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दाखिले के लिए परिवार वालों ने कम राशि दी तो देदी जान
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बदायूं/बिल्सी। बिल्सी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 18 वर्षीय छात्र ने फंदे से लटककर जान दे दी। परिवार वालों के मुताबिक उसने पिछले वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा नहीं दी थी। अब वह दोबारा दाखिले के लिए राशि मांग रहा था। परिजन ने कहा कि वह आधी फीस अभी जमा कर दे, पूरी बाद में जमा कर देना। इसी बात से नाराज होकर उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
एक गांव निवासी छात्र मंगलवार सुबह अचानक घर से चला गया। परिवार वालों के मुताबिक पूर्वाह्न करीब 11 बजे गांव के कुछ लोग खेतों की ओर पहुंचे। तभी उन्होंने उसका शव एक पेड़ से फंदे से लटका देखा। सूचना पर परिवार वाले और गांव के तमाम लोग पहुंच गए। परिवार वालों ने ग्रामीणों की मदद से छात्र के शव को फंदे से उतार लिया। कुछ देर बाद थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस के जानकारी लेने पर परिवार वालों ने बताया कि उक्त युवक पिछले साल हाईस्कूल की परीक्षा नहीं दे पाया था। इस बार तीन-चार दिन से वह दोबारा हाईस्कूल में प्रवेश लेने की बात कह रहा था। दाखिले के लिए राशि मांग रहा था। परिवार वालों ने फिलहाल राशि न होने पर आधी फीस देने की बात कही, इससे वह नाराज हो गया। उसने सोमवार शाम अपना मोबाइल तोड़ दिया। मंगलवार सुबह करीब दस बजे घर से उठकर चला गया। सूचना पर सीओ बिल्सी श्याम नारायन भी पहुंच गए। पुलिस ने दोपहर के समय उसके शव का पोस्टमार्टम करा दिया।
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बिल्सी के एक गांव में एक छात्र ने फंदे से लटककर आत्महत्या की है। जानकारी पर पता चला है कि वह हाईस्कूल की परीक्षा नहीं दे पाया था। वह दोबारा प्रवेश लेना चाहता था। फीस को लेकर युवक ने नाराज होकर जान दी है। उसके शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया है।
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- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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मनोवैज्ञानिक का नजरिया
यह वह उम्र होती है जहां बच्चा किशोरावस्था से युवावस्था पर कदम रख रहा होता है। ऐसी दशा में मस्तिष्क पूरी तरह से परिपक्व नहीं होता इसलिए परिवार वालों को इस उम्र में अपने बच्चों का खास ख्याल रखना चाहिए। उनकी पूरी बात समझना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं। यदि परिवार वालों के सामने कोई विषम परिस्थिति है तो उससे भी बच्चे को अवगत कराकर उसे समझाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि अक्सर बच्चे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति से भी अनजान रहते हैं। किशोरवय से युवावस्था में शारीरिक समेत तमाम मानसिक परिवर्तन होते हैं, ऐसे में उनके मनोभावों को समझने का प्रयास भी परिवार वालों को समय-समय पर करते रहना चाहिए।
- डॉ. सर्वेश कुुमारी, क्लीनिकल साइाकोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल
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एक गांव निवासी छात्र मंगलवार सुबह अचानक घर से चला गया। परिवार वालों के मुताबिक पूर्वाह्न करीब 11 बजे गांव के कुछ लोग खेतों की ओर पहुंचे। तभी उन्होंने उसका शव एक पेड़ से फंदे से लटका देखा। सूचना पर परिवार वाले और गांव के तमाम लोग पहुंच गए। परिवार वालों ने ग्रामीणों की मदद से छात्र के शव को फंदे से उतार लिया। कुछ देर बाद थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस के जानकारी लेने पर परिवार वालों ने बताया कि उक्त युवक पिछले साल हाईस्कूल की परीक्षा नहीं दे पाया था। इस बार तीन-चार दिन से वह दोबारा हाईस्कूल में प्रवेश लेने की बात कह रहा था। दाखिले के लिए राशि मांग रहा था। परिवार वालों ने फिलहाल राशि न होने पर आधी फीस देने की बात कही, इससे वह नाराज हो गया। उसने सोमवार शाम अपना मोबाइल तोड़ दिया। मंगलवार सुबह करीब दस बजे घर से उठकर चला गया। सूचना पर सीओ बिल्सी श्याम नारायन भी पहुंच गए। पुलिस ने दोपहर के समय उसके शव का पोस्टमार्टम करा दिया।
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बिल्सी के एक गांव में एक छात्र ने फंदे से लटककर आत्महत्या की है। जानकारी पर पता चला है कि वह हाईस्कूल की परीक्षा नहीं दे पाया था। वह दोबारा प्रवेश लेना चाहता था। फीस को लेकर युवक ने नाराज होकर जान दी है। उसके शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया है।
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- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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मनोवैज्ञानिक का नजरिया
यह वह उम्र होती है जहां बच्चा किशोरावस्था से युवावस्था पर कदम रख रहा होता है। ऐसी दशा में मस्तिष्क पूरी तरह से परिपक्व नहीं होता इसलिए परिवार वालों को इस उम्र में अपने बच्चों का खास ख्याल रखना चाहिए। उनकी पूरी बात समझना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं। यदि परिवार वालों के सामने कोई विषम परिस्थिति है तो उससे भी बच्चे को अवगत कराकर उसे समझाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि अक्सर बच्चे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति से भी अनजान रहते हैं। किशोरवय से युवावस्था में शारीरिक समेत तमाम मानसिक परिवर्तन होते हैं, ऐसे में उनके मनोभावों को समझने का प्रयास भी परिवार वालों को समय-समय पर करते रहना चाहिए।
- डॉ. सर्वेश कुुमारी, क्लीनिकल साइाकोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल