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तंगहाली से जूझ रहे दो किसानों ने की खुदकुशी

Sun, 13 Aug 2017 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं Updated Sun, 13 Aug 2017 01:02 AM IST
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Farmer commits suicide due to economic crises
suicide

कर्ज और तंगहाली ने दो और युवा किसानों की जान ले ली। दोनों ने शनिवार को फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इनमें से पीलीभीत के हजारा क्षेत्र में रहने वाले जसविंदर पाल सिंह पर सहकारी समिति और बैंक ऑफ बड़ौदा का करीब सवा तीन लाख रुपये का कर्ज था जबकि बदायूं के ओरछी कस्बे के निवासी महिपाल सिंह के घर में कई दिनों से फाकाकशी जैसे हालात थे।

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हजारा (पीलीभीत) थाना क्षेत्र के गांव गांधी नगर निवासी 35 वर्षीय जसविंदर पाल सिंह के पास करीब दो एकड़ जमीन थी। इसी जमीन पर खेतीबाड़ी से उसके परिवार का गुजारा चलता था। कुछ ही समय पहले उसने अपने भाइयों से अलग होकर पत्नी मनप्रीत कौर और एक वर्षीय बेटी हरनीम के साथ अलग गृहस्थी बसा ली थी। करीब छह महीने से उसका परिवार काफी तंगहाली में रह रहा था। साधन सहकारी समिति का 64 हजार रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा का करीब ढाई लाख रुपये का कर्ज भी उसके ऊपर था। इसके चलते जसविंदर काफी तनाव में रहता था। परिवार चलाने के लिए उसने प्राइवेट बस पर कंडक्टर की नौकरी भी की लेकिन यह नौकरी भी ज्यादा दिन नहीं चल पाई। गांव के लोगों के मुताबिक एक हफ्ते से जसविंदर का परिवार काफी तंगहाली के दौर से गुजर रहा था। शनिवार सुबह उसे गांव के ही एक व्यक्ति से अनाज मांगकर लाना पड़ा था तब कहीं उसके घर में चूल्हा जल पाया था।तनाव में डूबा जसविंदर शनिवार दोपहर घर से शौच के लिए जाने को कहकर निकला था। कुछ ही देर बाद करीब आधा किमी दूरी पर गन्ने के खेत में अमरूद के एक पेड़ पर उसका शव फंदे से लटका मिला। देखते-देखते मौके पर भीड़ इकट्ठी हो गई। परिवार के लोग भी पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जसविंदर का शव फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।खुदकुशी करने वाले बदायूं के ओरछी निवासी दूसरे किसान 35 वर्षीय महिपाल के परिवार के हालात और भी बदतर थे। महिपाल के पास सिर्फ डेढ़ बीघा जमीन थी जिससे उसके परिवार का गुजारा नहीं हो पा रहा था। करीब साल भर पहले उसने गांव में ही चाय-समोसे की दुकान खोली लेकिन वह भी नहीं चल पाई। इसके बाद उसने मजदूरी शुरू कर दी लेकिन नियमित रूप से मजदूरी न मिलने की वजह से गुजारा करने में मुश्किलें बनी रहीं। काफी समय से तनाव से जूझ रहे महिपाल ने शनिवार की दोपहर घर के ही कमरे में छत के कुंडे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। कुछ देर बाद उसकी बड़ी बेटी काजल कमरे में पहुंची तो उसने पिता का शव फंदे से लटकते देख शोर मचाकर आसपास के लोगों को इकट्ठा किया। आनन-फानन में शव को फंदे से उतारा गया लेकिन तब तक महिपाल की मौत हो चुकी थी। परिवार के लोगों ने पुलिस को सूचना दिए बगैर महिपाल का अंतिम संस्कार कर दिया। गांव वालों के मुताबिक महिपाल की पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है। उनके चार बच्चों में दो बेटियां 17 साल की काजल, 15 वर्ष की रैना और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा बंटी तीन साल पहले घर से बिना बताए चला गया था और फिर नहीं लौटा। महिपाल के खुदकुशी करने के बाद अब उसके तीन बच्चों की जिम्मेदारी उसके बुजुर्ग पिता लालसिंह पर आ गई है।

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