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बदायूं के श्रद्घालुओं को नेपाल में दुकानदारों ने पीटा
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उझानी (बदायूं)। नेपाल के सिद्घबाबा मंदिर के दर्शन करके लौट रहे बदायूं और एटा जिले के तीन परिवारों के श्रद्घालुओं को मंदिर के पास के दुकानदारों ने मामूली बात पर पीट दिया। बाद में नेपाल पुलिस से उन्हें पकड़वा भी दिया। सूचना पर पहुंचे एसएसबी के अफसर, जवानों ने सभी श्रद्धालुओं को मुक्त कराकर टनकपुर के पास तक पहुंचाया।
कछला निवासी संजय कश्यप, गौंटिया निवासी उसके साढू नरेश और एटा निवासी बहनोई मुकेश के परिवार के करीब 25 सदस्य पूर्णागिरि दर्शन करके रविवार को नेपाल में सिद्घबाबा मंदिर पहुंचे थे। लौटते वक्त उन्होंने मार्केट से कपड़े और घरेलू सामान खरीदा। बकौल संजय, उसके बहनोई मुकेश ने एक दुकान से चादर खरीदी थी। दुकानदार ने चादर का साइज ढाई मीटर बताया लेकिन नपवाने पर कम निकला। विरोध करने पर दुकानदार भड़क गया और मुकेश, उसके दो बच्चों से हाथापाई, मारपीट कर दी। उसके बाद नेपाल पुलिस को बुलाकर उन्हें पकड़वा भी दिया। महिलाएं किसी तरह सीमा सुरक्षा बल के चेकपोस्ट पर पहुंच गईं। उन्होंने जवानों से मदद मांगी। उनकी गुहार सुनकर एसएसबी के मेजर राजेंद्र सिंह जवानों को लेकर मार्केट पहुंचे और नेपाल पुलिस के चंगुल से श्रद्घालुओं को मुक्त करा दिया। जवानों ने ही उन्हें टनकपुर तक पहुचाया। सोमवार शाम घर लौटे संजय ने बताया कि नेपाली दुकानदारों और नेपाल पुलिस ने उनसे बदसलूकी की।
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कछला निवासी संजय कश्यप, गौंटिया निवासी उसके साढू नरेश और एटा निवासी बहनोई मुकेश के परिवार के करीब 25 सदस्य पूर्णागिरि दर्शन करके रविवार को नेपाल में सिद्घबाबा मंदिर पहुंचे थे। लौटते वक्त उन्होंने मार्केट से कपड़े और घरेलू सामान खरीदा। बकौल संजय, उसके बहनोई मुकेश ने एक दुकान से चादर खरीदी थी। दुकानदार ने चादर का साइज ढाई मीटर बताया लेकिन नपवाने पर कम निकला। विरोध करने पर दुकानदार भड़क गया और मुकेश, उसके दो बच्चों से हाथापाई, मारपीट कर दी। उसके बाद नेपाल पुलिस को बुलाकर उन्हें पकड़वा भी दिया। महिलाएं किसी तरह सीमा सुरक्षा बल के चेकपोस्ट पर पहुंच गईं। उन्होंने जवानों से मदद मांगी। उनकी गुहार सुनकर एसएसबी के मेजर राजेंद्र सिंह जवानों को लेकर मार्केट पहुंचे और नेपाल पुलिस के चंगुल से श्रद्घालुओं को मुक्त करा दिया। जवानों ने ही उन्हें टनकपुर तक पहुचाया। सोमवार शाम घर लौटे संजय ने बताया कि नेपाली दुकानदारों और नेपाल पुलिस ने उनसे बदसलूकी की।
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