{"_id":"5a3a8ac34f1c1bca678c2aa9","slug":"31513786051-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोटे के चक्कर में गांव-गांव हो रहा बवाल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कोटे के चक्कर में गांव-गांव हो रहा बवाल
Updated Wed, 20 Dec 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
लड़ाई के दौरान तमाशबीन बने लोग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। गांवों में हो रहे राशन कोटे के प्रस्ताव पुलिस-प्रशासन के लिए बवालेजान बन गए हैं। लगभग रोज ही किसी न किसी गांव में हंगामा और बवाल हो रहा है। इसमें अब तक पचास से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं तो एक की मौत हो चुकी है।
राशन कोटे के प्रस्ताव का बरसों पुराना तरीका ही बवाल की वजह बन रहा है। इसमें दूसरे चुनावों की तरह खामोशी से वोटिंग का प्रावधान नहीं है। बल्कि गांव के लोगों को सार्वजनिक सभा में शिरकत करके अपने दावेदार के पक्ष में हाथ उठाने होते हैं। जिसके पक्ष में जितने ज्यादा हाथ उठते हैं, वही कोटेदार चुना जाता है। ऐसे में सामने ही दुश्मन और दोस्त का पता चल जाता है और कई जगह तो मौके पर ही खींचतान और मारपीट शुरू हो जाती है। इसी विसंगति की वजह से कई गांवों में दबंग लोग कोटेदार बन जाते हैं क्योंकि सार्वजनिक रूप से उनका विरोध करने की हिम्मत ग्रामीण नहीं करते। बाद में यही लोग ग्रामीणों के हिस्से का अनाज हजम भी कर जाते हैं और कोई उफ तक नहीं करता। अलापुर के उपराला में झगड़े की यही वजह रही कि खुद को जातीय आधार पर मजबूत मान रहे पक्ष ने जब दूसरे पक्ष के साथ ज्यादा लोग देखे तो खींचतान शुरू कर दी। नतीजा बवाल के रूप में सामने आया। दो दिन पहले उघैती थाने के गांव चाचीपुर में कोटा बैठक के दौरान मारपीट हुई थी। तीन दिन पहले दातागंज के बसेला में प्रस्ताव टलवाने को जब एक पक्ष एसडीएम के पास गया तो दूसरा पक्ष भी ट्रॉलियों से निकल पड़ा। इनमें ट्रॉली पलटने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि करीब तीस लोग घायल हो गए थे।
-----------------
बवाल बढ़ा तो छावनी बन गया उपराला
बदायूं। उपराला गांव में करीब दो हजार वोट हैं। जनसंख्या के आधार पर बड़े गांव में करीब आधी आबादी लोधे राजपूत बिरादरी की है तो बाकी आधे में दूसरी जातियों के लोग हैं। बहोरनलाल इसी संख्याबल के भरोसे अपनी जीत की दावेदारी जता रहे थे। वहीं रामगोपाल शाक्य ने दूसरी जातियों को मिलाकर पर्याप्त संख्याबल एकत्र कर लिया। दोनों पक्षों को जब अपने संख्या बल से दूसरा ज्यादा मजबूत लगा तो झगड़ा कर लिया। घटना के बाद दोनों ही एकदूसरे पर झगड़ा शुरू कराने का आरोप लगा रहे थे। रामगोपाल ने नौ लोगों को नामजद और कुछ को अज्ञात दिखाते हुए तो बहोरनलाल ने चार को नामजद कराते हुए रिपोर्ट कराई है। घटना की सूचना मिलते ही थोड़ी देर में आसपास के उसावां, उसहैत और हजरतपुर थाने से भी फोर्स पहुंच गया। पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस और यूपी 100 गाड़ियों से जिला अस्पताल भिजवाया।
विज्ञापन
-------------------------
संपूर्ण समाधान दिवस में कोटेदार के खिलाफ प्रदर्शन
बिसौली। भुसाया के ग्रामीणों ने राशन कोटेदार के खिलाफ तहसील दिवस में प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की। तहसील क्षेत्र के ग्राम भुसाया के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोटेदार राशन वितरण के बजाय ब्लैक कर रहा है। पात्रों को राशन देने के बजाए अभद्र व्यवहार किया जाता है। वहीं बार बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इस गांव के दो दर्जन से अधिक ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर संपूर्ण समाधान दिवस तक आए और काफी देर तक प्रदर्शन किया। इसके बाद डीएम को अपनी समस्या बताकर कार्रवाई की मांग की। डीएम ने मामले को जिला पूर्ति अधिकारी को सौंप दिया। शिकायत व प्रदर्शन करने वालों में राहुल शंखधार, रहीस अहमद, जान मोहम्मद, प्रमोद, सरिता, संतोष, नेमवती, चयना देवी, सीमा अमरवती, मुंशी, पुष्पा, कमलेश आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
