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दो बंदी रक्षकों पर गिरी गाज, सस्पेंड
Updated Sun, 13 May 2018 10:36 PM IST
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दो बंदी रक्षकों पर गिरी गाज, सस्पेंड
अस्पताल और दो नंबर बैरक पर थे तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला कारगार से बंदी फरार होने के मामले में दो बंदी रक्षकों पर गाज गिर गई। प्राथमिक जांच में दोनों बंदी रक्षक दोषी पाए गए हैं। उनको तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इधर, बंदी फरार होने के मामले में जेल अधीक्षक कैलाश पति त्रिपाठी की तहरीर पर दो बंदियों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
जेल अधीक्षक कैलाश पति त्रिपाठी के मुताबिक बंदी रक्षक भगवान शरण दीक्षित की अस्पताल बैरक पर ड्यूटी थी। इसी बैरक में कुख्यात अपराधी देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह पेट दर्द का बहाना बनाकर भर्ती था। जबकि बंदी रक्षक विजय कुमार की दो नंबर बैरक में ड्यूटी थी, जिसमें विचाराधीन बंदी सुमित बंद था। घटना शनिवार रात करीब पौने आठ बजे की है। उस समय बैरक नंबर 12 और 13 बंद हो चुके थे। बाकी बैरक बंद हो रहे थे। तभी दोनों बंदी रक्षकों की लापरवाही से दोनों बंदी अपनी-अपनी बैरकों से निकल कर भाग गए। इन्हें बंदियों के निकलने का पता ही नहीं चला। जेल अधीक्षक कैलाश पति त्रिपाठी ने बताया कि उनकी प्राथमिक जांच में दोनों बंदी रक्षक दोषी पाए गए हैं। इसलिए दोनों को निलंबित कर दिया गया है। डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने जेल अधिकारियों, बंदी रक्षकों समेत 1699 कैदियों के बयान लिए। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। उन्होंने इस मामले की जांच रिपोर्ट सीधे शासन को भेजने की बात कही है।
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अस्पताल और दो नंबर बैरक पर थे तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिला कारगार से बंदी फरार होने के मामले में दो बंदी रक्षकों पर गाज गिर गई। प्राथमिक जांच में दोनों बंदी रक्षक दोषी पाए गए हैं। उनको तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। इधर, बंदी फरार होने के मामले में जेल अधीक्षक कैलाश पति त्रिपाठी की तहरीर पर दो बंदियों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
जेल अधीक्षक कैलाश पति त्रिपाठी के मुताबिक बंदी रक्षक भगवान शरण दीक्षित की अस्पताल बैरक पर ड्यूटी थी। इसी बैरक में कुख्यात अपराधी देवकी नंदन उर्फ चंदन सिंह पेट दर्द का बहाना बनाकर भर्ती था। जबकि बंदी रक्षक विजय कुमार की दो नंबर बैरक में ड्यूटी थी, जिसमें विचाराधीन बंदी सुमित बंद था। घटना शनिवार रात करीब पौने आठ बजे की है। उस समय बैरक नंबर 12 और 13 बंद हो चुके थे। बाकी बैरक बंद हो रहे थे। तभी दोनों बंदी रक्षकों की लापरवाही से दोनों बंदी अपनी-अपनी बैरकों से निकल कर भाग गए। इन्हें बंदियों के निकलने का पता ही नहीं चला। जेल अधीक्षक कैलाश पति त्रिपाठी ने बताया कि उनकी प्राथमिक जांच में दोनों बंदी रक्षक दोषी पाए गए हैं। इसलिए दोनों को निलंबित कर दिया गया है। डीआईजी जेल शशि श्रीवास्तव ने जेल अधिकारियों, बंदी रक्षकों समेत 1699 कैदियों के बयान लिए। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है। उन्होंने इस मामले की जांच रिपोर्ट सीधे शासन को भेजने की बात कही है।
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