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तीमारदार और स्टाफ में हुई कहासुनी, तो थमाया बर्खास्तगी का लेटर
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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में तैनात स्टाफ नर्स गुरुवार को अपने रूम में ड्यूटी कर रहा था। उसी दौरान एक तीमारदार की किसी बात को लेकर स्टाफ नर्स (पुरुष) से उलझ गया। इसके बाद में तीमारदार वहां से चला गया, लेकिन कुछ देर बाद आकर उसने स्टाफ नर्स को उसकी बर्खास्तगी का लेटर थमा दिया। परेशान हाल में वह अन्य स्टाफ नर्स के साथ शुक्रवार को कॉलेज प्रशासन से मिला तो कॉलेज प्रशासन ने उसे बताया कि लेटर फर्जी है। यह जानकर स्टाफ नर्स की जान में जान आई।
गुरुवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज में रोजाना की तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा था। इसी दौरान एक तीमारदार अपने मरीज के साथ बाल रोग विभाग पहुंचा और वहां पर तैनात स्टाफ नर्स विजय से किसी बात को लेकर उलझा गया। दोनों में कहासुनी होने लगी, जिस पर मौके पर मौजूद लोगों ने मामले को शांत कराया, लेकिन तीमारदार किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था। जाते-जाते वह वहां पर तैनात स्टाफ नर्स को चेतावनी देते हुए गया कि उसकी जान-पहचान सत्ता पक्ष के नेताओं से है और वह अब उसे नौकरी नहीं करने देगा। उसके जाने के बाद में विजय अन्य मरीजों के काम में लगा गया। करीब पौन घंटे बाद वह तीमारदार फिर से कॉलेज में आया और विजय के हाथ में एक लेटर थमाकर चला गया। विजय ने जब लेटर खोलकर देखा तो वह उसकी बर्खास्तगी का था। यह देखकर चौंक पड़ा। लेटर मिलने के बाद में विजय परेशान होकर बैठ गया। दिन की ड्यूटी पूरी होने के बाद में वह घर चला गया। शुक्रवार को वह कॉलेज आया, तो अन्य स्टाफ से इसकी चर्चा की। इसके बाद सभी लोग एकत्र होकर अपनी बात रखने के लिए कॉलेज प्रशासन के पास गए। प्रशासनिक टीम ने जब वह लेटर देखा तो बताया कि लेटर फर्जी है और उन्होंने ऐसा कोई लेटर जारी नहीं किया है। यह सुनकर विजय को राहत मिली।
एक स्टाफ नर्स को एक व्यक्ति ने लेटर दे दिया था।, जिसमें उसे कॉलेज से निकालने की बात कही गई थी। ये लेटर फर्जी था। कॉलेज प्रशासन की ओर से ऐसा कोई लेटर किसी को जारी नहीं किया गया है।
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- डॉ. आरपी सिंह, राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं
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गुरुवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज में रोजाना की तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा था। इसी दौरान एक तीमारदार अपने मरीज के साथ बाल रोग विभाग पहुंचा और वहां पर तैनात स्टाफ नर्स विजय से किसी बात को लेकर उलझा गया। दोनों में कहासुनी होने लगी, जिस पर मौके पर मौजूद लोगों ने मामले को शांत कराया, लेकिन तीमारदार किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था। जाते-जाते वह वहां पर तैनात स्टाफ नर्स को चेतावनी देते हुए गया कि उसकी जान-पहचान सत्ता पक्ष के नेताओं से है और वह अब उसे नौकरी नहीं करने देगा। उसके जाने के बाद में विजय अन्य मरीजों के काम में लगा गया। करीब पौन घंटे बाद वह तीमारदार फिर से कॉलेज में आया और विजय के हाथ में एक लेटर थमाकर चला गया। विजय ने जब लेटर खोलकर देखा तो वह उसकी बर्खास्तगी का था। यह देखकर चौंक पड़ा। लेटर मिलने के बाद में विजय परेशान होकर बैठ गया। दिन की ड्यूटी पूरी होने के बाद में वह घर चला गया। शुक्रवार को वह कॉलेज आया, तो अन्य स्टाफ से इसकी चर्चा की। इसके बाद सभी लोग एकत्र होकर अपनी बात रखने के लिए कॉलेज प्रशासन के पास गए। प्रशासनिक टीम ने जब वह लेटर देखा तो बताया कि लेटर फर्जी है और उन्होंने ऐसा कोई लेटर जारी नहीं किया है। यह सुनकर विजय को राहत मिली।
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एक स्टाफ नर्स को एक व्यक्ति ने लेटर दे दिया था।, जिसमें उसे कॉलेज से निकालने की बात कही गई थी। ये लेटर फर्जी था। कॉलेज प्रशासन की ओर से ऐसा कोई लेटर किसी को जारी नहीं किया गया है।
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- डॉ. आरपी सिंह, राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं