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जिला अस्पताल से दवाएं हो रहीं ब्लैक, दो पर मुकदमा
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 15 Oct 2016 11:52 PM IST
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सरकारी दवा जिले भर में झोलाछाप को हो रही सप्लाई
एक बार फिर जिला अस्पताल से सरकारी दवाएं ब्लैक करने का भंडाफोड़ हुआ है। लंबे समय से सरकारी दवाओं की सप्लाई जिले भर में झोलाछाप को करके मुनाफा कमाया जा रहा था। भारी तादाद में सरकारी दवाएं पकड़े जाने के बाद दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। सीएमओ डॉ. सुनील कुमार ने दो सदस्यों की जांच कमेटी बना दी है। जांच रिपोर्ट आने बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अलापुर थाने की ककराला चौकी इंचार्ज राजीव कुमार ने शुक्रवार रात उपरैला गांव के पास से शक होने पर कादरचौक थाने के गांव जरासी निवासी सुनील सक्सेना को हिरासत में लिया था। उसकी तलाशी ली गई तो दो बैग में भरी हुई हजारों रुपये की दवाएं बरामद हुईं। शनिवार को पूरे मामले में पड़ताल की गई तो पता लगा कि यह दवाएं जिला अस्पताल की हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों के हक पर डाका डालकर अस्पताल के कर्मचारी इन दवाओं को अपने एजेंटों के जरिए गांव-देहात झोलाछाप को सप्लाई करा रहे थे।
शनिवार को पुलिस ने सुनील सक्सेना और जिला अस्पताल के बाबू नाम के कर्मचारी के खिलाफ अलापुर पुलिस ने दवाओं की चोरी और ब्लैक की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली। सुनील सक्सेना ने पूछताछ में बताया कि अस्पताल के कर्मचारी बाबू से ही वह दवाइयां खरीदता था। बाद में यह दवाइयां झोलाछाप को बेचता था। कई साल से वह यह काम कर रहा था।
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अस्पताल में कर्मचारी बन काम कर रहे कई बाहरी
बदायूं। जिला अस्पताल में कई बाहरी लोग कर्मचारी बन कर काम कर रहे हैं। यह न तो ठेका के कर्मचारी हैं और न संविदा या नियमित। इसके बावजूद जिला अस्पताल प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा। इमरजेंसी में कई ऐसे फार्मासिस्ट हैं जिनकी इंटर्नशिप कई साल पहले खत्म हो चुकी है। इसके बाद भी वह यहां काम कर रहे हैं। यह लोग मरीजों से वसूली करने के साथ दवाओं को भी ठिकाने लगा रहे हैं।
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इस तरह होता है दवाइयों का खेल
बदायूं। जिला अस्पताल में एक मुख्य स्टोर होने के साथ ओपीडी में दो दवा स्टोर है। मुख्य स्टोर से इन दोनों स्टोर को जो दवाइयां सप्लाई की जाती हैं उनका तीनों जगह रिकार्ड रहता है। वहीं मुख्य स्टोर से जिला अस्पताल के वार्डों और इमरजेंसी में सप्लाई होने वाली दवाइयों का कोई हिसाब नहीं रहता। इन्हीं दवाइयों को चोरी छिपे अस्पताल में काम कर रहे बाहरी लोग सप्लाई कर देते हैं। इन दवाओं को अस्पताल से बाहर झोलाछाप को बेच दिया जाता है।
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एसीएमओ और ड्रग इंस्पेक्टर करेंगे जांच
बदायूं। सीएमओ डॉ. सुनील सक्सेना ने बताया कि सरकारी दवाइयों की ब्लैक में कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसकी जांच कराई जाएगी। एसीएमओ नरेंद्र कुमार और औषधि निरीक्षक पवन कुमार को पूरे मामले में जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
एक बार फिर जिला अस्पताल से सरकारी दवाएं ब्लैक करने का भंडाफोड़ हुआ है। लंबे समय से सरकारी दवाओं की सप्लाई जिले भर में झोलाछाप को करके मुनाफा कमाया जा रहा था। भारी तादाद में सरकारी दवाएं पकड़े जाने के बाद दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। सीएमओ डॉ. सुनील कुमार ने दो सदस्यों की जांच कमेटी बना दी है। जांच रिपोर्ट आने बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अलापुर थाने की ककराला चौकी इंचार्ज राजीव कुमार ने शुक्रवार रात उपरैला गांव के पास से शक होने पर कादरचौक थाने के गांव जरासी निवासी सुनील सक्सेना को हिरासत में लिया था। उसकी तलाशी ली गई तो दो बैग में भरी हुई हजारों रुपये की दवाएं बरामद हुईं। शनिवार को पूरे मामले में पड़ताल की गई तो पता लगा कि यह दवाएं जिला अस्पताल की हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों के हक पर डाका डालकर अस्पताल के कर्मचारी इन दवाओं को अपने एजेंटों के जरिए गांव-देहात झोलाछाप को सप्लाई करा रहे थे।
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शनिवार को पुलिस ने सुनील सक्सेना और जिला अस्पताल के बाबू नाम के कर्मचारी के खिलाफ अलापुर पुलिस ने दवाओं की चोरी और ब्लैक की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली। सुनील सक्सेना ने पूछताछ में बताया कि अस्पताल के कर्मचारी बाबू से ही वह दवाइयां खरीदता था। बाद में यह दवाइयां झोलाछाप को बेचता था। कई साल से वह यह काम कर रहा था।
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अस्पताल में कर्मचारी बन काम कर रहे कई बाहरी
बदायूं। जिला अस्पताल में कई बाहरी लोग कर्मचारी बन कर काम कर रहे हैं। यह न तो ठेका के कर्मचारी हैं और न संविदा या नियमित। इसके बावजूद जिला अस्पताल प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा। इमरजेंसी में कई ऐसे फार्मासिस्ट हैं जिनकी इंटर्नशिप कई साल पहले खत्म हो चुकी है। इसके बाद भी वह यहां काम कर रहे हैं। यह लोग मरीजों से वसूली करने के साथ दवाओं को भी ठिकाने लगा रहे हैं।
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इस तरह होता है दवाइयों का खेल
बदायूं। जिला अस्पताल में एक मुख्य स्टोर होने के साथ ओपीडी में दो दवा स्टोर है। मुख्य स्टोर से इन दोनों स्टोर को जो दवाइयां सप्लाई की जाती हैं उनका तीनों जगह रिकार्ड रहता है। वहीं मुख्य स्टोर से जिला अस्पताल के वार्डों और इमरजेंसी में सप्लाई होने वाली दवाइयों का कोई हिसाब नहीं रहता। इन्हीं दवाइयों को चोरी छिपे अस्पताल में काम कर रहे बाहरी लोग सप्लाई कर देते हैं। इन दवाओं को अस्पताल से बाहर झोलाछाप को बेच दिया जाता है।
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एसीएमओ और ड्रग इंस्पेक्टर करेंगे जांच
बदायूं। सीएमओ डॉ. सुनील सक्सेना ने बताया कि सरकारी दवाइयों की ब्लैक में कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसकी जांच कराई जाएगी। एसीएमओ नरेंद्र कुमार और औषधि निरीक्षक पवन कुमार को पूरे मामले में जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।