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दबंगों के आतंक से गांव छोड़ गए दो दर्जन परिवार

Sat, 16 May 2015 08:42 PM IST
Sahaswan
Sahaswan Updated Sat, 16 May 2015 08:42 PM IST
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Dbangon terror village Left two dozen family
दबंगों के आतंक से परेशान रसूलपुर टप्पा मलसई के दो दर्जन से ज्यादा मल्लाह जाति के परिवारों ने शनिवार को गांव छोड़ दिया है। गंगा की कटरी के इस गांव में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त जाति विशेष के दबंग आए दिन ग्रामीणों पर कहर ढहाते हैं। 25 अप्रैल को दबंगों ने मल्लाह जाति के कई घरों में घुसकर लूटपाट और मारपीट की थी। इसमें महिला तीन लोग घायल भी हुए थे। कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने एनसीआर दर्ज कर ली। दबंगों का आतंक जारी रहा तो दो दर्जन से ज्यादा परिवारों ने गांव छोड़ना ही बेहतर समझा।
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जिले में कटरी क्षेत्र के कई गांव जाति विशेष के दबंगों के आतंक से त्रस्त हैं। यहां कानून का नहीं दबंगों का राज चलता है। दूसरी जातियों के ग्रामीणों के घर में घुस जाना। मारपीट और लूटपाट करना। महिलाओं से अश्लीलता दबंगों का शगल बना हुआ है। रसूलपुर टप्पा मलसई गांव में भी यही हाल है। 25 अप्रैल को दबंगों ने गांव के राकेश के घर पर धावा बोल दिया था। इसमें राकेश और उसकी पत्नी ममता गंभीर घायल हो गए। राकेश का अब भी बरेली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। दबंगों के भय से पिछले साल भी दो दर्जन परिवारों ने गांव छोड़ दिया था। यह परिवार कछला, सोरों, सांकरा, अलीगढ़, उझानी आदि जगह बस गए हैं।
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पत्र भेजकर मुख्यमंत्री को बताई व्यथा
सहसवान। गांव छोड़ने वाले परिवारों ने एक संयुक्त पत्र सूबे के मुख्यमंत्री के नाम भेजकर अपनी व्यथा सुनाई है। ग्रामीणों का कहना है कि जाति विशेष के दबंगों को राजनीतिक संरक्षण हासिल है। पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती। दबंगों से जान-माल का खतरा है। पुलिस से सुरक्षा न मिलने पर वह लोग गांव छोड़ रहे हैं।
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इन परिवारों ने छोड़ दिया गांव
अजयपाल, राजू, किशोरी, ओमवीर, कर्रू, पन्नालाल, सत्यपाल, पूरन, शियाराम, चोखे, हरप्यारी, राजकुमारी, फूलवती, संतोषी, गंगादेई, राजवीर, निरंजन, चंद्रपाल, गीता, आनंदी, प्रकाश, राकेश, हेतराम, वीरसिंह, सूरजवती।

ये परिवार भी छोड़ चुके हैं गांव
जगदीश, महेश, श्रीराम, लालाराम, सुरेश, नन्हें, बनवारी, प्यारे, यादराम, राजवीर, जीवाराम, लक्ष्मन और नत्थू।

दबंगों के खिलाफ कोई नहीं खोलता जुबान
गांव रसूलपुर टप्पा मलसई की प्रधान रामश्री के पति ओमप्रकाश ने बताया कि दबंगों के खिलाफ कोई जुबान नहीं खोल पाता है। पुलिस भी इनके खिलाफ कार्रवाई से कतराती है। 25 अप्रैल की घटना के बाद से दबंग लगातार मल्लाह जाति के परिवारों को प्रताड़ित कर रहे थे। पुलिस ने भी उनकी एक न सुनी। आखिर वह गांव छोड़ कर चले गए।


कटरी के गांवों में चलती
है दबंगों की हुकूमत
जमीनों पर कब्जा, फसलें उठा ले जाते हैं दबंग
कटरी के गांवों में जाति विशेष दबंगों की हुकूमत चलती है। पुलिस सब कुछ जानते हुए भी खामोश रहती है। कटरी के गांवों में जमीनों पर कब्जा। दूसरी बिरादरियों के ग्रामीणों की जबरन फसलें उठा ले जाना। मामूली विवाद में फायरिंग दबंगों की आदम में शुमार है। कटरी में डकैतों का आतंक खत्म होने के बाद से जाति विशेष के दबंगों का वर्चस्व बढ़ा है। हजारों बीघा सरकारी जमीनें दबंगों के कब्जे में हैं। राजस्व विभाग भी जमीनों से कब्जा हटवाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। कटरी के गंगा घाटों का ठेका किसी के नाम पर हो लेकिन वसूली दबंग ही करते हैं। ऐसा नहीं है कि यह सब पुलिस की जानकारी में न हो। दबंगों को राजनीतिक संरक्षण हासिल करता है। पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती है।


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