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न रजिस्ट्रेशन न लाइसेंस डॉक्टर नहीं कर्मचारी कर रहे थे इलाज
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बदायूं। लावेला चौक के नजदीक स्थित भगवान दास साहू मेमोरियल हॉस्पिटल को मंगलवार शाम सील कर दिया गया। हॉस्पिटल बगैर रजिस्ट्रेशन चल रहा था। उसके अंदर पैथोलॉजी लैब भी फर्जी तरह से बगैर रजिस्ट्रेशन चलाई जा रही थी। न तो उसमें कोई डॉक्टर मिला और न ही कोई लैब टेक्नीशियन था, जबकि हॉस्पिटल में लगातार मरीजों को भर्ती किया जा रहा था। एक मरीज भर्ती पाया भी गया, जिसका इलाज अस्पताल के कर्मचारी कर रहे थे।
भगवान दास साहू मेमोरियल हॉस्पिटल में मंगलवार को छापा मारा गया। डीएम दिनेश कुमार सिंह के आदेश पर सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सिटी मजिस्ट्रेट केके अवस्थी, एसीएमओ डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. कौशल गुप्ता पुलिस बल के साथ हॉस्पिटल पहुंचे। उस समय हॉस्पिटल में ककराला निवासी रागिनी पत्नी गौरव भर्ती थीं। उन्हें उल्टियां हो रहीं थीं। हॉस्पिटल में कोई डॉक्टर नहीं था। सिर्फ चार-पांच लड़के और दो लड़कियां हॉस्पिटल चला रहीं थीं। उस वक्त हॉस्पिटल में कोई कागज देखने को नहीं मिला। बाद में आए रजिस्ट्रेशन प्रपत्र ने हॉस्पिटल की पोल खोल दी। हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन तीन नंवबर 2018 को हुआ था और 31 मार्च 2019 को उसकी अवधि समाप्त हो गई। तब से लेकर अब तक लगातार हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती किया जा रहा था। बाकायदा उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा था लेकिन डॉक्टर के नाम पर कोई व्यक्ति हॉस्पिटल में मौजूद नहीं था। जनरल वार्ड में आठ बेड पड़े मिले। हॉस्पिटल में एक पैथोलॉजी लैब भी चल रही थी, जिसका न तो रजिस्ट्रेशन था और न ही लैब टेक्नीशियन मिला। कुछ युवक फर्जी तरह से खून की जांचें करते पाए गए।
इस छापामारी के दौरान हॉस्पिटल पहुंचे डॉ. गफ्फार सिद्दीकी ने बताया कि वह सिर्फ दो घंटे बैठते हैं। उसके बाद डॉ. राकेश कुमार चक्रवर्ती देखते हैं। सीएमओ और सिटी मजिस्ट्रेट ने मरीजों के साथ इसे खिलवाड़ मानते हुए कहा कि यहां बगैर डॉक्टर के इलाज हो रहा है। बगैर डिग्री वालों के हवाले मरीजों की जिंदगी है। ऐसे में किसी हाल में माफ नहीं किया जाएगा। उसके बाद हॉस्पिटल को ताले डालकर सील कर दिया गया।
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भगवान दास साहू मेमोरियल हॉस्पिटल फर्जी तरह से चल रहा था। उसका रजिस्ट्रेशन नहीं था और उसकी लैब भी फर्जी तरह से चलती पाई गई। कोई डॉक्टर नहीं मिला, इससे हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ
हां, मुझे शिकायत मौखिक रूप से किसी ने की थी, जिस पर सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ और पुलिस को मौके पर भेज कर जांच कराई गई। अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चलता हुआ पाया गया और पैथोलॉजी लैब भी बिना लाइसेंस के चल रही थी। इसके अलावा भी और बहुत कमियां थीं। इस कारण अस्पताल को सील किया गया है। अभी नगर मजिस्ट्रेट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई हैं। रिपोर्ट प्राप्त होते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दिनेश कुमार सिंह, डीएम
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भगवान दास साहू मेमोरियल हॉस्पिटल में मंगलवार को छापा मारा गया। डीएम दिनेश कुमार सिंह के आदेश पर सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सिटी मजिस्ट्रेट केके अवस्थी, एसीएमओ डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. कौशल गुप्ता पुलिस बल के साथ हॉस्पिटल पहुंचे। उस समय हॉस्पिटल में ककराला निवासी रागिनी पत्नी गौरव भर्ती थीं। उन्हें उल्टियां हो रहीं थीं। हॉस्पिटल में कोई डॉक्टर नहीं था। सिर्फ चार-पांच लड़के और दो लड़कियां हॉस्पिटल चला रहीं थीं। उस वक्त हॉस्पिटल में कोई कागज देखने को नहीं मिला। बाद में आए रजिस्ट्रेशन प्रपत्र ने हॉस्पिटल की पोल खोल दी। हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन तीन नंवबर 2018 को हुआ था और 31 मार्च 2019 को उसकी अवधि समाप्त हो गई। तब से लेकर अब तक लगातार हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती किया जा रहा था। बाकायदा उन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा था लेकिन डॉक्टर के नाम पर कोई व्यक्ति हॉस्पिटल में मौजूद नहीं था। जनरल वार्ड में आठ बेड पड़े मिले। हॉस्पिटल में एक पैथोलॉजी लैब भी चल रही थी, जिसका न तो रजिस्ट्रेशन था और न ही लैब टेक्नीशियन मिला। कुछ युवक फर्जी तरह से खून की जांचें करते पाए गए।
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इस छापामारी के दौरान हॉस्पिटल पहुंचे डॉ. गफ्फार सिद्दीकी ने बताया कि वह सिर्फ दो घंटे बैठते हैं। उसके बाद डॉ. राकेश कुमार चक्रवर्ती देखते हैं। सीएमओ और सिटी मजिस्ट्रेट ने मरीजों के साथ इसे खिलवाड़ मानते हुए कहा कि यहां बगैर डॉक्टर के इलाज हो रहा है। बगैर डिग्री वालों के हवाले मरीजों की जिंदगी है। ऐसे में किसी हाल में माफ नहीं किया जाएगा। उसके बाद हॉस्पिटल को ताले डालकर सील कर दिया गया।
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भगवान दास साहू मेमोरियल हॉस्पिटल फर्जी तरह से चल रहा था। उसका रजिस्ट्रेशन नहीं था और उसकी लैब भी फर्जी तरह से चलती पाई गई। कोई डॉक्टर नहीं मिला, इससे हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ
हां, मुझे शिकायत मौखिक रूप से किसी ने की थी, जिस पर सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ और पुलिस को मौके पर भेज कर जांच कराई गई। अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चलता हुआ पाया गया और पैथोलॉजी लैब भी बिना लाइसेंस के चल रही थी। इसके अलावा भी और बहुत कमियां थीं। इस कारण अस्पताल को सील किया गया है। अभी नगर मजिस्ट्रेट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई हैं। रिपोर्ट प्राप्त होते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दिनेश कुमार सिंह, डीएम