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कटरा सआदतगंज कांड: अधिवक्ता के साथ सीबीआई टीम पहुंची
badaun
Updated Sun, 01 Feb 2015 07:37 PM IST
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कटरा सआदतगंज कांड में वादी पक्ष को सबूत देने पर सोमवार को स्पेशल जज पाक्सो एक्ट की कोर्ट में सीबीआई और वादी पक्ष के अधिवक्ताओं में बहस होगी। अधिवक्ता के साथ देर शाम सीबीआई की एक टीम बदायूं पहुंच गई।
कटरा सआदतगंज में 27/28 मई की रात चचेरी बहनों के शव पेड़ पर लटके मिले थे। परिवार वालों ने तीन सगे भाइयों और दो सिपाहियों के खिलाफ गैंगरेप के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। करीब छह महीने की जांच के बाद सीबीआई ने 11 दिसंबर 2014 को स्पेशल जज पाक्सो एक्ट अनिल कुमार की कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। दावा किया दोनों लड़कियों ने खुदकुशी की थी। क्लोजर रिपोर्ट पर सीबीआई ने वादी पक्ष को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने को छह जनवरी की तारीख दी। छह जनवरी को वादी पक्ष ने कोर्ट में अर्जी देकर सीबीआई से क्लोजर रिपोर्ट का आधार पूछते हुए सीबीआई द्वारा जुटाए गए सभी सबूत मांगे। इस पर कोर्ट ने 16 जनवरी की तारीख तय कर दी। 16 जनवरी को सीबीआई की ओर से अधिवक्ता कुमार रजत ने दलील दी कि वादी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते। अगर कोर्ट सबूत मांगता है तो सबूत दाखिल कर दिए जाएंगे। इस पर कोर्ट ने दो फरवरी की तारीख तय कर दी थी। दो फरवरी को वादी पक्ष और सीबीआई के अधिवक्ता के बीच इस बात पर बहस होगी कि वादी पक्ष को सबूत क्यों नहीं दिए जा सकते। वादी पक्ष के अधिवक्ता एचएस नकवी ने बताया कि कानून में वादी पक्ष को सबूत उपलब्ध कराने का प्रावधान है। आरोपी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते।
वादी पक्ष को सबूत देने का प्रावधान
वादी पक्ष के अधिवक्ता एचएस नकवी ने कहा है कि सीबीआई अधिवक्ता की यह दलील गलत है कि वादी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते। यह सही है कि आरोपी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते। अप्रैल 1985 का मामला है भगवंत सिंह बनाम कमिश्नर ऑफ पुलिस। इस मामले में भी सीबीआई ने जांच करके क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट का आधार तो बताना ही होगा। यह वादी पक्ष का हक है। क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट देने से पहले वादी पक्ष को सबूत देखने का हक है।
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कटरा सआदतगंज में 27/28 मई की रात चचेरी बहनों के शव पेड़ पर लटके मिले थे। परिवार वालों ने तीन सगे भाइयों और दो सिपाहियों के खिलाफ गैंगरेप के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। करीब छह महीने की जांच के बाद सीबीआई ने 11 दिसंबर 2014 को स्पेशल जज पाक्सो एक्ट अनिल कुमार की कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। दावा किया दोनों लड़कियों ने खुदकुशी की थी। क्लोजर रिपोर्ट पर सीबीआई ने वादी पक्ष को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने को छह जनवरी की तारीख दी। छह जनवरी को वादी पक्ष ने कोर्ट में अर्जी देकर सीबीआई से क्लोजर रिपोर्ट का आधार पूछते हुए सीबीआई द्वारा जुटाए गए सभी सबूत मांगे। इस पर कोर्ट ने 16 जनवरी की तारीख तय कर दी। 16 जनवरी को सीबीआई की ओर से अधिवक्ता कुमार रजत ने दलील दी कि वादी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते। अगर कोर्ट सबूत मांगता है तो सबूत दाखिल कर दिए जाएंगे। इस पर कोर्ट ने दो फरवरी की तारीख तय कर दी थी। दो फरवरी को वादी पक्ष और सीबीआई के अधिवक्ता के बीच इस बात पर बहस होगी कि वादी पक्ष को सबूत क्यों नहीं दिए जा सकते। वादी पक्ष के अधिवक्ता एचएस नकवी ने बताया कि कानून में वादी पक्ष को सबूत उपलब्ध कराने का प्रावधान है। आरोपी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते।
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वादी पक्ष को सबूत देने का प्रावधान
वादी पक्ष के अधिवक्ता एचएस नकवी ने कहा है कि सीबीआई अधिवक्ता की यह दलील गलत है कि वादी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते। यह सही है कि आरोपी पक्ष को सबूत नहीं दिए जा सकते। अप्रैल 1985 का मामला है भगवंत सिंह बनाम कमिश्नर ऑफ पुलिस। इस मामले में भी सीबीआई ने जांच करके क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट का आधार तो बताना ही होगा। यह वादी पक्ष का हक है। क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट देने से पहले वादी पक्ष को सबूत देखने का हक है।
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