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हे भगवान..., गहाई तो करने दो, खेत में बिखरी पड़ी है सरसों

Mon, 04 Mar 2019 12:06 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Mon, 04 Mar 2019 12:06 AM IST
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हे भगवान..., गहाई तो करने दो, खेत में बिखरी पड़ी है सरसों
उझानी (बदायूं)। शनिवार शाम को पहले बूंदाबांदी और फिर तेज बारिश रुक-रुककर रविवार सुबह तक होती रही। सुबह में किसान खेतों पर पहुंचे तो सरसों की फसल की हालत देख उनके चेहरे मुरझा गए। मुरझाते भी क्यों नहीं, उनके अरमान जो खेत में पड़े थे। बार-बार मौसम की मार का दंश झेल रहे किसानों के लिए सरसों की गहाई का मौका तक नहीं मिल पा रहा है। करीब 20 फीसदी नुकसान की आशंका के बीच किसानों पर संकट के बादल बरकरार हैं। ईश्वर से रहम की भीख मांगने के सिवाय कोई और विकल्प भी उनके सामने नहीं बचा है।
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सरसों की फसल पर मौसम की मार कोई दो-चार दिन से नहीं बल्कि महीना भर से पड़ रही है। कभी तेज हवा के झोंकों के साथ बारिश तो कभी आसमान से गिरीं मोटी-मोटी बूंदों ने सरसों को नुकसान पहुंचाने का काम किया। चूंकि अधिकांश रकबा में सरसों की फसल पककर कट चुकी है लेकिन उसकी गहाई का मौका किसानों को नहीं मिल पा रहा है। करीब 20 फीसदी किसान ही अभी तक गहाई कर पाए हैं। खेतों में कटी पड़ी सरसों की फलियों में दाने सड़ने के कगार पर पहुंच गए हैं तो कहीं-कहीं बारिश की बौछार में फलियां ही जवाब दे गईं। उनके दाने खेतों में बिखर गए हैं। उन्हें बटोर पाना मुश्किल है। बता दें कि इस बार सरसों की फसल शुरुआती दिनों से अच्छी दिखने लगी थी लेकिन किसानों का कहना है कि न जाने किसकी नजर उनके अरमानों को लग गई है। मौसम साफ नहीं हुआ तो सरसों को नुकसान काफी बढ़ जाएगा। रविवार सुबह में किसानों खेतों की ओर पहुंचे तो उन्हें इसका अहसास भी हो गया। खासकर सरसों उत्पादकों का कहना है कि दिक्कत कम होने का नाम ही नहीं ले रही है।
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गेहूं किसानों की ‘बल्ले-बल्ले’
उझानी। बूंदाबांदी और बारिश ने गेहूं की फसल से बंपर पैदावार के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। गेहूं पर हरियाली भी लौट आई है। गेहूं की स्थिति शुरू में खराब जरूर हुई थी लेकिन फरवरी के अंतिम सप्ताह से जो माहौल बना, उसने फसल को अच्छी स्थिति में पहुंचा दिया। किसानों की मानें तो गेहूं से ही उनके अरमान पूरे हो सकते हैं।
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बारिश होते रहने से सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। आलू की फसल भी कुछ हद तक चपेट में आई है लेकिन फिलहाल नुकसान ऐसा नहीं जो उत्पादन को प्रभावित कर सके। फिर भी आलू के खेतों में बारिश के पानी के निकास का बंदोबस्त कर देना चाहिए।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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