{"_id":"59e62b1b4f1c1bee688b62f5","slug":"51508256539-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कटरी की भूमि पर कब्जे से फूटा था खूनी रंजिश का अंकुर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कटरी की भूमि पर कब्जे से फूटा था खूनी रंजिश का अंकुर
Updated Tue, 17 Oct 2017 11:54 PM IST
विज्ञापन
मौके पर जमा भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उझानी (बदायूं। गंगा यूं तो जीवनदायिनी कहलाती है, लेकिन उसके प्रवाह से छूटी भूमि कटरी के सैकड़ों लोगों के लिए आजीविका का संसाधन बनती रही है। कुछ ऐसा ही हुसैनपुर खेड़ा के कश्यप और ठाकुर परिवार के साथ भी रहा। इसी भूमि पर कंब्जे को लेकर दोनों के बीच रंजिश का एक ऐसा अंकुर फूटा जो पनपता गया। पहले कश्यप परिवार के दयाराम का खून बहा फिर बदले में छुटकन ठाकुर को जान से हाथ धोना पड़ा। अब, मृतकों में दयाराम के भाई सुखपाल का भी नाम शामिल हो गया।
पूर्व प्रधान वीरेंद्र कश्यप और सेवानिवृत्त सैनिक पुरुषोत्तम उर्फ पप्पू ठाकुर के परिवार करीब एक दशक पहले तक आपस में मिल बैठकर एक-दूसरे सुख और दु:ख में शामिल हुआ करते थे। उन्हीं दिनों गंगा का प्रवाह दूसरी तरफ बढ़ा तो तलहटी में सैकड़ों बीघा भूमि छूट गई। गंगा किनारे की भूमि पालेज की खेती के लिए हमेशा से मुफीद रही है, सो दोनों में कब्जे की जंग छिड़ गई। उस वक्त ज्यादातर जमीन पूर्व प्रधान के परिवार के कब्जे में थी। रंजिश बढ़ी तो वर्ष-2008 में सबसे पहले पूर्व प्रधान के भाई दयाराम कश्यप रंजिश का पहला शिकार बना। छुटकन, धर्मपाल, नेकराम, नंदकिशोर, रामऔतार और रामभजन को नामजद कराया गया। खूनी खेल शुरू हुआ तो वर्ष-2014 में पूर्व प्रधान पक्ष ने छुटकन का मार डाला। छुटकन की हत्या में पूर्व प्रधान वीरेंद्र, खुपाल, पप्पू, गेंदललाल, होरीलाल, शिवलाल, बन्नी और रामनाथ का जेल जाना पड़ा। चूंकि वीरेंद्र समेत उसके सभी परिवार वाले जमानत पर बाहर हैं, सो दूसरे पक्ष ने मंगलवार सुखपाल का खून बहा कर छुटकन का बदला चुकता कर लिया। इस वक्त दोनों गुट के हिस्से में करीब 30 बीघा जमीन बताई गई है।
-----------
मृतक का भाई बोला, पुलिस चाहती तो बच जाता सुखपाल
उझानी। सुखपाल कश्यप की हत्या के बाद उसका छोटा भाई पप्पू ने चौकी इंचार्ज समेत पुलिस की कार्यशैली पर ऐसे सवाल उठाए, जिसे सुन पुलिस अफसर भी दंग रह गए। पप्पू ने बताया कि कई दिनों से हमलावर बदला लेने की फिराक में थे। यह बात उसने चौकी इंचार्ज को भी बताई थी लेकिन उन्होंने कभी गौर ही नहीं किया। शिकायत करने पर उसे डपट कर भगा दिया गया था। निरोधात्मक कार्रवाई के दौरान भी चौकी इंचार्ज ने उसके पक्ष के लोगों की संख्या दूसरे पक्ष के लोगों के मुकाबले ज्यादा रखी थी। पप्पू की मानें तो पिछले दिनों उसे और उसके परिवार के तीन सदस्यों को एसीस एक्ट में फंसा दिया गया। पूर्व प्रधान वीरेंद्र इस वक्त जेल में है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्व प्रधान वीरेंद्र कश्यप और सेवानिवृत्त सैनिक पुरुषोत्तम उर्फ पप्पू ठाकुर के परिवार करीब एक दशक पहले तक आपस में मिल बैठकर एक-दूसरे सुख और दु:ख में शामिल हुआ करते थे। उन्हीं दिनों गंगा का प्रवाह दूसरी तरफ बढ़ा तो तलहटी में सैकड़ों बीघा भूमि छूट गई। गंगा किनारे की भूमि पालेज की खेती के लिए हमेशा से मुफीद रही है, सो दोनों में कब्जे की जंग छिड़ गई। उस वक्त ज्यादातर जमीन पूर्व प्रधान के परिवार के कब्जे में थी। रंजिश बढ़ी तो वर्ष-2008 में सबसे पहले पूर्व प्रधान के भाई दयाराम कश्यप रंजिश का पहला शिकार बना। छुटकन, धर्मपाल, नेकराम, नंदकिशोर, रामऔतार और रामभजन को नामजद कराया गया। खूनी खेल शुरू हुआ तो वर्ष-2014 में पूर्व प्रधान पक्ष ने छुटकन का मार डाला। छुटकन की हत्या में पूर्व प्रधान वीरेंद्र, खुपाल, पप्पू, गेंदललाल, होरीलाल, शिवलाल, बन्नी और रामनाथ का जेल जाना पड़ा। चूंकि वीरेंद्र समेत उसके सभी परिवार वाले जमानत पर बाहर हैं, सो दूसरे पक्ष ने मंगलवार सुखपाल का खून बहा कर छुटकन का बदला चुकता कर लिया। इस वक्त दोनों गुट के हिस्से में करीब 30 बीघा जमीन बताई गई है।
विज्ञापन
-----------
मृतक का भाई बोला, पुलिस चाहती तो बच जाता सुखपाल
उझानी। सुखपाल कश्यप की हत्या के बाद उसका छोटा भाई पप्पू ने चौकी इंचार्ज समेत पुलिस की कार्यशैली पर ऐसे सवाल उठाए, जिसे सुन पुलिस अफसर भी दंग रह गए। पप्पू ने बताया कि कई दिनों से हमलावर बदला लेने की फिराक में थे। यह बात उसने चौकी इंचार्ज को भी बताई थी लेकिन उन्होंने कभी गौर ही नहीं किया। शिकायत करने पर उसे डपट कर भगा दिया गया था। निरोधात्मक कार्रवाई के दौरान भी चौकी इंचार्ज ने उसके पक्ष के लोगों की संख्या दूसरे पक्ष के लोगों के मुकाबले ज्यादा रखी थी। पप्पू की मानें तो पिछले दिनों उसे और उसके परिवार के तीन सदस्यों को एसीस एक्ट में फंसा दिया गया। पूर्व प्रधान वीरेंद्र इस वक्त जेल में है।
विज्ञापन