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मूसाझाग पुलिस ने नहर के रास्ते पास करा दिए 30 गोवंशीय पशु
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:06 AM IST
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गोवंशीय पशु
- फोटो : अमर उजाला
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एसओ बोले, वध को नहीं कृषि को ले जाए जा रहे थे पशु
पुलिस और पशु तस्करों का गठजोड़ फिर सामने आया है। अब मूसाझाग थाना पुलिस ने 15 जोड़ी गोवंशीय पशुओं को निर्माणाधीन नहर के रास्ते पास करा दिया। पुलिस की इस हरकत का कई गांवों के लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस बल के सामने उनकी एक न चली। एसओ रामनरेश माथुर का दावा है कि पशुओं को वध के लिए नहीं कृषि कार्य के लिए ले जाया जा रहा था।
मूसाझाग थाने के गांव भैरों नगला के लोगों ने सोमवार दोपहर पुलिस को खबर दी कि 10-12 लोग करीब 30 गोवंशीय पशुओं को वध के लिए ले जा रहे हैं। खबर मिलने पर फोर्स के साथ एक दरोगा मौके पर पहुंचे। दरोगा ने बिना पड़ताल के ही तस्करों को पशुओं के साथ निर्माणाधीन नहर के रास्ते पास करा दिया। पुलिस की इस हरकत के बारे में जानकारी होने पर सराय पिपरिया, गंगपुर, टिकलापुर आदि गांवों के लोग पुलिस के खिलाफ एकत्र हुए। उन्होंने अपना विरोध भी जताया, लेकिन उनकी एक न चली। मूसाझाग थाना पुलिस की इस हरकत पर इलाके में रोष है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पशु तस्करों को पुलिस का संरक्षण उजागर हो चुका है।
बिना पड़ताल तस्करों को घोषित कर दिया किसान
मूसाझाग। थाना पुलिस ने बिना किसी पड़ताल के पशु तस्कषरों को किसान घोषित कर दिया। इनके पास नखासा से पशुओं की खरीद-फरोख्त और हुलिया रसीदें भी नहीं देखी गईं। पशुओं को कहां से कहां ले जाया जा रहा है? इसके पड़ताल भी पुलिस ने जरूरी नहीं समझी। बता दें कि इलाके में पुलिस के संरक्षण में बड़े पैमाने पर पशुओं की तस्करी हो रही है।
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पशुओं को तस्करी कर ले जाने की जानकारी पर फोर्स को भेजा गया था। पता लगा कि पशुओं को वध के लिए नहीं कृषि कार्य के लिए ले जाया जा रहा है। इसके बाद पशुओं को छोड़ दिया गया।
-रामनरेश माथुर, एसओ मूसाझाग
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सूखी नदियां बनीं पशु तस्करों का मुफीद रास्ता
दातागंज तहसील के कई थाने पशु तस्करी का हब बन गए हैं। इसकी एक मुख्य वजह इलाके में सूखी नदियां और निर्माणाधीन नहर भी है। सूखी नदियों ने पशु तस्करों के लिए मुफीद रास्ते मुहैया करा दिए हैं। इन्हीं के रास्ते तस्कर गोवंशीय पशुओं को तस्करी कर जिले से बाहर ले जाते हैं। उनका बाकी काम खाकी और खादी पूरा कर देती है।
हजरतपुर में रामगंगा पर नया पुल बनने से इलाके में पशु तस्करों में और इजाफा हुआ है। उसावां, दातागंज, मूसाझाग, अलापुर और हजरतपुर गोवंशीय पशुओं की तस्करी के लिए कुख्यात हो गए हैं। इन थाना क्षेत्रों में लगने वाले नखासों में बड़े पैमाने पर गोवंशीय पशुओं की अवैध रूप से खरीद-फरोख्त होती है। गौर करने वाली बात है कि अब तस्करी का नया फार्मूला इजाद किया गया है। क्षेत्र के लोगों को पैदल रास्ते पशु पार कराने का ठेका दिया जाता है। ये लोग खेती के लिए पशुओं को ले जाने की बात कहकर ठिकाने तक पशुओं को पहुंचा देते हैं। बादमें इनको इनका हिस्सा मिल जाती है। हजरतपुर थाना क्षेत्र के हरौड़ा जंगल में पशु तस्करों के कई अड्डे हैं। नियमानुसार गोवंशीय पशुओं की खरीद फरोख्त के लिए पहचान पत्र, किसान बही होनी चाहिए, लेकिन नखासों में नियमों को पूरी तरह से दरकिनार किया जा रहा है।
पुलिस और पशु तस्करों का गठजोड़ फिर सामने आया है। अब मूसाझाग थाना पुलिस ने 15 जोड़ी गोवंशीय पशुओं को निर्माणाधीन नहर के रास्ते पास करा दिया। पुलिस की इस हरकत का कई गांवों के लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस बल के सामने उनकी एक न चली। एसओ रामनरेश माथुर का दावा है कि पशुओं को वध के लिए नहीं कृषि कार्य के लिए ले जाया जा रहा था।
मूसाझाग थाने के गांव भैरों नगला के लोगों ने सोमवार दोपहर पुलिस को खबर दी कि 10-12 लोग करीब 30 गोवंशीय पशुओं को वध के लिए ले जा रहे हैं। खबर मिलने पर फोर्स के साथ एक दरोगा मौके पर पहुंचे। दरोगा ने बिना पड़ताल के ही तस्करों को पशुओं के साथ निर्माणाधीन नहर के रास्ते पास करा दिया। पुलिस की इस हरकत के बारे में जानकारी होने पर सराय पिपरिया, गंगपुर, टिकलापुर आदि गांवों के लोग पुलिस के खिलाफ एकत्र हुए। उन्होंने अपना विरोध भी जताया, लेकिन उनकी एक न चली। मूसाझाग थाना पुलिस की इस हरकत पर इलाके में रोष है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पशु तस्करों को पुलिस का संरक्षण उजागर हो चुका है।
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बिना पड़ताल तस्करों को घोषित कर दिया किसान
मूसाझाग। थाना पुलिस ने बिना किसी पड़ताल के पशु तस्कषरों को किसान घोषित कर दिया। इनके पास नखासा से पशुओं की खरीद-फरोख्त और हुलिया रसीदें भी नहीं देखी गईं। पशुओं को कहां से कहां ले जाया जा रहा है? इसके पड़ताल भी पुलिस ने जरूरी नहीं समझी। बता दें कि इलाके में पुलिस के संरक्षण में बड़े पैमाने पर पशुओं की तस्करी हो रही है।
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पशुओं को तस्करी कर ले जाने की जानकारी पर फोर्स को भेजा गया था। पता लगा कि पशुओं को वध के लिए नहीं कृषि कार्य के लिए ले जाया जा रहा है। इसके बाद पशुओं को छोड़ दिया गया।
-रामनरेश माथुर, एसओ मूसाझाग
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सूखी नदियां बनीं पशु तस्करों का मुफीद रास्ता
दातागंज तहसील के कई थाने पशु तस्करी का हब बन गए हैं। इसकी एक मुख्य वजह इलाके में सूखी नदियां और निर्माणाधीन नहर भी है। सूखी नदियों ने पशु तस्करों के लिए मुफीद रास्ते मुहैया करा दिए हैं। इन्हीं के रास्ते तस्कर गोवंशीय पशुओं को तस्करी कर जिले से बाहर ले जाते हैं। उनका बाकी काम खाकी और खादी पूरा कर देती है।
हजरतपुर में रामगंगा पर नया पुल बनने से इलाके में पशु तस्करों में और इजाफा हुआ है। उसावां, दातागंज, मूसाझाग, अलापुर और हजरतपुर गोवंशीय पशुओं की तस्करी के लिए कुख्यात हो गए हैं। इन थाना क्षेत्रों में लगने वाले नखासों में बड़े पैमाने पर गोवंशीय पशुओं की अवैध रूप से खरीद-फरोख्त होती है। गौर करने वाली बात है कि अब तस्करी का नया फार्मूला इजाद किया गया है। क्षेत्र के लोगों को पैदल रास्ते पशु पार कराने का ठेका दिया जाता है। ये लोग खेती के लिए पशुओं को ले जाने की बात कहकर ठिकाने तक पशुओं को पहुंचा देते हैं। बादमें इनको इनका हिस्सा मिल जाती है। हजरतपुर थाना क्षेत्र के हरौड़ा जंगल में पशु तस्करों के कई अड्डे हैं। नियमानुसार गोवंशीय पशुओं की खरीद फरोख्त के लिए पहचान पत्र, किसान बही होनी चाहिए, लेकिन नखासों में नियमों को पूरी तरह से दरकिनार किया जा रहा है।