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एप अपलोड कराया और महिला के खाते से उड़ा दिए 1.69 लाख
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उझानी (बदायूं)। मोबाइल पर बात कर साइबर ठग ने फुलासी गांव की आशा कुमारी को 1.69 लाख रुपये का चूना लगा दिया। खुद को बैंक अफसर बताकर उसने पहले एक एप अपलोड कराया, फिर छह बार में उसके खाते से दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर कर दी गई। बाद में आशा ने बार-बार मेसेज आने पर अपना मोबाइल नंबर स्विच ऑफ कर खाते में मौजूद बाकी रकम बचा ली।
स्वास्थ्य कर्मी आशा कुमारी कोतवाली क्षेत्र के गांव फुलासी निवासी अरविंद कुमार की पत्नी है। उसका खाता एसबीआई में है। बकौल अरविंद, मामला 11 मई का है। उस दिन आशा के मोबाइल नंबर पर किसी ने कॉल करके खुद को बैंक का अफसर बताया। बैंक से जुड़ी जानकारियों को लेकर बात करते हुए उसने आशा से मोबाइल पर एनीडेस्क एप अपलोड करने का कहा। एप अपलोड करने के बाद उसने खाता नंबर पूछ लिया। इसके कुछ देर बाद ही आशा के मोबाइल पर धीरे-धीरे छह मेसेज आए। वह मेसेज देखकर कुछ समझ पातीं, उससे पहले ही 1.69 लाख रुपये खाते से किसी अन्य खाते में ट्रांसफर हो गए।
वितरोई में तैनात आशा ने फोन करके पति अरविंद को अवगत कराया फिर अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। बाद में अरविंद और आशा बैंक पहुंचे। उन्होंने बैंक कर्मियों को भी जानकारी दे दी। बैंक कर्मियों ने इसे फ्रॉड बताकर महिला को इस तरह की बातों से बचने की सलाह दी। इसके बाद आशा ने कार्रवाई के लिए पुलिस की साइबर सेल में भी गुहार लगाई। तब से वह इधर-उधर चक्कर ही लगा रही थी। पति के साथ उसने बुधवार शाम कोतवाली पुलिस से संपर्क साधा। प्रभारी निरीक्षक हरपाल सिंह बालियान ने बताया कि आशा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। विवेचना शुरू कर दी गई है।
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भूलकर भी मोबाइल में डाउनलोड न करें एनीडेस्क ऐप
सोशल मीडिया से अक्सर एनीडेस्क एप को डाउनलोड करने का सुझाव मिलता है। जब कोई ग्राहक इस एप को डाउनलोड करता है उसे उसके पास एक नौ डिजिट का कोड आता है। इस कोड को एप में फीड करने बाद फ्रॉड करने वाले ग्राहक से उस कोड को ले लेते हैं। इसके बाद एप पर परमिशन मांगी जाती है। जैसे ही ग्राहक परमिशन देता है तो ग्राहक के फोन का कंट्रोल हैकर्स के पास चला जाता है और हैकर्स ग्राहक के फोन में मौजूद सभी जानकारियों का इस्तेमाल कर बैंक खाते को खाली कर देते हैं।
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स्वास्थ्य कर्मी आशा कुमारी कोतवाली क्षेत्र के गांव फुलासी निवासी अरविंद कुमार की पत्नी है। उसका खाता एसबीआई में है। बकौल अरविंद, मामला 11 मई का है। उस दिन आशा के मोबाइल नंबर पर किसी ने कॉल करके खुद को बैंक का अफसर बताया। बैंक से जुड़ी जानकारियों को लेकर बात करते हुए उसने आशा से मोबाइल पर एनीडेस्क एप अपलोड करने का कहा। एप अपलोड करने के बाद उसने खाता नंबर पूछ लिया। इसके कुछ देर बाद ही आशा के मोबाइल पर धीरे-धीरे छह मेसेज आए। वह मेसेज देखकर कुछ समझ पातीं, उससे पहले ही 1.69 लाख रुपये खाते से किसी अन्य खाते में ट्रांसफर हो गए।
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वितरोई में तैनात आशा ने फोन करके पति अरविंद को अवगत कराया फिर अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। बाद में अरविंद और आशा बैंक पहुंचे। उन्होंने बैंक कर्मियों को भी जानकारी दे दी। बैंक कर्मियों ने इसे फ्रॉड बताकर महिला को इस तरह की बातों से बचने की सलाह दी। इसके बाद आशा ने कार्रवाई के लिए पुलिस की साइबर सेल में भी गुहार लगाई। तब से वह इधर-उधर चक्कर ही लगा रही थी। पति के साथ उसने बुधवार शाम कोतवाली पुलिस से संपर्क साधा। प्रभारी निरीक्षक हरपाल सिंह बालियान ने बताया कि आशा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। विवेचना शुरू कर दी गई है।
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भूलकर भी मोबाइल में डाउनलोड न करें एनीडेस्क ऐप
सोशल मीडिया से अक्सर एनीडेस्क एप को डाउनलोड करने का सुझाव मिलता है। जब कोई ग्राहक इस एप को डाउनलोड करता है उसे उसके पास एक नौ डिजिट का कोड आता है। इस कोड को एप में फीड करने बाद फ्रॉड करने वाले ग्राहक से उस कोड को ले लेते हैं। इसके बाद एप पर परमिशन मांगी जाती है। जैसे ही ग्राहक परमिशन देता है तो ग्राहक के फोन का कंट्रोल हैकर्स के पास चला जाता है और हैकर्स ग्राहक के फोन में मौजूद सभी जानकारियों का इस्तेमाल कर बैंक खाते को खाली कर देते हैं।