राशन कोटे के प्रस्ताव का बरसों पुराना तरीका ही बवाल की वजह बन रहा है। इसमें दूसरे चुनावों की तरह खामोशी से वोटिंग का प्रावधान नहीं है। बल्कि गांव के लोगों को सार्वजनिक सभा में शिरकत करके अपने दावेदार के पक्ष में हाथ उठाने होते हैं। जिसके पक्ष में जितने ज्यादा हाथ उठते हैं, वही कोटेदार चुना जाता है। ऐसे में सामने ही दुश्मन और दोस्त का पता चल जाता है और कई जगह तो मौके पर ही खींचतान और मारपीट शुरू हो जाती है। इसी विसंगति की वजह से कई गांवों में दबंग लोग कोटेदार बन जाते हैं क्योंकि सार्वजनिक रूप से उनका विरोध करने की हिम्मत ग्रामीण नहीं करते। बाद में यही लोग ग्रामीणों के हिस्से का अनाज हजम भी कर जाते हैं और कोई उफ तक नहीं करता। अलापुर के उपराला में झगड़े की यही वजह रही कि खुद को जातीय आधार पर मजबूत मान रहे पक्ष ने जब दूसरे पक्ष के साथ ज्यादा लोग देखे तो खींचतान शुरू कर दी। नतीजा बवाल के रूप में सामने आया। दो दिन पहले उघैती थाने के गांव चाचीपुर में कोटा बैठक के दौरान मारपीट हुई थी। तीन दिन पहले दातागंज के बसेला में प्रस्ताव टलवाने को जब एक पक्ष एसडीएम के पास गया तो दूसरा पक्ष भी ट्रॉलियों से निकल पड़ा। इनमें ट्रॉली पलटने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि करीब तीस लोग घायल हो गए थे।
विज्ञापन
-----------------
बवाल बढ़ा तो छावनी बन गया उपराला
बदायूं। उपराला गांव में करीब दो हजार वोट हैं। जनसंख्या के आधार पर बड़े गांव में करीब आधी आबादी लोधे राजपूत बिरादरी की है तो बाकी आधे में दूसरी जातियों के लोग हैं। बहोरनलाल इसी संख्याबल के भरोसे अपनी जीत की दावेदारी जता रहे थे। वहीं रामगोपाल शाक्य ने दूसरी जातियों को मिलाकर पर्याप्त संख्याबल एकत्र कर लिया। दोनों पक्षों को जब अपने संख्या बल से दूसरा ज्यादा मजबूत लगा तो झगड़ा कर लिया। घटना के बाद दोनों ही एकदूसरे पर झगड़ा शुरू कराने का आरोप लगा रहे थे। रामगोपाल ने नौ लोगों को नामजद और कुछ को अज्ञात दिखाते हुए तो बहोरनलाल ने चार को नामजद कराते हुए रिपोर्ट कराई है। घटना की सूचना मिलते ही थोड़ी देर में आसपास के उसावां, उसहैत और हजरतपुर थाने से भी फोर्स पहुंच गया। पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस और यूपी 100 गाड़ियों से जिला अस्पताल भिजवाया।
विज्ञापन
-------------------------
संपूर्ण समाधान दिवस में कोटेदार के खिलाफ प्रदर्शन
बिसौली। भुसाया के ग्रामीणों ने राशन कोटेदार के खिलाफ तहसील दिवस में प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की। तहसील क्षेत्र के ग्राम भुसाया के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोटेदार राशन वितरण के बजाय ब्लैक कर रहा है। पात्रों को राशन देने के बजाए अभद्र व्यवहार किया जाता है। वहीं बार बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इस गांव के दो दर्जन से अधिक ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर संपूर्ण समाधान दिवस तक आए और काफी देर तक प्रदर्शन किया। इसके बाद डीएम को अपनी समस्या बताकर कार्रवाई की मांग की। डीएम ने मामले को जिला पूर्ति अधिकारी को सौंप दिया। शिकायत व प्रदर्शन करने वालों में राहुल शंखधार, रहीस अहमद, जान मोहम्मद, प्रमोद, सरिता, संतोष, नेमवती, चयना देवी, सीमा अमरवती, मुंशी, पुष्पा, कमलेश आदि शामिल रहे।