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लापता हिस्ट्रीशीटर नहीं हो पा रहे ट्रेस
बदायूं, ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2016 12:01 AM IST
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एचएस रजिस्टर की पड़ताल में खुले कई राज
वर्षों तक पुलिस का सिरदर्द बने रहने वाले पांच शातिर हिस्ट्रीशीटर पहेली बन गए हैं। हो सकता है कि इनमें कुछ की मौत भी हो चुकी हो, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं है। क्राइम कंट्रोल के लिहाज से हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन में यह तथ्य उजागर हुआ है। सदर कोतवाली के पांच हिस्ट्रीशीटरों की बात करें तो तमाम जद्दोजहद के बावजूद इनका कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। यह हिस्ट्रीशीटर पहले तो पुलिस के लिए चुनौती थे और अब पहेली बने हुए हैं।
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एचएस नंबर-1
सदर कोतवाली क्षेत्र के कबूलपुरा निवासी अख्तर मिर्जा का भी जरायम की दुनिया में बड़ा नाम रहा। कोतवाली में अख्तर मिर्जा की हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद इसकी निगरानी बढ़ा दी गई। वर्ष 1984 के बाद से पुलिस को अख्तर मिर्जा की लोकेशन नहीं मिली है। कुनबे के लोग मौत होने की बात कहते हैं, लेकिन इसके कोई सुबूत नहीं हैं। पुलिस रिकार्ड में आज भी जिंदा है।
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एचएस नंबर-2
सदर कोतवाली के मोहल्ला इमली चौक निवासी कासिम पर वर्ष 1996 तक लूट, डकैती जैसे आठ संगीन मुकदमे दर्ज हुए। 1997 में पुलिस ने कासिम की हिस्ट्रीशीट खोल दी। वर्ष 2000 तक कासिम को शहर में देखा गया। उसके बाद से वह लापता हो गया। काफी कोशिश के बाद भी कासिम को ट्रेस नहीं किया जा सका है। वह सदर कोतवाली का लापता हिस्ट्रीशीटर है।
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एचएस नंबर-3
शहर के मोहल्ला सोथा का सोयम उर्फ डालडा सदर कोतवाली का प्रचलित हिस्ट्रीशीटर है। एक वक्त में डालडा का अपराध जगत में काफी नाम रहा। डालडा करीब 16 साल पहले लापता हो गया था। तमाम कोशिशों के बावजूद शातिर डालडा का कोई सुराग नहीं मिला। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि लापता डालडा किसी दूसरे जिले में गिरोह चला रहा होगा।
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एसएस नंबर-4
पटियाली सराय मोहल्ले के शातिर राजीव उर्फ टन्नी की हिस्ट्रीशीट वर्ष 1981 में खुली थी। तब राजीव के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 1990 में राजीव घर बेचकर शहर से चला गया। उस वक्त पुलिस के पास सूचना थी कि वह मुरादाबाद गया है। शातिर राजीव उर्फ टन्नी की सही स्थिति की अब तक पुलिस के पास ठोस जानकारी नहीं है।
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एचएस नंबर-5
शहर कोतवाली के मोहल्ला फरशोरी टोला निवासी शातिर रिजवान ने भी एक के बाद एक कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया था। इसके चलते पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोली थी। रिजवान वर्ष 1975 से लापता है। पुलिस आज तक उसके बारे में सही जानकारी नहीं जुटा सकी। रिजवान की कोई जानकारी या उसकी मौत का प्रमाण अब तक नहीं मिला है।
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समय-समय पर हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन के लिए अभियान चलाया जा रहा है। फर्द अ और फर्द व की कार्रवाई की जाती है। कुछ हिस्ट्रीशीटर लापता हैं। इनकी सक्रियता भी कहीं नजर नहीं आती। कुछ के मरने की बात भी कही जा रही है, लेकिन इसका प्रमाण नहीं है।
-आनंद कुमार पांडेय, सीओ सिटी
वर्षों तक पुलिस का सिरदर्द बने रहने वाले पांच शातिर हिस्ट्रीशीटर पहेली बन गए हैं। हो सकता है कि इनमें कुछ की मौत भी हो चुकी हो, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं है। क्राइम कंट्रोल के लिहाज से हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन में यह तथ्य उजागर हुआ है। सदर कोतवाली के पांच हिस्ट्रीशीटरों की बात करें तो तमाम जद्दोजहद के बावजूद इनका कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। यह हिस्ट्रीशीटर पहले तो पुलिस के लिए चुनौती थे और अब पहेली बने हुए हैं।
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एचएस नंबर-1
सदर कोतवाली क्षेत्र के कबूलपुरा निवासी अख्तर मिर्जा का भी जरायम की दुनिया में बड़ा नाम रहा। कोतवाली में अख्तर मिर्जा की हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद इसकी निगरानी बढ़ा दी गई। वर्ष 1984 के बाद से पुलिस को अख्तर मिर्जा की लोकेशन नहीं मिली है। कुनबे के लोग मौत होने की बात कहते हैं, लेकिन इसके कोई सुबूत नहीं हैं। पुलिस रिकार्ड में आज भी जिंदा है।
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एचएस नंबर-2
सदर कोतवाली के मोहल्ला इमली चौक निवासी कासिम पर वर्ष 1996 तक लूट, डकैती जैसे आठ संगीन मुकदमे दर्ज हुए। 1997 में पुलिस ने कासिम की हिस्ट्रीशीट खोल दी। वर्ष 2000 तक कासिम को शहर में देखा गया। उसके बाद से वह लापता हो गया। काफी कोशिश के बाद भी कासिम को ट्रेस नहीं किया जा सका है। वह सदर कोतवाली का लापता हिस्ट्रीशीटर है।
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एचएस नंबर-3
शहर के मोहल्ला सोथा का सोयम उर्फ डालडा सदर कोतवाली का प्रचलित हिस्ट्रीशीटर है। एक वक्त में डालडा का अपराध जगत में काफी नाम रहा। डालडा करीब 16 साल पहले लापता हो गया था। तमाम कोशिशों के बावजूद शातिर डालडा का कोई सुराग नहीं मिला। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि लापता डालडा किसी दूसरे जिले में गिरोह चला रहा होगा।
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एसएस नंबर-4
पटियाली सराय मोहल्ले के शातिर राजीव उर्फ टन्नी की हिस्ट्रीशीट वर्ष 1981 में खुली थी। तब राजीव के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 1990 में राजीव घर बेचकर शहर से चला गया। उस वक्त पुलिस के पास सूचना थी कि वह मुरादाबाद गया है। शातिर राजीव उर्फ टन्नी की सही स्थिति की अब तक पुलिस के पास ठोस जानकारी नहीं है।
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एचएस नंबर-5
शहर कोतवाली के मोहल्ला फरशोरी टोला निवासी शातिर रिजवान ने भी एक के बाद एक कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया था। इसके चलते पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोली थी। रिजवान वर्ष 1975 से लापता है। पुलिस आज तक उसके बारे में सही जानकारी नहीं जुटा सकी। रिजवान की कोई जानकारी या उसकी मौत का प्रमाण अब तक नहीं मिला है।
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समय-समय पर हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन के लिए अभियान चलाया जा रहा है। फर्द अ और फर्द व की कार्रवाई की जाती है। कुछ हिस्ट्रीशीटर लापता हैं। इनकी सक्रियता भी कहीं नजर नहीं आती। कुछ के मरने की बात भी कही जा रही है, लेकिन इसका प्रमाण नहीं है।
-आनंद कुमार पांडेय, सीओ सिटी