वीरपाल के पैंतरों के आगे तीन जिलों की पुलिस पस्त
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किशोरी को अगवा कर मूसाझाग थाने में गैंगरेप करने के आरोपी बर्खास्त सिपाही वीरपाल यादव से तीन जिलों की पुलिस हार मान कर हाथ पर हाथ रखकर बैठ गई है। पत्नी, साली, बेटे और साढ़ूू के पुलिस के पास होने के कारण उसके ज्यादातर रिश्तेदारों ने अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिए हैं। सरेंडर अर्जी डालने के बाद पुलिस को अब उसके हाजिर होने का ही इंतजार है। सूचना मिली है कि वीरपाल भेष बदलकर कचहरी जा सकता है। बुर्के में उसे अदालत तक ले जाने की प्लानिंग की जा रही है। आईजी विजय सिंह मीना ने बताया कि टीमें लगाकर वीरपाल की तलाश की जा रही है। सोमवार को वह हाजिर होने की प्लानिंग कर रहा है। इससे पहले ही उसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
वीरपाल की सियासी लोग अब भी मदद कर रहे हैं। यही वजह है कि बदायूं के अलावा बरेली और शाहजहांपुर की पुलिस उसे पकड़ने की प्लानिंग में कामयाब नहीं हो पा रही है। दो दिन पहले पुलिस वीरपाल पर दबाव बनाने के लिए निगोही इलाके के उसकी पत्नी, बेटे, साढ़ूू और साली को पकड़ लाई थी लेकिन इसके बाद भी वह कमजोर नहीं पड़ा। शुक्रवार को वह बदायूं आया और चार घंटे रुकने के बाद चला भी गया। पुलिस को अब उसकी नई लोकेशन बरेली के आसपास मिल रही है। कोर्ट ने इसकी अर्जी पर सुनवाई के लिए 12 जनवरी की तारीख तय कर दी। अनुमान लगाया जा रहा है कि वह हर हाल कोर्ट में हाजिर होना चाहता है। इसीलिए वह बरेली और बदायूं में घूम रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपी को जिले के एक नेता का संरक्षण है। बरेली के एक बड़े नेता भी वीरपाल के करीबी रिश्तेदार हैं। वह भी उसकी लगातार मदद कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक वीरपाल की पत्नी अपना मोबाइल निगोही में ही छोड़ आई है। शुक्रवार को उनके एक रिश्तेदार का उसके नंबर पर फोन आया तो उठ गया। फोन करने वाले ने बात शुरू होते ही पहला सवाल किया, बरखेड़ा वालों का क्या रहा। इस पर फोन रिसीव करने वाले ने उन्हें बुरी तरह हड़काकर चुप रहने हिदायत दी और फोन काट दिया।
कुर्की से बचने के लिए दी सरेंडर अर्जी
बदायूं। कानून के जानकारों की मानें तो वीरपाल ने कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए स्पेशल जज पाक्सो एक्ट की कोर्ट में सरेंडर अर्जी दी है। वीरपाल लगातार पुलिस को चकमा दे रहा है। मामले के विवेचक एसओ मूसाझाग अशोक कुमार इसके खिलाफ कोर्ट से कुर्की वारंट जारी करने की कोशिश में लगे हुए थे। अगर आरोपी की ओर से कोर्ट में सरेंडर अर्जी दे दी जाती है तो कोर्ट कुर्की की कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाएगा।