के गांव खेड़ादासपुर में किसान राजेश ने फांसी लगाई।
02 अप्रैल- दातागंज के गांव गढ़ा में किसान सूरजपाल फांसी के फंदे पर झूला।
05 अप्रैल- उसहैत के गांव काकोरी में मुनेंद्र गिरी ने फांसी लगाकर खुदकुशी की।
08 अप्रैल- जरीफनगर के गांव चिरवारी में किसान राजपाल ने फांसी लगाकर जान दी।
10 अप्रैल- वजीरगंज के गांव बगरैन में किसान कन्हई लाल फांसी के फंदे पर झूला।
16 अप्रैल-रसूलपुर गांव में किसान रतीराम ने फांसी लगाई। सदमे में रतीराम की मां की हार्ट अटैक से मौत।
16 अप्रैल- जरीफनगर के गांव उस्मानपुर में किसान ऊदल ने जहर खाकर जान दी।

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