फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Hundreds of pond turtles Murray , inquiry ordered

तालाब में सैकड़ों कछुए मरे, जांच के आदेश

Sun, 29 Mar 2015 11:54 PM IST
Bisuli
Bisuli Updated Sun, 29 Mar 2015 11:54 PM IST
विज्ञापन

अंबियापुर विकास खंड के गांव असूपुर रहड़िया के तालाब में करीब 400 कछुए रहस्यमय ढंग से मर गए। मरे हुए कछुए तालाब में ऊपर तैर रहे हैं। ग्राम प्रधान संदीप कुमार ने इस बारे में डीपीआरओ और वन विभाग को सूचना दी है। देर शाम तक कोई अधिकारी गांव नहीं पहुंचा। अधिकारियों की उदासीनता को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा है। दधर, डीएफओ ने कहा है कि मामला गंभीर है। उन्होंने रेंजर के निर्देशन में जांच को टीम भेज दी है। जो जल्दी ही रिपोर्ट देगी।

विज्ञापन

ग्राम प्रधान संदीप कुमार को दोपहर में गांव वालों ने सूचना दी कि गांव के समीप तालाब में करीब 400 कछुए मरे हैं। मरे हुए कछुए पानी में उतरा रहे हैं। गांव प्रधान ने इसे गंभीर माना और सबसे पहले ब्लाक अंबियापुर के डीपीआरओ राजेश यादव को सूचना दी। डीपीआरओ और प्रधान ने डीएएफओ समीर कुमार को जानकारी दे दी है। बाद में डीएफओ ने कहा कि देर शाम उन्हें जानकारी मिली है। सहसवान रेंजर शिवदान सिंह और फारेस्टर योगेंद्र वशिष्ठ को उन्होंने मामले की जांच को भेजा है।
विज्ञापन

तालाब में एकसाथ इतनी बड़ी संख्या में कछुओं के मरने की सूचना पर विचलित हुए विभाग ने तालाब में जहर डाले जाने की आशंका जताई है। डीएफओ ने कहा है कि इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों की टीम बनाकर जांच कराई जाएगी। कछुओं का पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। इसके बाद ही किसी पर कार्रवाई की जा सकती है। डीएफओ ने अपने अधिकारियों को जल्दी रिपोर्ट देने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो कारण माने जा रहे हैं कछुओं के मरने के
किसी ने तालाब में जहर डाला है या तालाब में कोई घातक गैस बन गई है जो कछुओं की मौत का कारण बनी है। दोनों बिंदुओं पर जांच की जाएगी।

शेड्यूल फोर के हो सकते हें कछुए
उप वनाधिकारी ईश्वर दयाल ने बताया गंगा में पाए जाने वाले कछुए शेड्यूल वन और सेकें ड के होेेते हैं और गांवों के तालाबों में अधिकतर शेड्यूल थर्ड और फोर के पाए जाते हैं। माना जा रहा है कि तालाब के कछुए शेड्यूल फोर के होंगे। वन और सेकेंड शेड्यूल वन संरक्षण अधिनियम में आते हैं। थर्ड और फोर शेड्यूल के कछुओं को भी नहीं मारा जा सकता। इस प्रकरण में जांच के बाद कठोर कार्रवाई तय है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed