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बस एक धमाका और हाईवे पर बिखर गए शव
बदायूं।
Updated Tue, 28 Apr 2015 12:31 AM IST
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तेज धमाके के साथ हाईवे पर क्वालिस और रोडवेज बस की की भीषण भिड़ंत के बाद शव बिखर गए। मौके पर ही एक बच्ची समेत तीन लोगों की सांसें थम गईं। घायल लोग हाईवे पर पड़े तड़पने लगे। जिसने भी देखा वह घटना स्थल की ओर दौड़ा। पुलिस के पहुंचने से पहले क्वालिस कार में फंसे महिलाओं और बच्चों को निकालने में ग्रामीण जुट गए।
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हादसे के बाद रोडवेज बस चालक बस को तेज रफ्तार से भगा कर ले गया। गांव के कुछ लोगों ने बाइक से बस का पीछा भी किया लेकिन उनको कामयाबी नहीं मिली। नौशेरा से अरविंद के गांव अब्दुल्लागंज की दूरी तीन किलोमीटर है। हादसे की खबर मिलने पर अब्दुल्लागंज से भी सैकड़ों ग्रामीण नौशेरा आ गए। शव सड़क पर छितराए देखकर ग्रामीण आपा खो बैठे। उन्होंने जाम में फंसी बसों में तोड़फोड़ कर दी। बसों में बैठीं सवारियां किसी तरह निकल कर भागीं। तभी कुछ लोगों ने बसों में आग लगाने की कोशिश की। इस पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर उनको खदेड़ा। इस दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच संघर्ष की स्थिति बन गई। कुछ देर के लिए पुलिस बैकफुट पर नजर आई। बाद में कई थानों की पुलिस और पीएसी पहुंचने पर पुलिस ने ग्रामीणों को बलपूर्वक खदेड़ दिया। शवों को एंबुलेंस से बदायूं भेज दिया।
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दो घंटे में अस्पताल पहुंचे घायल
बदायूं। एक बार फिर बड़े हादसे ने एंबुलेंस 102 और 108 सेवा की कलाई खोल दी। हादसे की सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। इससे पहले ग्रामीण कई घायलों को अस्पताल पहुंचा चुके थे। एंबुलेंस तीन किलोमीटर का सफर दो घंटे में पूरा कर सकी।
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अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर भड़के तीमारदार
बदायूं। घायल जिला अस्पताल पहुंचे तो इमरजेंसी सेवा एक डॉक्टर के सुपुर्द थी। घायलों को इमरजेंसी तक पहुंचने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं मिले। इस पर घायलों के तीमारदार भड़क गए। यहां मौजूद पुलिस ने उनको समझाया। बाद में और डॉक्टरों को बुलाया गया तो तीमारदारों का गुस्सा शांत हुआ। सीएमओ डॉ. दीपक सक्सेना भी जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने घायलों से बात की।
... जब पुलिस पुलिस पर हमलावर हुए ग्रामीण
बदायूं। हादसे के बाद हाईवे पर जाम लग गया। पुलिस ने शव हटाकर यातायात सुचारू करने की कोशिश की तो गांव महिलाएं और बच्चे पुलिस पर हमलावर हो गए। कोतवाली, सिविल लाइंस, बिनावर, वजीरगंज, कुंवरगांव थानों की पुलिस मौके पर थी। एसडीएम सदर प्रदीप यादव, एसपी सिटी अनिल यादव, नायब तहसीलदार विमल शुक्ला, सीओ राजेंद्र सिंह धामा को भी ग्रामीणों के गुस्से के सामने बचाव की मुद्रा में आना पड़ा।
हाईवे पर दो घंटे रहा अराजकता का माहौल
बदायूं। हादसा सुबह साढ़े दस बजे हुआ। दो घंटे तक हाईवे पर अराजकता का माहौल रहा। ग्रामीणों के गुस्से के चलते आगजनी की आशंका को लेकर पुलिस ने रूट डायवर्ट कर दिया। बदायूं से जाने वाले वाहनों को मीरा सराय होते हुए निकाला गया। उझानी की ओर से आने वाले वाहनों को मुजरिया से बिल्सी होते हुए निकाला गया। दोपहर 12.30 बजे पुलिस शवों को हटा सकी। इसके बाद यातायात सुचारू हो सका।
