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बदायूं के चर्चित गुप्ता दंपती हत्याकांड में सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट
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बदायूं। शहर के सात साल पुराने गुप्ता दंपती हत्याकांड में सीबीआई ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें मुख्य आरोपी उदय प्रकाश वर्मा और सह आरोपी माने गए उसके पिता राधेश्याम वर्मा की मौत हो चुकी है। जबकि तीसरा आरोपी योगेश वर्मा लखनऊ जेल में बंद है। इसके अलावा सीबीआई ने संदेह के घेरे में आए उदय के छोटे भाई मुकेश और उसकी बहन को क्लीनचिट दे दी है।
साल 2015 में शहर के कटरा ब्राहमपुर मोहल्ला में रिटायर्ड इंजीनियर ब्रजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता की उनके ही घर में पेचकस से गोदकर हत्या कर दी गई थी। जब आठ अप्रैल को उनके घर से दुर्गंध आई तब पड़ोसियों ने उसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी। इससे पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। जहां घर में दंपती के सड़ीगली हालात में शव पड़े मिले थे। कोतवाली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी लेकिन कुछ समय बाद ये मामला सीबीआई को स्थानांतरित हो गया। तब से सीबीआई विवेचना कर रही है।
करीब छह माह पहले सीबीआई ने दंपती के पड़ोसी उदय प्रकाश वर्मा के घर में तलाशी ली थी। उसके घर से कपड़े, एक चाकू और फोटो बरामद हुए थे। सीबीआई ने दावा किया था कि उदय के घर से बरामद कपड़ों पर दंपती का खून लगा है। इसके अलावा बैंक डिटेल और पूछताछ के दौरान प्रकाश में आए तथ्यों के आधार पर सीबीआई ने मुख्य आरोपी उदयप्रकाश वर्मा को माना था। जबकि सह आरोपी उसके पिता राधेश्याम वर्मा और भाई योगेश वर्मा को माना। इसके आधार पर दो माह पहले योगेश वर्मा को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। उसी दौरान राधेश्याम वर्मा की मौत हो गई। जबकि तीन साल पहले मुख्य आरोपी उदय प्रकाश वर्मा आत्महत्या कर चुका था।
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सूत्रों के अनुसार अब सीबीआई ने मृतक उदय प्रकाश वर्मा को हत्या, चोरी, साक्ष्य मिटाने और योजना के तहत घटना को अंजाम देने के आरोप में मुख्य दोषी मानते हुए चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में राधेश्याम वर्मा (अब दुनिया में नहीं) और जेल में बंद योगेश पर चोरी, साक्ष्य मिटाने और योजना में शामिल होने के आरोप में चार्जशीट लगाई है।
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बरेली के फर्जी मुकुल एनकाउंटर में पैरवी कर रहे थे ब्रजेंद्र गुप्ता
रिटायर्ड इंजनियर ब्रजेंद्र गुप्ता अपने एमआर बेटे मुकुल गुप्ता के फर्जी एनकाउंटर के मामले में पैरवी कर रहे थे। साल 2007 में मुकुल गुप्ता का बरेली के सीबीगंज इलाके में फर्जी एनकाउंटर किया गया था। मुकुल गुप्ता एक रिक्शे पर बैठकर जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रिक्शा से उतारकर गोली मार दी थी। इसमें बरेली के तत्कालीन एएसपी ट्रेनी जे रविंद्र गौड़, एसआई देवेंद्र कुमार, एसओ विकास सक्सेना, मूल सिंह, राकेश कुमार और कांस्टेबल गौरीशंकर, जगवीर सिंह, बृजेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा और कालीचरण समेत 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इस मामले की विवेचना सीबीआई ने की थी।
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सीबीआई ने छोटे बेटे का भी कराया था नारको टेस्ट
गुप्ता दंपती हत्याकांड की विवेचना के दौरान सीबीआई ने तमाम लोगों पर संदेह जताया था। इसमें दंपती के छोटे बेटे हेमंत पर भी आशंका जताई गई। इससे उसका नारको टेस्ट कराया गया लेकिन उससे कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
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ब्लड सैंपल की जांच से हुआ खुलासा
गुप्ता दंपती हत्याकांड का खुलासा ब्लड सैंपल की जांच से हुआ। जब घर से दंपती के अलावा तीसरे व्यक्ति का खून मिला। इससे सीबीआई ने उनके पड़ोसियों, परिचितों, व्यापारियों, मजदूरों समेत करीब 65 लोगों के ब्लड सैंपल की जांच कराई। इसमें उदय प्रकाश वर्मा के खून से मिलान हुआ। तब सीबीआई ने उदय के भाई और उसके परिवारवालों पर शिकंजा कसा और हत्याकांड का खुलासा हुआ।
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योगेश ने सीबीआई पर लगाया था फर्जी खुलासे का आरोप
