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युवक की हत्या कर लाश ठिकाने लगाने वाले को उम्रकैद
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बदायूं। मुकदमे की पैरवी के लिए आए युवक को बुलाकर ले जाने के बाद हत्या कर दी गई और लाश को ठिकाने लगा दिया। इस मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने एक को मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि तीन अन्य को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
सहसवान के गांव सादपुर निवासी ज्ञानचंद्र पुत्र अजुद्दी ने 30 नवंबर 2006 को रिपोर्ट लिखाई थी कि उसका भाई महीपाल 22 नवंबर 2006 को गांव के फतेह सिंह और प्रेमचंद्र के साथ बदायूं कचहरी गया था। शाम को फतेह सिंह और प्रेमचंद्र घर लौट आए लेकिन उसका भाई नहीं आया। तब उसने दोनों से पता किया। बताया कि सहसवान के गांव कुंआडांडा निवासी प्रकाश उर्फ बाबा पुत्र रामफल और इस्लाम के साथ वह गया है। वादी ज्ञानचंद्र ने प्रकाश उर्फ बाबा को फोन किया तो उसने कहा कि महीपाल को काम से भेजा है। एक-दो दिन में लौट आएगा। इसके बाद उसने भाई को काफी तलाशा पर वह नहीं मिला। 30 नवंबर को पास के गांव मुजाहिदपुर निवासी चरन सिंह ने बताया कि गांव पलिया और कृपिया के बीच एक व्यक्ति की लाश पड़ी है। मौके पर जाकर उसने कपड़ों और अंगूठी से भाई की लाश की शिनाख्त की। वादी ज्ञानचंद्र ने गांव के दिनेश, सत्यपाल, मदनलाल, कुंआडांडा के प्रकाश उर्फ बाबा, पलिया निवासी श्रीकृष्ण और बहवलपुर के इस्लाम के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने विवेचना के बाद प्रकाश उर्फ बाबा, दिनेश, सत्यपाल और मदनलाल के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद प्रकाश उर्फ बाबा को मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 11 हजार का जुर्माना भी डाला। बाकी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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सहसवान के गांव सादपुर निवासी ज्ञानचंद्र पुत्र अजुद्दी ने 30 नवंबर 2006 को रिपोर्ट लिखाई थी कि उसका भाई महीपाल 22 नवंबर 2006 को गांव के फतेह सिंह और प्रेमचंद्र के साथ बदायूं कचहरी गया था। शाम को फतेह सिंह और प्रेमचंद्र घर लौट आए लेकिन उसका भाई नहीं आया। तब उसने दोनों से पता किया। बताया कि सहसवान के गांव कुंआडांडा निवासी प्रकाश उर्फ बाबा पुत्र रामफल और इस्लाम के साथ वह गया है। वादी ज्ञानचंद्र ने प्रकाश उर्फ बाबा को फोन किया तो उसने कहा कि महीपाल को काम से भेजा है। एक-दो दिन में लौट आएगा। इसके बाद उसने भाई को काफी तलाशा पर वह नहीं मिला। 30 नवंबर को पास के गांव मुजाहिदपुर निवासी चरन सिंह ने बताया कि गांव पलिया और कृपिया के बीच एक व्यक्ति की लाश पड़ी है। मौके पर जाकर उसने कपड़ों और अंगूठी से भाई की लाश की शिनाख्त की। वादी ज्ञानचंद्र ने गांव के दिनेश, सत्यपाल, मदनलाल, कुंआडांडा के प्रकाश उर्फ बाबा, पलिया निवासी श्रीकृष्ण और बहवलपुर के इस्लाम के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने विवेचना के बाद प्रकाश उर्फ बाबा, दिनेश, सत्यपाल और मदनलाल के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद प्रकाश उर्फ बाबा को मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही 11 हजार का जुर्माना भी डाला। बाकी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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