मासूमों ने खेवनहार तो पिता ने खोया बुढ़ापे का सहारा
अब्दुल्लागंज के राजेंद्र के घर पर टूटा दु:ख का पहाड़
परिवार के तीन सदस्यों से मौत से घरवाले बदहवास
उझानी (बदायूं)। अब्दुल्लागंज में सोमवार पूर्वाह्न में आई एक मनहूस खबर ने हर किसी को विचलित कर दिया। बच्चे क्या बूढे़ और जवान, हर कोई नौशेरा की ओर दौड़ पड़ा। राजेंद्र शर्मा के परिवार पर नौशेरा में दु:खों का एक ऐसा पहाड़ टूटा था जो ताउम्र उन्हें कचोटता रहेगा। परिवार ने एक साथ तीन सदस्यों को खोया है। बिलखते घरवाले के बीच मासूम कुनाल और कोमल को तो यह समझने में भी देर लगी कि उन्होंने खेवनहार पिता और लोरियां सुनाते वक्त प्यार से सिर पर हाथ फेरने वाली मां के साथ सबसे लाडले ढाई साल के अंश को भी खो दिया है। उन्हें बिलखता देख हर किसी की आंखें छलछला उठीं।
राजेंद्र शर्मा के सबसे छोटे बेटे अरविंद, उसकी पत्नी पूनम और तीन साल के मासूम अंश की मौत की भनक लगते ही परिवार में मचा कोहराम सुन पूरा गांव इकट्ठा हो गया। उस वक्त किसी को कुछ ज्सादा पता जरुर नहीं था, लेकिन क्या हुआ है, यही जानने को ज्यादातर लोग ट्रैक्टर-ट्रॅलियों पर सवार होकर नौशेरा की ओर निकल पड़े। महिलाएं घरवालों को सांत्वना देने में लगी थी। अरविंद अपनी पत्नी और मासूम बेटे के साथ एक दिन पहले ही घर से उसावां स्थित ससुराल में होने वाले शादी-समारोह में शरीक होने को घर से गया था।
अपने खेवनहार पिता और हर वक्त दुलारने वाली मां समेत परिवार के सबसे छोटे सदस्य अंश की मौत से बदहवास कोमल और कुनाल सदमे में हैं। दोनों यह भी समझ नहीं पा रहे थे कि अब क्या होगा। राजेंद्र की तीन संतान में अरविंद ही सबसे छोटा था। भाईयों में सत्येंद्र ड्राइविंग करता है तो जितेंद्र कासगंज में अपने चाचा के पेट्रोल पंप पर काम देखता है। वैसे तो अरविंद भी ड्राइवर था, लेकिन वह खेतीबाड़ी में पिता हाथ बंटाता था। हादसे में बेटा समेत मृत मां-बाप के साथ पूनम की दादी भी थी जो उन्हीं के साथ चल बसी।
काश, मानी होती कुनाल और कोमल की बात
उझानी। मां-बाप और छोटे भाई की मौत से बदहवास बेटी कुनाल ने बताया कि पापा ने तीन दिन पहले कहा था कि उसावां सभी लोग कार से साथ चलेंगे। चूंकि सहालग के दिन हैं, सो किराये पर कार नहीं मिल पाई थी। अरविंद बाइक पर पत्नी ओर छोटे बेटे को बैठा कर रविवार को घर से निकला तो कुनाल ने नहीं जाने की जिद पकड़ ली। वह उसे नजरांदाज कर चला तो गया लेकिन अरविंद समेत तीनों अब कभी नहीं लौट पाएंगे। बिलखते घरवालों में महिलाओं ने बताया कि कुनाल और कोमल की बात मान ली जाती तो आज यह मनहूस दिन नहीं देखना पड़ता।
घर लौटकर खिंचवानी थी नलकूप की लाइन
उझानी। अरविंद के पिता राजेंद्र के नाम से पिछले दिनों प्राईवेट नलकूप का कनेक्शन मंजूर हुआ था। कूप निर्माण का काम भी करीब-करीब पूरा हो गया था लेकिन बिजली की लाइन खीचना बाकी था। घर से जाते वक्त अरविंद ने कहा था कि सोमवार को जल्दी लौट कर यह काम भी पूरा करा देगा। पूर्व प्रधान रवेंद्र सक्सेना ने बताया कि अरविंद गांव के लोगों में अपने व्यवहार को लेकर खासी लोकप्रिय था।
तीन का अंक, शुरू में खुशियां फिर मातम
उझानी। राजेंद्र शर्मा के परिवार में तीन संतान के अंक का ताल्लुक काफी पुराना रहा है। राजेंद्र भी तीन भाई हैं। सत्यपाल भले ही राजेंद्र के सौतेले भाई हैं लेकिन उनके भी तीन संतान हुईं। सत्येंद्र, जितेंद्र और अरविंद। कोमल, कुनाल और अंश के रूप में अरविंद के घर भी तीन बार किलकारियां गूंजी थी। सोमवार को जब हादसा हुआ तो भी एक साथ परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने अंतिम बार तीन के अंक को मनहूस साबित कर दिया।