जेल जाने से पहले सह आरोपी योगेश वर्मा ने सीबीआई पर फर्जी खुलासे का आरोप लगाया था। उसका कहना था कि उसे झूठे केस में फंसाया जा रहा है। चूंकि उसके भाई उदय प्रकाश वर्मा की मौत हो चुकी है। इससे सीबीआई उसे ही आरोपी मानकर हत्याकांड को रफादफा करना चाहती है। उसने अपने घर से बरामद सामान पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि इसके बाद सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। संवाद
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साल 2015 में शहर के कटरा ब्राहमपुर मोहल्ला में रिटायर्ड इंजीनियर ब्रजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता की उनके ही घर में पेचकस से गोदकर हत्या कर दी गई थी। जब आठ अप्रैल को उनके घर से दुर्गंध आई तब पड़ोसियों ने उसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी। इससे पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। जहां घर में दंपती के सड़ीगली हालात में शव पड़े मिले थे। कोतवाली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी लेकिन कुछ समय बाद ये मामला सीबीआई को स्थानांतरित हो गया। तब से सीबीआई विवेचना कर रही है।
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करीब छह माह पहले सीबीआई ने दंपती के पड़ोसी उदय प्रकाश वर्मा के घर में तलाशी ली थी। उसके घर से कपड़े, एक चाकू और फोटो बरामद हुए थे। सीबीआई ने दावा किया था कि उदय के घर से बरामद कपड़ों पर दंपती का खून लगा है। इसके अलावा बैंक डिटेल और पूछताछ के दौरान प्रकाश में आए तथ्यों के आधार पर सीबीआई ने मुख्य आरोपी उदयप्रकाश वर्मा को माना था। जबकि सह आरोपी उसके पिता राधेश्याम वर्मा और भाई योगेश वर्मा को माना। इसके आधार पर दो माह पहले योगेश वर्मा को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। उसी दौरान राधेश्याम वर्मा की मौत हो गई। जबकि तीन साल पहले मुख्य आरोपी उदय प्रकाश वर्मा आत्महत्या कर चुका था।
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सूत्रों के अनुसार अब सीबीआई ने मृतक उदय प्रकाश वर्मा को हत्या, चोरी, साक्ष्य मिटाने और योजना के तहत घटना को अंजाम देने के आरोप में मुख्य दोषी मानते हुए चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में राधेश्याम वर्मा (अब दुनिया में नहीं) और जेल में बंद योगेश पर चोरी, साक्ष्य मिटाने और योजना में शामिल होने के आरोप में चार्जशीट लगाई है।
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बरेली के फर्जी मुकुल एनकाउंटर में पैरवी कर रहे थे ब्रजेंद्र गुप्ता
रिटायर्ड इंजनियर ब्रजेंद्र गुप्ता अपने एमआर बेटे मुकुल गुप्ता के फर्जी एनकाउंटर के मामले में पैरवी कर रहे थे। साल 2007 में मुकुल गुप्ता का बरेली के सीबीगंज इलाके में फर्जी एनकाउंटर किया गया था। मुकुल गुप्ता एक रिक्शे पर बैठकर जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रिक्शा से उतारकर गोली मार दी थी। इसमें बरेली के तत्कालीन एएसपी ट्रेनी जे रविंद्र गौड़, एसआई देवेंद्र कुमार, एसओ विकास सक्सेना, मूल सिंह, राकेश कुमार और कांस्टेबल गौरीशंकर, जगवीर सिंह, बृजेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा और कालीचरण समेत 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इस मामले की विवेचना सीबीआई ने की थी।
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सीबीआई ने छोटे बेटे का भी कराया था नारको टेस्ट
गुप्ता दंपती हत्याकांड की विवेचना के दौरान सीबीआई ने तमाम लोगों पर संदेह जताया था। इसमें दंपती के छोटे बेटे हेमंत पर भी आशंका जताई गई। इससे उसका नारको टेस्ट कराया गया लेकिन उससे कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
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ब्लड सैंपल की जांच से हुआ खुलासा
गुप्ता दंपती हत्याकांड का खुलासा ब्लड सैंपल की जांच से हुआ। जब घर से दंपती के अलावा तीसरे व्यक्ति का खून मिला। इससे सीबीआई ने उनके पड़ोसियों, परिचितों, व्यापारियों, मजदूरों समेत करीब 65 लोगों के ब्लड सैंपल की जांच कराई। इसमें उदय प्रकाश वर्मा के खून से मिलान हुआ। तब सीबीआई ने उदय के भाई और उसके परिवारवालों पर शिकंजा कसा और हत्याकांड का खुलासा हुआ।
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योगेश ने सीबीआई पर लगाया था फर्जी खुलासे का आरोप
जेल जाने से पहले सह आरोपी योगेश वर्मा ने सीबीआई पर फर्जी खुलासे का आरोप लगाया था। उसका कहना था कि उसे झूठे केस में फंसाया जा रहा है। चूंकि उसके भाई उदय प्रकाश वर्मा की मौत हो चुकी है। इससे सीबीआई उसे ही आरोपी मानकर हत्याकांड को रफादफा करना चाहती है। उसने अपने घर से बरामद सामान पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि इसके बाद सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। संवाद