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हत्या के मामले में जीजा-साली को उम्र कैद, जुर्माना भी
बदायूं, ब्यूरो
Updated Tue, 21 Feb 2017 11:31 PM IST
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उघैती के गांव सराय सावल में हुई थी हत्या की वारदात
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम रईस अहमद ने हत्या के मामले में मृतक की पत्नी और साढू को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 21 हजार रुपये जुर्माना भी ठोका गया है।
थाना उघैती के गांव सराय सावल के रूम सिंह ने पांच नवंबर 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका भाई खूब सिंह धान की फसल की रखवाली के लिए खेत पर सोया था। उसका तहेरा भाई राम निवास अपने खेत की फसल देखने गया तो उसने घर आकर बताया कि खूब सिंह की किसी ने गोली मारकर हत्या कर दी है। विवेचना के बाद पुलिस ने तीन दिसंबर 2010 को खूब सिंह के साढू कछला के वार्ड नंबर नौ निवासी वीरपाल पुत्र खमानी को सराय सावल के जंगल से गिरफ्तार कर पूछताछ की। उसने बताया कि उसके खूब सिंह की पत्नी से अवैध संबंध थे। इसकी जानकारी खूब सिंह को हो गई थी। इसके चलते उसने खूब सिंह की पत्नी सुषमा के कहने पर उसकी हत्या कर दी। विद्वान न्यायाधीश रईस अहमद ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद वीरपाल और सुषमा को खूब सिंह की हत्या में दोषी पाया। दोनों को उम्र कैद और 21 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम रईस अहमद ने हत्या के मामले में मृतक की पत्नी और साढू को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 21 हजार रुपये जुर्माना भी ठोका गया है।
थाना उघैती के गांव सराय सावल के रूम सिंह ने पांच नवंबर 2010 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका भाई खूब सिंह धान की फसल की रखवाली के लिए खेत पर सोया था। उसका तहेरा भाई राम निवास अपने खेत की फसल देखने गया तो उसने घर आकर बताया कि खूब सिंह की किसी ने गोली मारकर हत्या कर दी है। विवेचना के बाद पुलिस ने तीन दिसंबर 2010 को खूब सिंह के साढू कछला के वार्ड नंबर नौ निवासी वीरपाल पुत्र खमानी को सराय सावल के जंगल से गिरफ्तार कर पूछताछ की। उसने बताया कि उसके खूब सिंह की पत्नी से अवैध संबंध थे। इसकी जानकारी खूब सिंह को हो गई थी। इसके चलते उसने खूब सिंह की पत्नी सुषमा के कहने पर उसकी हत्या कर दी। विद्वान न्यायाधीश रईस अहमद ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष के वकील की दलीलों को सुनने के बाद वीरपाल और सुषमा को खूब सिंह की हत्या में दोषी पाया। दोनों को उम्र कैद और 21 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
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